खनन महाघूस कांड के दौरान निरस्त मंशा पत्र व पीएल की होगी समीक्षा, 3 सदस्य समिति का गठन

खनन महाघूस कांड के दौरान निरस्त मंशा पत्र व पीएल की होगी समीक्षा, 3 सदस्य समिति का गठन

खनन महाघूस कांड के दौरान निरस्त मंशा पत्र व पीएल की होगी समीक्षा, 3 सदस्य समिति का गठन

जयपुर: भाजपा शासन में हुए खनन महा घूस कांड के दौरान निरस्त किए गए 602 खनन पट्टों को लेकर राज्य की गहलोत सरकार ने अहम फैसला किया है. खनन पट्टों के निरस्तीकरण की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी और खनन पट्टा धारियों की सुनवाई भी. इसके लिए बाकायदा प्रशासनिक सुधार विभाग ने अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ सुबोध अग्रवाल की अध्यक्षता में 3 सदस्य समिति का गठन कर दिया है.

अतिरिक्त मुख्य सचिव माइन्स डॉ. सुबोध अग्रवाल की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय कमेटी खान विभाग द्वारा एक नवंबर 2014 से 12 जनवरी 2015 के दौरान खनन पट्टों हेतु जारी मंषा पत्र और पूर्वेक्षण अनुज्ञापत्रों के निरस्तीकरण पर दायर याचिकाओं पर जयपुर और जोधपुर उच्च न्यायालयों द्वारा पारित निर्णयों की पालना में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से याचियों के पक्ष की सुनवाई करेगी. सुनवाई कार्यक्रम के अनुसार कमेटी 14 सितम्बर से 25 सितम्बर तक सायं साढ़े तीन से साढ़े पांच बजे तक वृत स्तर के अधिक्षण खनि अभियंताओं के कार्यालयों से याचियों के पक्ष की सुनवाई करेगी.

गौरतलब है कि खान विभाग द्वारा एक नवंबर, 2014 से 12 जनवरी, 2015 के दौरान जारी खनन पट्टों हेतु मंषा पत्र और पूर्वेक्षण अनुज्ञापत्र के संबंध में राज्य सरकार को शिकायत प्राप्त होने पर इस दौरान जारी सभी स्वीकृतियों को निरस्त कर दिया गया था. राज्य सरकार के निरस्तीकरण के आदेष के विरुद्ध जोधपुर और जयपुर के उच्च न्यायालय में विभिन्न रिट याचिकाएं दायर की गई थी. न्यायालय द्वारा पारित निर्णय के क्रम में प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया. प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा गठित समिति एसीएस माइन्स डॉ सुबोध अग्रवाल, प्रमुख सचिव गृह विभाग अभय कुमार और आयोजना सचिव सिद्धार्थ महाजन की बैठक में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से 14 से 25 सितम्बर तक सुनवाई का निर्णय किया गया है. 

समिति की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार संबंधित याचीगण अधिक्षण खनि अभियंता जयपुर, कोटा, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, अजमेर, राजसमन्द, भरतपुर, भीलवाड़ा एवं खनि अभियंता जैसलमेर के कार्यालय से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई की जाएगी. राज्य सरकार द्वारा सभी याचियों को पत्र द्वारा सूचित किया जा रहा हैं वहीं विभागीय वेबसाइट पर विस्तृत कार्यक्रम देखा जा सकेगा. 

और पढ़ें