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Holi Festival 2020: बीकानेर में होली मनाने का अंदाज सबसे अलग, चंग की थाप पर रसिये गा रहे हैं फाल्गुनी गीत 

Holi Festival 2020: बीकानेर में होली मनाने का अंदाज सबसे अलग, चंग की थाप पर रसिये गा रहे हैं फाल्गुनी गीत 

बीकानेर: रसगुल्लों की मिठास और भुजिया के तीखेपन के लिए प्रसिद्द बीकानेर में होली मनाने का अंदाज सबसे अलग है. अल्हड़ ओर अलबेलों के शहर बीकानेर में होली की रंगत परवान पर है. चंग की थाप पर रसिये फाल्गुनी गीत गा रहे है तो वहीं रात में रम्मतों का आयोजन होता है. बसंती बयार के इस फाल्गुन माह में जीवन की एक अलग ही उमंग होती है. जीवन के रंगों को दर्शाता यह महीना अपनी अल्हड़ता और मस्ती के लिए पूरी दुनिया में विशेष अंदाज में जीया जाता है.

देशवासियों पर चढ़ा होली के रंगों का खुमार, होलिका दहन आज

बीकानेर में फाल्गुन मास की अष्टमी से लेकर होलिका दहन तक चंग पर रसीले रसियों के गीतों के साथ पड़ती थाप, देवर भाभी की नोंक झोंक भरे गीत और रम्मतों के आयोजन की बात ही निराली होती है. रियासत काल से चली आ रही इन परंपराओं और गंगा जमुना संस्कृति के लिए पहचाने जाने वाले रेतीले धोरों के शहर बीकानेर में पुरुष, महिलाएं,बूजुर्ग ओर बच्चे बढ़ चढ़कर होली के त्यौहार में भाग लेते हैं.

बीकानेर रम्मतों का शहर:

होली के दिनों में होने वाली रम्मतों के कारण ही बीकानेर को रम्मतों का शहर कहा जाता है. होलकाष्टक के दिनों में शहर के प्रत्येक चौक में किसी न किसी रम्मत का आयोजन अवश्य होता है. रम्मतों को देखने के लिए शहरवासियों की भीड़ उमड़ती है. रम्मत नाटक की एक विधा है, जिसमें पात्र अभिनय करते हैं. रम्मत में पात्रों द्वारा गद्य विद्या में संवाद बोले जाते हैं और ख्याल, लावणी, चौमासे गाए जाते हैं. रम्मत में किसी न किसी कथानक का सहारा लेकर भी अभिनय होता है.

हडाऊ मेरी की रम्मत:

बीकानेर शहर के  बारहगुवाड़ चौक में फक्कडदाता की रम्मत, हडाऊ मेरी की रम्मत, स्वांगमेरी की रम्मत खेली जाती है. इसी तरह बिस्सों के चौक में भक्त पूरणमल या शहजादी नौटंकी का मंचन होता है. इसी तरह आचार्यों के चौक में अमरसिंह राठौड़ की रम्मत व किकाणी  व्यासों के चौक में जमनादास कल्ला की रम्मत का आयोजन होता है. रम्मतों में उमडऩे वाली भीड़ से स्वत: अंदाजा लगाया जा सकता है कि बीकानेर  का आम जनमानस कितने गहरे तक अपनी परंपराओं व रीति-रिवाजों से आज भी जुड़ा हुआ है.

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रियासतकालीन परम्परा को रखे हुए जीवंत: 
रियासत काल से बीकानेर में रम्मतों का आयोजन हो रहा है ओर बीकानेर के लोग आज भी इस रियासतकालीन परम्परा को जीवंत रखे हुए है. रम्मतों में देश की वर्तमान परिस्थितियों के बारे में व्यंग्य के माध्यम आमजन को रूबरू भी करवाया जाता है. जहां एक ओर आज की युवा पीढ़ी ने सोशल मीडिया को अपना मनोरंजन का साधन बना रखा है. वहीं बीकानेर में रम्मतों के जरिए लोगों का शूद्ध मनोरंजन किया जाता है और पौराणिक लोक कला व नाट्य कला को जीवंत रखने की कोशिश की जा रही है.तो कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि रियासत काल से चली आ रही रम्मतों की परंपरा को अनवरत जारी रखना बताता है कि बीकानेर के लोग आज भी अपनी पौराणिक संस्कृति को संजोए हुए है. तो हम तो यही कहेंगे कि अगर आप भी होली के दिनों में बीकानेर आए तो इन रम्मतों का लुत्फ जरूर उठाए.

