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मोदी सरकार ने चुनावों से पहले सरकारी कर्मचारियों को दिया बड़ा तोहफा, 3 फीसदी बढ़ा महंगाई भत्ता

मोदी सरकार ने चुनावों से पहले सरकारी कर्मचारियों को दिया बड़ा तोहफा, 3 फीसदी बढ़ा महंगाई भत्ता

नई दिल्ली। लोकसभा चुनावों से पहले मोदी सरकार ने कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने कर्मचारियों और पेंशनधारकों को मिलने वाला महंगाई भत्ता 9 से बढ़ाकर 12 प्रतिशत किया है। यह फैसला 1 जनवरी, 2019 से लागू होगा जिसका लाभ 1 करोड़ से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारकों के मिलेगा। 

इसके अलावा सरकार ने NCR में बेहतर कनेक्टिविटी के लिए दिल्ली और मेरठ के बीच में RRTS सिस्टम ( Regional Rapid Transit System) और कंपनी एक्ट में बदलाव वाले अध्यादेश को मंजूरी भी दे दी। पीएम मोदी के आवास पर हुई बैठक में अहमदाबाद मेट्रो रेल प्रोजेक्‍ट के दूसरे फेज को भी मंजूरी दी गई। इसमें दो कॉरिडोर होंगे। वहीं किसान ऊर्जा सुरक्षा व उत्‍थान महाभियान (KUSUM) को शुरू करने को भी हरी झंडी दी। इस योजना के तहत खेतों में सिंचाई के लिए सोलर पंप मुहैया कराया जाएगा। 

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि संसद का सत्र खत्म हो जाने के चलते कुछ अहम विधेयक लंबित रह गए थे, जिनमें से कुछ विधेयकों पर विपक्ष का भी समर्थन था। इनमें से तीन अध्यादेश के माध्यम से और एक बिल के माध्यम से संसद में पेश किए गए थे। जिसमें से सभी कानून लोकसभा के पारित हो गए थे। लेकिन राज्यसभा में हंगामें के चलते यह कानून लंबित रह गए। इसलिए इन चारों बिल के संबंध में कैबिनेट ने अध्यादेश जारी करते हुए राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेज दिया है। इसमें तीन तलाक बिल, मेडिकल काउंसिल बिल, कंपनी लॉ संशोधन विधेयक और अनरेगुलेटेड डिपॉजिट बिल शामिल हैं। 

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जैसलमेर: आज से भगवान भोलेनाथ की भक्ति का पर्व सावन मास आज से शुरू हो गया है, लेकिन इस वर्ष कोरोना संकट के बीच भक्त अपने भगवान के दर्शन करने में काफी परेशान हो रहे हैं. इस बार कोरोना संक्रमण की वजह से प्रमुख मंदिर बंद है. कुछ मंदिरों में पुजारी और सीमित संख्या में भक्त भगवान शिव का अभिषेक कर रहे हैं. शहर के मोहल्लों में कुछ मंदिर खुले है जिसमे थोड़ी थोड़ी मात्रा  लोग पहुंच रहे हैं. बारी-बारी से श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं.

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ऊं नम: शिवाय के मंत्रोच्चार से शिवालय गूंज रहे: 
जैसलमेर शिव मार्ग स्थित देवचंद्रेश्वर मंदिर में हर सावन भव्य मेला भरता है लेकिन मंदिर इस बार सूना दिखाई दे रहा है. आस-पास के लोग भगवान शिव के दर्शन करने पहुंच रहे हैं. बील पत्र से पूजन करने व शिवलिंग को दुग्ध से नहलाने के लिए मंदिर पहुंच रहे हैं. साथ ही बोल बम ऊं नम: शिवाय के मंत्रोच्चार से शिवालय गूंज रहे हैं. जैसलमेर सहित आसपास के सभी शिवालयों में शिव पूजन चल रहा है. लेकिन कई आमजन जागरूक होकर दर्शन कर रहे हैं. मंदिरो में थोड़ी भीड़ है वहीं कई मंदिर के बंद होने से भक्त मायूस होकर लोट रहे हैं. 

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जैसलमेर: अल्पसंख्यक मामलात, वक्फ एवं जन अभियोग निराकरण मंत्री शाले मोहम्मद ने ग्रामीणों से कहा है कि सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों का लाभ पाकर अपनी तकदीर संवारें और गांवों की तस्वीर बदलें. इसके लिए यह जरूरी है कि ग्रामीण पूरी तरह जागरुक रहकर इन योजनाओं की जानकारी पाएं और अपने काम की गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भरता पाते हुए खुशहाली लाएं.

