भीमा कोरेगांव जंग की 201वीं सालगिरह आज, ये है मामला

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/01/01 01:53

नई दिल्ली। भीमा कोरेगांव में हुए युद्द की आज 200वीं सालगिरह है और यहां हुई हिंसा को एक साल पूरा हो गया है। भीमा कोरेगांव युद्द का असर कई शहरों में पड़ा था। यहां लड़ी गई 200 साल पुरानी लड़ाई जिसमें 800 महारों ने 28 हजार मराठाओं को हरा दिया था। 

दरअसल, आज से 200 साल पहले भीमा कोरेगांव में लड़ी गई लड़ाई में अंग्रेजों की सेना ने पेशवा बाजीराव द्वितीय के 28000 सैनिकों को हराया था। ब्रिटिश सेना के अधिकतर जवान महार समुदाय के थे। कुछ इतिहासकारों के हिसाब से उनकी संख्या 500 से ज्यादा थी। इसलिए दलित समुदाय इस युद्ध को ब्रह्माणवादी सत्ता के खिलाफ जंग मानता है। तब से हर साल 1 जनवरी को दलित नेता ब्रिटिश सेना की इस जीत का जश्न मनाते हैं।

बतादें भीमा-कोरेगांव की जंग खत्म होने के बाद महारों के सामाजिक जीवन में कुछ बदलाव आए। अंग्रेजों ने इनके उत्थान और सामाजिक विकास के लिए कई काम किए। अंग्रेजों ने महार जाति के बच्चों के लिए कई स्कूल खोले। धीरे-धीरे उन नियमों को भी खत्म करने की कोशिश हुई, जिनके बोझ तले इतने साल से महार जाति दबी हुई थी।

उल्लेखनीय है कि इस युद्ध की याद में अंग्रेजों ने 1851 में भीमा-कोरेगांव में एक स्मारक का निर्माण कराया। हर साल 1 जनवरी को इस विजय की याद में दलित समुदाय के लोग एकत्र होते थे। हालांकि, यह अंग्रेजों ने अपनी शक्ति के प्रतीक के रूप में बनाया था, लेकिन अब यह महारों के स्मारक के रूप में जाना जाता है। पिछले साल इसी स्मारक की ओर बढ़ते वक्त दो गुटों में झड़प हो गई जो कि हिंसा का मुख्य कारण बना।
 

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