...फर्स्ट इंडिया के लिए बीकानेर से संजय पारीक की रिपोर्ट

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Navratri 2020: मां चंद्रघंटा की इस विधि से करें पूजा, पापों का होता है नाश

Navratri 2020: मां चंद्रघंटा की इस विधि से करें पूजा, पापों का होता है नाश

जयपुर: नवरात्रि के तीसरे दिन देवी के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. माता के सिर पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है. इसी वजह से इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है. देवी चंद्रघंटा का वाहन सिंह है. इनकी दस भुजाएं और तीन आंखें हैं. आठ हाथों में खड्ग, बाण जैसे दिव्य अस्त्र-शस्त्र हैं और दो हाथों से ये भक्तों को आशीष देती हैं. इनका संपूर्ण शरीर दिव्य आभामय है. मान्यता है कि माता रानी का चंद्रघंटा स्वरूप भक्तों को निर्भय और सौम्य बनाता है. ज्योतिषियों के अनुसार जिन जातकों का चंद्रमा कमजोर होता है उन्हें मां चंद्रघंटा की पूजा अवश्य करनी चाहिए. 

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कैसे करें पूजा:
मां चंद्रघंटा की पूजा लाल वस्त्र धारण करके करना श्रेष्ठ होता है. मां को लाल पुष्प,रक्त चन्दन और लाल चुनरी समर्पित करना उत्तम होता है. इनकी पूजा से मणिपुर चक्र मजबूत होता है. मां को केसर की खीर और दूध से बनी मिठाई का भोग लगाना चाहिए.  पंचामृत, चीनी व मिश्री भी मां को अर्पित करनी चाहिए.

मां की उपासना का मंत्र
पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता.
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुत.

या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता.
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नम:.

मां चंद्रघंटा की पूजा से पापों का होता है नाश:
माता भक्तों को सभी तरह के पापों से मुक्त करती हैं. इनकी पूजा से बल और यश में बढ़ोतरी होती है. स्वर में दिव्य अलौकिक मधुरता आती है. देवी की घंटे-सी प्रचंड ध्वनि से भयानक राक्षस भय खाते हैं. 

Horoscope Today, 19 October 2020: आज इन पांच राशियों के लिए शानदार रहेगा सोमवार का दिन, पढ़ें दैनिक राशिफल

Horoscope Today, 19 October 2020: आज इन पांच राशियों के लिए शानदार रहेगा सोमवार का दिन, पढ़ें दैनिक राशिफल

जयपुर: दैनिक राशिफल चंद्र ग्रह की गणना पर आधारित होता है. राशिफल की जानकारी करते समय पंचांग की गणना और सटीक खगोलीय विश्लेषण किया जाता है. दैनिक राशिफल में सभी 12 राशियों के भविष्य के बारे में बताया जाता है. ऐसे में आप इस राशिफल को पढ़कर अपनी दैनिक योजनाओं को सफल बना सकते हैं. आइये अब जानते है की हमारे पढ़ने वाले बच्चे जो अब स्कूल एक्साम्स या बोर्ड एक्साम्स या किसी कॉम्पिटशन के तैयारी कर रहे है उनके लिए माता रानी क्या सन्देश लायी है..

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मेष(Aries): जोखिम उठाने की जरूरत नहीं सहज ही कार्यसिद्ध हो जाएगा. आज आपको अपने मन और मस्तिष्क पर पूरा नियंत्रण रखना पड़ेगा. किसी साथी की बात पर आप अचानक ही भड़क सकते हैं, जरूरी है आप ठंडे दिमाग से काम ले.  

