निजी अस्पताल में मस्तिष्क के रोगी को दिया लिवर का ट्रीटमेंट

Pawan Tailor Published Date 2018/06/03 03:17

राजसमंद। धरती पर भगवान का दर्जा प्राप्त डॉक्टर भी अब पूरी तरह से व्यवसायिक होते जा रहे है। चिकित्सा क्षेत्र का व्यवसायीकरण इस कदर बढ़ गया है कि डॉक्टरों को मरीज की दयनिय हालत पर भी रहम नहीं आता और वह उसे बस अपना पेट भरने का जरिया मानकर   इलाज के नाम पर वसूली करने में लगे हुए है। ऐसा ही एक मामला राजसमंद देवगढ़ के महावीर हॉस्पिटल का सामने आया है ,जिसमें रोगी को मस्तिष्क की बीमारी थी जबकि उसका इलाज डॉक्टर लिवर का कर रहे थे।


इस दौरान मरीज हर पल जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा था। किसी परिचित ने आकर उन्हें बाहर ले जाने की सलाह दी। जयपुर ले जाने पर रोगी की जांच में सामने आया कि रोगी को जिस बीमारी से अब तक देवगढ़ के निजी चिकित्सालय में इलाज मुहैया कराया जा रहा था वह बीमारी रोगी को थी ही नहीं। बाद में लोगों के आक्रोश को देखते हुए मरीज के परिजनों से वसूली राशि वापस करन के लिए डॉक्टर तैयार हो गया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इलाज के  नाम पर केसी लूट मची हुई है ,हालांकि रोगी सुहानाथ जयपुर के निजी चिकित्‍सालय में उपचार के बाद अब स्‍वस्‍थ्‍य है। लेकिन उसका कहना है कि यदि समय रहते उसे महावीर हॉस्पिटल से नहीं ले जाया गया होता तो वो अभी जिंदा नहीं होता।
 

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