विपणन व्यवस्था नहीं होने से घाटे का सौदा साबित हो रही जैविक खेती

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/01/03 04:00

जायल (नागौर)। जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार व कृषि विभाग की ओर से भले ही अनेक योजनाएं चलाई जा रही हो, लेकिन जैविक उत्पाद के विपणन की समस्या इसे मूर्त रूप देने में बाधा उत्पन्न कर रही है। किसान कड़ी मेहनत कर जैविक उत्पाद तो तैयार कर चुके हैं, लेकिन जब उत्पाद के खरीदार ही नहीं मिल रहे तो किसानों की आशाओं पर पानी फिरने लगा है।

क्षेत्र के कई काश्तकार जैविक खेती अपनाकर केंचुआ व जैविक खाद तक तैयार कर रहे हैं, लेकिन उत्पाद की बिक्री नहीं होने पर काश्तकारों के लिए जैविक खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है।

मांगलोद ग्राम में जैविक खेती कर रहे काश्तकार शिवराज सिंह बताते हैं कि जैविक उत्पाद अधिक दाम पर बिकते हैं, लेकिन जानकारी व विपणन व्यवस्था के अभाव में आम ग्रामीण काश्तकार के लिए जैविक उत्पाद की बिक्री मुश्किल साबित हो रही है। शिवराजसिंह के पास 10 कि्ंवटल मूंग, बड़ी तादाद में केंचुआ व जैविक खाद उपलब्ध है, लेकिन खरीदार नहीं मिल रहे हैं।

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

संबंधित ख़बरे

Most Related Stories

Stories You May be Interested in