...तो राजस्थान में जीका पॉजिटिव संख्या पहुंच सकती है 800 पार

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/10/18 09:10

जयपुर (विकास शर्मा)। "जीका" को लेकर अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर जयपुर के शास्त्री नगर इलाके की एक खौफनाक पहचान बन गई है। यहां पॉजिटिव मरीजों का सरकारी आंकड़ा भले ही 100 के आसपास बताया जा रहा है, लेकिन फील्ड की सच्चाई जीका संदिग्ध का आंकड़ा 800 तक पहुंचने की ओर संकेत दे रही है। चलिए आपको बताते है पॉजिटिव मरीजों को लेकर चिकित्सा विभाग की गुमराह करने की कोशिश और इस खौफनाक सच से पर्दा उठाती फर्स्ट इंडिया की एक्सक्लुसिव पड़ताल...

देश दुनिया में पर्यटन, संस्कृति के लिए मशहूर गुलाबी नगर पिछले कुछ दिनों से "इंटरनेशनल अलर्ट" पर है। ये अलर्ट कोई गुलाबी नगर को तमगा नहीं दिला रहा है, बल्कि "जीका" की राजधानी के रूप में बदनामी दे रहा है। और ये सबकुछ हो रहा है सूबे के चिकित्सा विभाग की लापरवाहियों के चलते। दरअसल, एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्रशासन को 15 सितम्बर को ही यह पता चल गया था कि महिला पॉजिटिव है। इसके बाद कॉलेज ने रि-कंर्फम करने के लिए सैम्पल पूना भेजा, जहां से 22 सितम्बर को रिपोर्ट मिलने के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर आया। इसके बाद भी चिकित्सा विभाग ने पहले जहां जीका पॉजिटिव केस छिपाने का जतन किया और अब देश-दुनिया में बदनामी से बचने के लिए जांच का दायरा अचानक सीमित कर दिया है। फील्ड अधिकारियों के मुताबिक अब सिर्फ प्रथम तिमाही की गर्भवती महिलाओं की जांच पर ही फोकस किया जा रहा है, ताकि पॉजिटिव केस कम आए। यानी न रहे बांस और न बजे बांसुरी लेकिन राजपूत हॉस्टल के केस विभाग की कारगुजारी की पोल खोलने को काफी है। 

केन्द्रीय गाइडलाइन के हिसाब से यूं हो "जीका" की जांच

- प्रभावित इलाकों में बुखारी पीडित मरीजों में से 10 फीसदी के सैम्पल जांच किए जाए 
- प्रभावित इलाकों में प्रथम तिमाही वाली प्रत्येक गर्भवती महिला की जांच की जाए 
- शेष गर्भवती महिलाओं को भी लक्षणों के हिसाब से जांच के दायरे में रखा जाना चाहिए 
- बुखार के केस, जिनमें आंखे लाल होना, सिरदर्द, जोड़ों में दर्द की शिकायत हो तो उनके सैम्पल लिए जाने चाहिए

सरकारी जांच की सच्चाई और राजपूत हॉस्टल के केस

- 1 लाख से अधिक घरों के सर्वे में 5900 बुखार के केस मिले, जबकि 3500 के आसपास गर्भवती महिलाएं मिली 
- इस सर्वे के आधार पर 1284 लोगों के सैम्पल उठाए गए, जिसमें से 100 से अधिक केस पॉजिटिव मिले है 
- यानी प्रत्येक 12 सैम्पल में से एक मरीज मिल रहा है पॉजिटिव 
- जबकि राजपूत हॉस्टल में एकाएक मामले बढ़ने पर 100 से अधिक छात्रों के सैम्पल जांच करवाए गए 
- इस दौरान 25 केस पॉजिटिव या शतप्रतिशत सैम्पलिंग में 25 फीसदी मरीजों में जीका की पुष्टि 
- इससे साफ है कि जांच का दायरा सीमित होने से ही अब तक पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा 100 तक ही पहुंचा है। 

जांच पर अंकुश, वरना केस बढ़ना तय

- यदि गाइड लाइन के हिसाब से शास्त्री नगर इलाके के बुखार पीडित और गर्भवती महिलाओं की शतप्रतिशत जांच कराई जाए 
- और इस दौरान दस फीसदी केस भी पॉजिटिव मिले, तो यह आंकड़ा 800 पार हो सकता है 
- चिकित्सा अधिकारियों ने जांच का दायरा इसलिए कम किया है, क्योंकि यह वायरस 7 से 14 दिन में खुद ब खुद खत्म हो जाता है, सामान्य बुखार के लक्षण होते है 
- ऐसे में बदनामी से बचने के लिए सिर्फ गर्भवती महिलाओं पर ही फोकस किया जा रहा है

जीका की चपेट में अब आमजन के साथ-साथ चिकित्सा विभाग के अधिकारी भी आने लगे है। विभाग के एक संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी को जीका पॉजिटिव आया है। ये अधिकारी फील्ड में जागरूकता का जिम्मा संभाले हुए थे, जो पिछले तीन-चार दिन से बुखार से पीडित है। हालांकि, विभागीय अधिकारियों के मुताबिक उनकी तबीयत ठीक है। 

जीका की जांच को एक दायरे में सीमित करने के पीछे अधिकारियों का तर्क ये है कि एसएमएस की लैब में रोजाना सौ सैम्पल की जांच किए जा सकते है। हालांकि, अफसरों का इसके पीछे तर्क ये भी है कि जीका कोई जानलेवा बीमारी नहीं है। गर्भवती महिलाओं को खतरा है, जिसको ध्यान में रखने हुए उसी ओर फोकस किया जा रहा है। इसके साथ ही ये भी दावा किया जा रहा है कि प्रभावित इलाकों में एटी लार्वा एक्टिविटी के चलते मच्छरों का प्रकोप 75 फीसदी तक कम हुआ है। यानी अगले 15 दिनों में स्थिति नियंत्रण में है लेकिन सवाल ये है कि विभाग जब प्रभावित लोगों को जांच के दायरे में ही नहीं लेगा तो ये पता कैसे लगेगा कि राजधानी में जीका के केस आना बन्द हुए या नहीं। सिर्फ खुद की साख बचाने के लिए अधिकारी यूं जिस तरह की गली निकाल रहे है, वो आमजन के स्वास्थ्य के लिहाज से आगे ठीक नहीं होगा। 
 

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