वृष( Taurus): आज दौड़-भाग के बाद कई काम बन जाएंगे. यदि आप समय के अनुसार चल रहे हैं और जरूरत के मुताबिक यह भी महसूस कर रहे हैं कि आपको रिस्क लेने के लिए तैयार रहना है तो आप इस मामले में अकेले पड़ सकते हैं.  

मिथुन( Gemini): लाभकारी गोचर है समय का सदुपयोग करना ही उचित है. काफी समय के बाद आज आपको अपने व्यक्तिगत जीवन पर सोच-विचार करने की फुर्सत मिलेगी. आज ही कुछ ऐसा भी मौका आ रहा जब आप दूसरों का सहयोग पाने में सफल होंगे.

कर्क( Cancer): किसी शंका के कारण आप पूर्ण लाभ से वंचित हो सकते हैं. आज के दिन आपके लिए ढे़र सारे कार्यक्रम तैयार पड़े हैं. एक ओर जहां आपने आगे की जाने वाली यात्रा का बंदोबस्त करना है वहां अपने काम को बढ़ाने के लिए संपर्क और गठजोड़ भी करने हैं.

सिंह( Leo): मन में उत्साह और प्रसन्नता रहेगी निकटस्थ जनों का सहयोग भी मिलेगा. आज के दिन आपको अपने कामकाज के अलावा रोमांस और मन की इच्छाओं का भी ध्यान रखना पड़ेगा. सांयकाल के समय किसी पिकनिक का प्लान बन सकता है.

कन्या( Virgo): आज वस्तु हानि भी हो सकती है. अपने जीवन में रचनात्मक कार्य की बजाए प्रेम और लक तथा सौभाग्य को ही आपने ज्यादा महत्व दिया है. यदि इन सबसे पहले रचनात्मक कार्यों में ज्यादा तल्लीन रहते तो आपको अपने परिवार और बच्चों का भी समर्थन मिल जाता.

तुला( Libra): बारम्बार लाभ भी होगा और अच्छी खबरें भी मिलेंगे. अपने स्वास्थ्य को लेकर आप के दिन आपको कुछ जरूरी कदम उठाने आवश्यक हैं. इस चर्चा के साथ ही आपको अपने नौकर चाकर या सहयोगीजनों के भुगतान की भी चिंता करनी पड़ेगी.  

वृश्चिक( Scorpio): आजीविका के जटिल प्रश्न हल होते नजर आएंगे. आपके जीवन में कई प्रकार के बदलाव और उतार-चढ़ाव इस दौरान आ रहे हैं. आप कहीं पर भी जाएं वहां भी आपको कुछ न कुछ करके अपने लिए साधन तैयार करना होगा.

धनु( Sagittarius): भाग्योदय में कुछ विलंब हो सकता है. प्रयास जारी रखें. रोमांस के मामले में आपके जीवन में नफरत और प्रेम का लेखा-जोखा बराबर रहता है. आपमें से कई लोग ऐसे हैं जिनको इन दिनों अपने गृहस्थ जीवन को संवारने में काफी मेहनत करनी पड़ रही है.

मकर( Capricorn): यदि आप नौकरी पेशा हैं तो आपको किसी अच्छे काम का प्रोत्साहन भी मिल सकता है. घर में आपका माहौल बहुत शांत है और यह सब आगे चलकर आपके लिए कुछ ऐसी खुशियां ला सकता है जिसके चलते आपकी जीवन शैली उत्कृष्ट और श्रेष्ठ बन सकती है.

कुंभ( Aquarius): अगर गंभीर होकर अपने कार्य में तत्पर हैं तो उन्नति की उच्च सीमा तक भी जा सकते हैं. समय का सहयोग अगर मिलता रहा और आपकी इच्छा शक्ति इसी तरह से कायम रही तो वह समय भी दूर नहीं होगा जब आप औरों के मुकाबले काफी आगे निकल जाएंगे.

