प्रवासी पक्षियों की मौत की वजह नहीं पता, हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कमेटी गठन का किया फैसला

प्रवासी पक्षियों की मौत की वजह नहीं पता, हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कमेटी गठन का किया फैसला

जयपुर: सांभर झील में प्रवासी पक्षियों की मौतो के मामले में राज्य सरकार अब तक मौत का कारण  पता नहीं कर पायी है. स्वप्रेणा प्रसंज्ञान से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति और जस्टिस प्रकाश गुप्ता की खण्डपीठ ने इस पर नाराजगी जतायी है. हाईकोर्ट ने पवासी पक्षियों की मौत का कारण नहीं बताने पर एक कमेटी का गठन करने का फैसला किया है. साथ ही अदालत ने सभी पक्षों से किसी चिन्हित अधिकारी या वैज्ञानिक के नाम के लिए सुझाव भी मांगे हैं. 

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मई के दूसरे सप्ताह में सांभर लेक में दर्जनों प्रवासी पक्षियों की मौत का मामला दूसरी बार सामने आया था. जिस पर न्यायामित्र विनीत जैन ने एक प्रार्थना पत्र पेश कर मामले की शीघ्र सुनवाई की गुहार लगायी थी. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि मृत पक्षियों के शाव सड़ जाने के चलते उनका पोस्टमार्टम नहीं हो पाया और उनकी मौतों कारण भी पता किया जा सकता. वहीं घायल पक्षी की मौत हो जाने पर उसका पोस्टमार्टम किया गया. सरकार ने उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट अदालत में पेश करते हुए बताया कि पक्षी की मौत वायरण की वजह से हुई लेकिन ये नहीं बताया कि कौनसे वायरस की वजह से हुई. ना ही ये बताया कि किस तरह का वायरस इंफेक्शन था और वायरस का नेचर क्या था. इस पर अदालत ने नाराजगी जाहिर की. 

न्यायमित्र ने कहा बारिश होने वाली फिर से आयेंगे प्रवासी पक्षी:
सुनवाई के दौरान न्याय मित्र नितिन जैन ने अदालत को बताया कि प्रदेश में जल्दी ही बारिश के कारण साभंर झील में पानी आएगा और मानसून समाप्त होने के कुछ दिनों के बाद से प्रवासी पक्षियों का आना भी फिर से शुरु हो जाएगा. इसलिए यह आने वाले सीजन में इन प्रवासी पक्षियों को मौत से बचाने के लिए जरुरी उपाय करना बहुत आवश्यक है. पक्षियों की मौत की वजह केमिकल झील में डालना और अवैध खनन है. 

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अदालत ने मांगे नाम:
मुख्य न्यायाधीश की खण्डपीठ ने प्रवासी पक्षियों की मौतों की जांच के लिए एएसजी, न्यायमित्र और एएजी से मामले की जांच और निरीक्षण के लिए किसी विशेष अधिकारी, वैज्ञानिक या विशेषज्ञ का नाम के सुझाव मांगे हैं. अदालत ने कहा कि अवैध रुप से नमक बनाने वालों की पहचान करने और संपूर्ण झील का निरीक्षण करवाया जाना जरूरी है जिसके लिए सभी से एक सपताह में नाम देने को कहा है. मामले पर अब सुनवाई 27 जुलाई को होगी. 

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