राजस्थान में लौटने लगी पर्यटन स्थलों पर रौनक, बढ़ने लगी सैलानियों की आवाजाही

राजस्थान में लौटने लगी पर्यटन स्थलों पर रौनक, बढ़ने लगी सैलानियों की आवाजाही

जयपुर: कोरोना ने पर्यटन को झकझोर कर रख दिया था लेकिन अनलॉक के साथ ही प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर रौनक लौटने लगी है. जुलाई में मानसून छाने के साथ ही पर्यटन भी परवान पर पहुंच गया जो लगातार बढ़ रहा है. जुलाई में ऑफ सीजन के बाद भी 2 लाख 15 हजार से ज्यादा सैलानियों ने पर्यटनस्थलों का भ्रमण किया. इससे एक बात साफ हो गई कि हमारी विरासत को न तो कोई आतताई नष्ट कर सका न ही कोई वायरस उसका कुछ बिगाड़ सकता है. 

1 जुलाई से 31 जुलाई तक पर्यटक संख्या:-
नाम                               पर्यटक
आमेर                            44954
नाहरगढ                        38013
हवामहल                       38483
जंतर मंतर                      23686
अल्बर्ट हॉल                    20081
सिसोदिया रानी का बाग   1868
ईसरलाट                        705
विद्याधर का बाग             436
कुल                             168226

शेष राजस्थान के स्मारक        47056
महायोग                               215282

कोरोना की पहली लहर से पर्यटन सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हुआ था लेकिन दूसरी लहर ने तो पर्यटन ढांचे की चूलें हिला दी. करीब 61 दिन तक प्रदेश के तमाम पर्यटनस्थल कोरोना के चलते बन्द रहे. इनमें केन्द्र के पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन आने वाले 164 और राज्य के पुरातत्व विभाग के अधीन आने वाले 33 स्मारक शामिल हैं. मन्दिर, मस्जिद, गुरुद्वारे सहित तमाम धार्मिक स्थल भी बंद रहे और अंतरराष्ट्रीय उड़ाने तो पूरी तरहबन्द रही. नतीजतन प्रदेश के पर्यटनस्थलों पर सन्नाटा पसरा रहा. इसका परिणाम यह रहा कि पर्यटन परनिर्भर उद्योग जिनमें होटल, रिसॉर्ट, ट्रांसपोर्ट, कैटरिंग, रेस्टोरेंट, बार, टैक्सी संचालक, गाइड, हॉकर, वेंडर और सफारी कराने वालों सहित तमाम स्टेकहोल्डर्स को भारी नुकसान उठाना पड़ा. हजारों लोग बेरोजगार हो गए, बहुत सी यूनिट्स बंद करनी पड़ी. अब कोरोना कंट्रोल हुआ तो प्रदेश के पर्यटन उद्योग में मानो नया सवेरा हुआ हो. 

विश्व विरासत में शुमार आमेर में हाथियों की पदचाप भी सुनाई दी:
अनलॉक के साथ ही विश्व विरासत में शुमार आमेर में हाथियों की पदचाप भी सुनाई दी, मावठे की मछलियों को दाना भी मिलने लगा, हवामहल की पाल पर भुट्टों का मजा लेते पर्यटक भी दिखने लगे हैं.16 जून को पर्यटनस्थलों को खोला गया था उसके बाद से 30 जून तक के एक पखवाड़े में भारी गर्मी के बाद भी प्रदेश में 25 हजार 916 पर्यटकों की आमद हुई. जुलाई आते आते तो मानसून के साथ ही पर्यटकों का भी सैलाब उमड़ने लगा है. जुलाई में प्रदेश में कुल 2 लाख 15 हजार 282 पर्यटक आए. इनमें से सर्वाधिक 1 लाख 68 हजार 226 पर्यटक जयपुर के पर्यटनस्थलों पर और 47 हजार 56 सैलानी शेष राजस्थान के पर्यटनस्थलों पर पहुंचे. राजधानी जयपुर के स्मारकों की बात करें तो इनमे सर्वाधिक 44954 पर्यटक आमेर तो 38013 सैलानी नाहरगढ़ देखने पहुंचे. पर्यटकों में राजधानी जयपुर के स्मारकों का खासा क्रेज देखने को मिला. 

प्रदेश की विरासत इतनी आकर्षक इसे कोई वायरस हरा नहीं सकता:
पर्यटन निदेशक निशांत जैन की माने तो प्रदेश की विरासत इतनी आकर्षक है कि इसे कोई वायरस हरा नहीं सकता, 2 महीने तक कोरोना के डर से घरों में कैद लोग इसी आकर्षण में अनलॉक होते ही आने गर्व करने वाले अतीत की धरोहर को संभालने या यूं कहें देखने उमड़ पड़े. पुरातत्व निदेशक प्रकाश शर्मा का कहना है कि कोविड गाइड लाइन का पूरा पालन किया जा रहा है, ऑनलाइन टिकटिंग और मोबाइल ऐप पर टिकट से भी पर्यटकों को सहूलियत हुई है. बहरहाल कुछ भी हो हमारी विरासत, सरकार की पर्यटन उद्योग को रियायतें और लॉक डाउन से निकलकर जनता की चिल करने की ललक ने पर्यटनस्थलों पर रौनक लौटा दी है. कोरोना पर कंट्रोल रहा तो सितम्बर से शुरू होने वाला पर्यटन सत्र पर्यटन उद्योग को संजीवनी देने वाला साबित हो सकता है.
 

और पढ़ें