मीन( Pisces): निकट सहयोगियों से वैर विरोध न हो इस बात का ध्यान रखें. आज आप अपने कार्यक्षेत्र में कुछ कठिनाई महसूस कर रहे हैं. एक साथ कई प्रकार के काम हाथ में ले लेने से ऐसा महसूस होना जरूरी भी है.
सौजन्य - राज ज्योतिषी पंडित मुकेश शास्त्री

19 अक्टूबर 2020: जानिए आज का पंचांग, ये रहेगा शुभ-अशुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

19 अक्टूबर 2020: जानिए आज का पंचांग, ये रहेगा शुभ-अशुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

जयपुर: पंचांग का हिंदू धर्म में शुभ व अशुभ देखने के लिए विशेष महत्व होता है. पंचाम के माध्यम से समय एवं काल की सटीक गणना की जाती है. यहां हम दैनिक पंचांग में आपको शुभ मुहूर्त, शुभ तिथि, नक्षत्र, व्रतोत्सव, राहुकाल, दिशाशूल और आज शुभ चौघड़िये आदि की जानकारी देते हैं. तो ऐसे में आइए पंचांग से जानें आज का शुभ और अशुभ मुहूर्त और जानें कैसी रहेगी आज ग्रहों की चाल... 

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शुभ मास-  द्वितीय आश्विन (शुद्ध  ) मास  शुक्ल पक्ष
शुभ तिथि तृतीया जया संज्ञक तिथि दोपहर 2 बजकर 08  मिनट तक तत्पश्चात चतुर्थी रिक्ता संज्ञक तिथि आरम्भ. तृतीया तिथि में सभी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्य, विवाह, प्रतिष्ठा, अन्नप्राशन, यज्ञोपवीत, उत्सव, यज्ञादि कार्य विशेष शुभ माने जाते हैं. तृतीया तिथि मे जन्मे जातक प्रमादी, धनवान, बुद्धिवान, भाग्यवान,पराक्रमी होते हैं.

अनुराधा "मृदु " संज्ञक नक्षत्र  रात्रि 3 बजकर 52  मिनट तक रहेगा. अनुराधा नक्षत्र मे विवाह, जनेऊ, यात्रा, अलंकार, तथा अन्य शुभ कार्य व मांगलिक कार्य शुभ माने जाते हैं. अनुराधा नक्षत्र मे जन्मा जातक सुन्दर, साहसी, व्यापार निपुण, धनवान, बुद्धिमान होता है.  

चन्द्रमा - सम्पूर्ण दिन  वृश्चिक राशि में संचार करेगा  

व्रतोत्सव -  सर्वार्थसिद्धि योग

राहुकाल - प्रातः 7.30 बजे से 9 बजे तक

दिशाशूल - सोमवार को पूर्व दिशा मे दिशाशूल रहता है. यात्रा को सफल बनाने लिए घर से दूध पी कर निकले.  

आज के शुभ चौघड़िये - सूर्योदय से प्रातः 7.57  तक अमृत, प्रातः 9.22  मिनट से पूर्वाह्न 10.47  मिनट तक शुभ और दोपहर 1.37  मिनट से सूर्यास्त तक चर, लाभ, अमृत का चौघड़िया.

सौजन्य - राज ज्योतिषी पंडित मुकेश शास्त्री 

Navratri Special: यहां माता के दरबार में पुलिस देती है पहरा, सरकारी आभूषणों से होता है माता का श्रृंगार

Navratri Special: यहां माता के दरबार में पुलिस देती है पहरा, सरकारी आभूषणों से होता है माता का श्रृंगार

झालावाड़: प्रदेश झालावाड़ जिले के असनावर के पास मुकंदरा की हिल्स के बीच दर्शन देती हैं मां राता देवी. यहीं नहीं यहां पुलिस देती है पहरा और झालरापाटन तहसील से जाते है सोने के आभूषण. जो 9 दिनों तक माता के श्रृंगार में शोभा बढ़ाते हैं. चलिए आपको शारदीय नवरात्रि के मौके पर मातारानी के इस धाम की यात्रा करवाते हैं. आपको बता दें कि झालावाड़ से मात्र 30 किलोमीटर दूर असनावर के निकट लावासल ग्राम पंचायत में मुकन्दरा पर्वत माला के बीच रातादेवी का मंदिर श्रद्धालुओं का आस्था का केंद्र हैं. 

हर मन्नत माता के मंदिर में होती हैं पूरी:
यह खींची राजवंश की कुलदेवी हैंं पूरा मंदिर सफेद संगमरमर से निर्मित हैं. राता देवी गागरोन के राजा अचलदास खींची की बहन थी, जो सती होने के दौरान पत्थर के रूप में  परिवर्तित हो गई. इनके यहां 2 स्वरूपों मे पुजा की जाती हैं. इसमें 1 बिजासन ओर दूसरे रूप में  अन्नपूर्ण के रूप में पुजा होती है. माता की मूर्ति के पीछे अचलदास की छाप है. चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि में 9 दिन तक यहां मेला लगता था, जो पूरे हाड़ौती और मध्य प्रदेश के लोग यहां काफी संख्या में आते थे और पूजा अर्चना करते है. कहते है कि यहां आकर मन्त्रते मांगने से सभी की झोली भर जाती है. कोई खाली हाथ नहीं जाता, लेकिन लॉकडाउन और कोरोना के चलते यहां आने वाले लाखों भक्त अब गिनती के पहुंच रहे है, जो भक्त आ रहे है उनको भी यहां सेनेटाइज किया जा रहा है, सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करवाई जा रही है. 

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लोगों के आस्था और विश्वास का केंद्र: 
यह मंदिर खींची राजाओं ने बनवाया था , यह उनकी कुल देवी के नाम से भी जानी जाती है. समय समय पर खींची राजाओं के वंशज यहां आकार पुजा अर्चना करते है. नवरात्रा में यहां उनके परिवार के लोग आते है और पूजा अर्चना करते है. लोगों का आस्था ओर विश्वास का केंद्र है यह राता देवी मंदिर. इस मंदिर में हमेशा देशी घी के दिए जलते रहते है. बाहर से आने वाले भक्तों की यहां हर इच्छा पूरी होती है. यहां नवरात्रा में मन्दिर में पुलिस का पहरा रहता है, जो हर 3 घन्टे में बदलता रहता है. यहीं नहीं सुबह शाम आरती के समय पुलिस सलामी देती है. राजस्थान का यह पहला मन्दिर होगा, जहां सरकारी आभूषणों से श्रृंगार होता है और पुलिस सलामी देती हो, श्रद्धालुओ में यहां नवरात्रा में दर्शन करने में बहुत आस्था है और पहले हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां नंगे पांव चले आते थे, लेकिन अभी कोरोना काल चल रहा है और प्रशासन ने भी यहां सख्ती बढा रखी है ऐसे में फर्स्ट इंडिया न्यूज के माध्यम से आप मा राता देवी के दर्शन कर सकते है. 

...फर्स्ट इंडिया के लिए आरिफ मंसूरी की रिपोर्ट 

Horoscope Today, 18 October 2020: आज बन रहे है खास योग, इन राशिवालों के पूरे होंगे हर काम, जानिए आज का राशिफल

Horoscope Today, 18 October 2020: आज बन रहे है खास योग, इन राशिवालों के पूरे होंगे हर काम, जानिए आज का राशिफल

जयपुर: दैनिक राशिफल चंद्र ग्रह की गणना पर आधारित होता है. राशिफल की जानकारी करते समय पंचांग की गणना और सटीक खगोलीय विश्लेषण किया जाता है. दैनिक राशिफल में सभी 12 राशियों के भविष्य के बारे में बताया जाता है. ऐसे में आप इस राशिफल को पढ़कर अपनी दैनिक योजनाओं को सफल बना सकते हैं. आइये अब जानते है की हमारे पढ़ने वाले बच्चे जो अब स्कूल एक्साम्स या बोर्ड एक्साम्स या किसी कॉम्पिटशन के तैयारी कर रहे है उनके लिए माता रानी क्या सन्देश लायी है..

मेष राशि :- मेष राशि वाले बच्चों के लिए शुभ समय है.माता कि निरंतर स्तुति आपको सफलता का वरदान जरुर देगी. 21 बार रोज विद्या मंत्र जरुर पढ़ें. 

वृष राशि :- वृष राशि वाले बच्चो को थोड़ा हार्ड वर्क करना होगा. जल्दी सफलता का मीठा स्वाद चखने को मिलेगा. माता की कृपा प्राप्त करने के लिये  विद्या मंत्र को 21  बार रोज पढ़े.

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मिथुन राशि :- आपको अपनी एनर्जी लेवल का इस्तेमाल सही तरीके से करना होगा. सफलता आपके कदम चूमेंगी. विद्या मंत्र रोज 21 बार जरुर पढ़ें.

कर्क राशि :- आने वाला समय थोड़ा संघर्ष पूर्ण हो सकता है लेकिन थोड़ी सी मेहनत बड़ा रास्ता खोज सकती है. रोज 21  बार विद्या मंत्र पढ़ने से विशेष सप्कलाता प्राप्त होगी.  

सिंह राशि :- मन के  मुताबिक विद्या पाने के  दरवाजे खुलेंगे. पढ़ने वाले बच्चो का अच्छा समय है. विद्या मंत्र का पाठ पूर्व दिशा की ओर मुंह करके 21  बार रोज करें.

कन्या राशि :- आपको अपनी विद्या के प्रदर्शन का सुनहरा मौका भी मिलेगा.ऊँची उड़ान भरने के लिये तैयार है.उत्तर दिशा की ओर मुंह करके  रोज विद्या मंत्र पढ़ने से आपको विद्या मिलेगी. 

तुला राशि :- अगर आप प्रतियोगिता परीक्षा में बैठने जा रहे हैं तो सफलता की उम्मीद मजबूत है. विद्या मंत्र को रोज पढ़े.

वृश्चिक राशि :-माँ की कृपा आप पर बरसेगी. मेहनत से जी ना चुराये.विद्यार्थिओं के लिये बहुत अनुकूल समय है. विद्या मंत्र को  रोज पढ़ें.

धनु राशि :- विद्यार्थियों के लिये बहुत अच्छा मौका है. जिंदगी एक पोसिटिव टर्न लेने के लिये तैयार है. अभूतपूर्व सफलता सामने खड़ी है.विद्या मंत्र का 21 बार जप रोज करें.

मकर राशि :- परीक्षा में सफलता के लिए थोड़ा संघर्ष करना पड़ेगा. हिम्मत नहीं हारे अपना 100 % दें. विद्या मंत्र का जप  रोजा करे.

कुम्भ राशि : - आपका समय संघर्ष पूर्ण लेकिन अच्छा है. माता की कृपा से विशेष सफलता का योग बनता है. विद्या मंत्र का पाठ रोज करें.

मीन राशि :- आपके लिए माता रानी सफलता के रास्ते खोल रही है बस जरुरत है एक कदम उठाने की वो भी पूरी मजबूती के साथ. विद्या मंत्र का पाठ 21 बार रोज करें.

आइये अब जान लेते है विद्या प्राप्ति मन्त्र:

या देवी सर्वभूतेषु विद्यारुपेण संस्तिथा
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नम:

सौजन्य - राज ज्योतिषी पंडित मुकेश शास्त्री

18 अक्टूबर 2020: पंचांग से जानें आज का शुभ-अशुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

18 अक्टूबर 2020: पंचांग से जानें आज का शुभ-अशुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

जयपुर: पंचांग का हिंदू धर्म में शुभ व अशुभ देखने के लिए विशेष महत्व होता है. पंचाम के माध्यम से समय एवं काल की सटीक गणना की जाती है. यहां हम दैनिक पंचांग में आपको शुभ मुहूर्त, शुभ तिथि, नक्षत्र, व्रतोत्सव, राहुकाल, दिशाशूल और आज शुभ चौघड़िये आदि की जानकारी देते हैं. तो ऐसे में आइए पंचांग से जानें आज का शुभ और अशुभ मुहूर्त और जानें कैसी रहेगी आज ग्रहों की चाल... 

शुभ मास-  द्वितीय आश्विन (शुद्ध  ) मास  शुक्ल  पक्ष:
शुभ तिथि द्वितीया भद्रा संज्ञक तिथि सायं 5 बजकर 28 मिनट तक रहेगी. द्वितीय तिथि में गृह निर्माण,गृह प्रवेश,विवाह, जनेऊ, वास्तु, प्रतिष्ठा  इत्यादि मांगलिक और शुभ कार्य शुभ रहते है. द्वितीय तिथि में जन्मे जातक धनवान,बुद्धिवान ,सुखी ,शौकीन होते है. शुभ नक्षत्र स्वाति नक्षत्र प्रातः 8 बजकर 51 मिनट तक तत्पश्चात विशाखा नक्षत्र रहेगा. स्वाति नक्षत्र मे यदि तिथि शुभ हो तो यात्रा,विवाह, गृह प्रवेश, मांगलिक कार्य  इत्यादि कार्य विशेष रूप से सिद्ध होते है. स्वाति नक्षत्र मे जन्मा जातक मेघावी,विलासप्रिय ,धनवान, बुद्धिमान होता.  

चन्द्रमा - सम्पूर्ण दिन तुला राशि में संचार करेगा.  

व्रतोत्सव -  चन्द्रदर्शन,त्रिपुष्कर योग

राहुकाल -सायंकाल 4.30 बजे से 6 बजे तक

दिशाशूल - रविवार को पश्चिम दिशा मे दिशाशूल रहता है. यात्रा को सफल बनाने लिए घर से घी-दलिया खा कर निकले.

आज के शुभ चौघड़िये - प्रातः 7.57  से दोपहर 12-12  तक चर,लाभ व् अमृत , दोपहर 1-40 से दोपहर 3-06  तक शुभ  का चौघड़िया.

सौजन्य - राज ज्योतिषी पंडित मुकेश शास्त्री 

श्रद्धालुओं के लिए खुला सबरीमाला मंदिर, 21 अक्टूबर तक कर सकेंगे पूजा-अर्चना

श्रद्धालुओं के लिए खुला सबरीमाला मंदिर, 21 अक्टूबर तक कर सकेंगे पूजा-अर्चना

सबरीमला(केरल): कोरोना वायरस महामारी के कारण छह महीने से अधिक समय तक बंद रहने के बाद प्रसिद्ध अयप्पा मंदिर को शनिवार सुबह श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया और कुछ लोगों ने दर्शन भी किये जो मास्क पहने थे और कोविड-19 नहीं होने संबंधी जांच रिपोर्ट साथ में लिए हुए थे.

श्रद्धालु 21 अक्टूबर तक मंदिर में पूजा-अर्चना कर सकेंगे: 
मंदिर को मासिक पूजा के लिए शुक्रवार शाम को खोला गया था, लेकिन श्रद्धालुओं को शनिवार को मलयाली महीने ‘तुलम’ के पहले दिन से मंदिर में दर्शन की अनुमति दी गयी है. श्रद्धालु 21 अक्टूबर तक मंदिर में पूजा-अर्चना कर सकेंगे. जिन श्रद्धालुओं के पास कोविड-19 की निगेटिव जांच रिपोर्ट नहीं है, उन्हें निलक्कल में रैपिड एंटीजन जांच करानी होगी.

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दर्शन के लिए डिजिटल प्रणाली के माध्यम से 246 लोगों ने बुकिंग कराई:
देश में 25 मार्च को लॉकडाउन लगने के बाद से पहली बार मंदिर में श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति दी गयी है. मंदिर का प्रबंधन देखने वाले त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) के सूत्रों ने बताया कि मंदिर को सुबह पांच बजे खोला गया. शनिवार को दर्शन के लिए डिजिटल प्रणाली के माध्यम से 246 लोगों ने बुकिंग कराई. हर दिन केवल 250 लोगों को मंदिर में दर्शन की अनुमति दी जाएगी.

दर्शन की अनुमति 10 से 60 वर्ष की आयु के उन लोगों को ही मिलेगी:
दर्शन की अनुमति 10 से 60 वर्ष की आयु के उन लोगों को ही मिलेगी जिनके पास इस बात के चिकित्सा प्रमाणपत्र होंगे कि वे पवित्र पहाड़ी पर स्थित मंदिर तक जाने के लिहाज से स्वस्थ हैं. महामारी के कारण श्रद्धालुओं को सन्निधानम, निलक्कल या पांबा में ठहरने की अनुमति नहीं है.

Navratri 2020: नवरात्रि के पहले दिन करें मां शैलपुत्री की पूजा, 58 साल बाद अमृत योग बनने से पूरी होगी मनोकामना

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जयपुर: आज से शारदीय नवरात्र का प्रारम्भ हो गया है. नवरात्रि के नौ दिनों तक देवी दुर्गा के ही नौ अलग अलग रूपों की पूजा अर्चना की जाती है. हर दिन एक अलग स्वरूप को समर्पित होता है. जिनमें सबसे पहले आराधना होती है शैलपुत्री माता की. देवी भगवती कई विशिष्ट योग-संयोग के साथ अश्व पर सवार होकर अपने मंडप में विराजमान होंगी. 58 साल बाद अमृत योग वर्षा हो रही है. 

बन रहे कई विशिष्ट योग:
शनि व गुरु दोनों 1962 के बाद 58 साल के अंतराल पर नवरात्रि पर अपनी राशि में विराजे हैं, जो अच्छे कार्यों के लिए दृढ़ता लाने में बलवान होगा. इस बार नवरात्रि पर राजयोग, द्विपुष्कर योग, सिद्धियोग, सर्वार्थसिद्धि योग, सिद्धियोग और अमृत योग जैसे संयोगों का निर्माण हो रहा है. इसके साथ ही इस नवरात्रि दो शनिवार भी पड़ रहे हैं. 

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विधि विधान से पूजा अर्चना कर देवी को प्रसन्न करें: 
कहते हैं कि अगर विधि विधान से पूजा अर्चना कर देवी को प्रसन्न कर दिया जाए तो मनवांछित फल की प्राप्ति होती है और जीवन से सभी कष्टों से छुटकारा मिल जाता है. चूंकि नवरात्रि के पहले दिन ही घट स्थापना होती है और इसी दिन देवी शैलपुत्री की भी पूजा की जाती है इसीलिए ये दिन और भी विशेष हो जाता है. चलिए जानते हैं शैलपुत्री माता की पूजा विधि.

घट स्थापना का मुहूर्त (शनिवार):  
शुभ समय - सुबह  6:27 से 10:13 तक ( विद्यार्थियों के लिए अतिशुभ)
अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11:44 से 12:29 तक (  सर्वजन)
स्थिर लग्न ( वृश्चिक)- प्रात: 8.45 से 11 बजे तक ( शुभ चौघड़िया, व्यापारियों के लिए श्रेष्ठ)

देवी की उपासना के लिए इस मंत्र का उच्चारण करें: 
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम।
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम॥

स्रोत पाठ करें:
प्रथम दुर्गा त्वंहि भवसागर: तारणीम्।
धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यम्॥
त्रिलोजननी त्वंहि परमानंद प्रदीयमान्।
सौभाग्यरोग्य दायनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यहम्॥
चराचरेश्वरी त्वंहि महामोह: विनाशिन।
मुक्ति भुक्ति दायनीं शैलपुत्री प्रमनाम्यहम्॥