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ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों का अवलोकन किया:  
अल्पसंख्यक मामलात मंत्री ने जैसलमेर जिले के विभिन्न सीमावर्ती और नहरी क्षेत्रों का दौरे में ग्रामीणों को यह बात कही.कैबिनेट मंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों का अवलोकन किया और जन सुनवाई करते हुए ग्रामीणों की समस्याओं को सुना तथा इनके समाधान के लिए आश्वासन दिया. उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में महात्मा गांधी नरेगा योजना में समय पर भुगतान के साथ ही जरूरतमन्दों के लिए पर्याप्त काम खोलकर ग्रामीणों को रोजगार मुहैया कराने के निर्देश दिए.

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राज्य सरकार लगातार किसानों से साथ खड़ी:
वहीं मंत्री शाले मोहम्मद ने कहा की कोरोना की तरह टिड्डी भी बहुत बढ़ी आफ़ात है इसको लेकर राज्य सरकार लगातार किसानों से साथ खड़ी है.  किसानों की आवाज केंद्र की तरफ पंहुचा रही है लेकिन केंद्र सरकार को राजस्थान में और संसाधन जुटाने की आवश्यकता है ताकि यह टिड्डी कंट्रोल यही किया जाए ताकि भारत वर्ष में यह टिड्डी न फैले. वहीं उन्होंने कहा की केंद्र के मंत्री केवल आरोप लगाते है करते कुछ नहीं, इसलिए कुछ काम करे. 

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नई दिल्ली: दुनियाभर के साथ देश में भी कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है. स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा अपडेट के मुताबिक, पिछले 24 घंटे के अंदर देश में 24 हजार 248 नए केस सामने आए हैं और 425 लोगों की मौत हो गई है. ऐसे में अब देश में कुल मरीजों का आंकड़ा 6 लाख 97 हजार 413 है, जिसमें 19 हजार 693 लोगों की मौत हो चुकी है. राहत की बात ये है कि इस महामारी से अब तक 4,24,433 लोग रिकवर हो चुके हैं.

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रविवार को 1,80,596 टेस्ट किए गए: 
आईसीएमआर के मुताबिक देश में पांच जुलाई तक 99 लाख 69 हजार 662 सैंपल की जांच की जा चुकी है. इनमें से रविवार को 1,80,596 टेस्ट किए गए. 

महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा एक्टिव केस: 
सबसे ज्यादा एक्टिव केस महाराष्ट्र में हैं. महाराष्ट्र में 86 हजार से ज्यादा संक्रमितों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है. इसके बाद दूसरे नंबर पर तमिलनाडु, तीसरे नंबर पर दिल्ली, चौथे नंबर पर गुजरात और पांचवे नंबर पर उत्तर प्रदेश है. इन पांच राज्यों में सबसे ज्यादा एक्टिव केस हैं.

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भारत दुनिया का तीसरा सबसे प्रभावित देश: 
भारत कोरोना संक्रमितों की संख्या के हिसाब से दुनिया का तीसरा सबसे प्रभावित देश है. अमेरिका और ब्राजील के बाद एक दिन में सबसे ज्यादा मामले भी भारत में ही दर्ज किए जा रहे हैं. 

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जयपुर: कोरोना के हमले ने देश और प्रदेश में पर्यटन ढांचे को झकझोर कर रख दिया है. जितने पर्यटक राजधानी जयपुर में सामान्य दिनों में 1 दिन में आया करते थे उतने पर्यटक पूरे प्रदेश में 1 महीने में दिखाई दिए हैं. राज्य सरकार ने रिवाइवल प्लान भी बनाया है और कोविड-19 रिलीफ पैकेज भी जारी करने की तैयारी कर ली है लेकिन सैलानियों में आज भी कोरोना कब है कम नहीं हुआ है. 

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जयपुर के स्मारक देश और दुनिया में प्रसिद्धि हासिल कर चुके:  
राजस्थान को पर्यटन का प्रदेश माना जाता है राजधानी जयपुर के स्मारक देश और दुनिया में इतनी प्रसिद्धि हासिल कर चुके है की गूगल पर भी एक क्लिक करो तो एक-एक स्मारक के लाखों पेज खुल जाते हैं. प्रदेश में पर्यटन ढांचा इतना मजबूत हुआ करता था जिस पर स्वाइन फ्लू, जीका, एंथ्रेक्स, सार्स और न जाने कितने वायरस आक्रमण कर चुके हैं लेकिन राजस्थान के पर्यटन ढांचे को टस से मस भी नहीं कर पाए. लेकिन इस बार देश और प्रदेश के पर्यटन पर जिस कोरोना नाम के वायरस ने हमला किया है उसके आगे  प्रदेश का पर्यटन ढांचा दरकता दिखाई दे रहा है.

अनलॉक वन में 1 जून को प्रदेश के पर्यटन स्थलों को शुरू:
कोरोना संकट के चलते प्रदेश में 18 मार्च को सभी पर्यटन स्थल जिनमें मॉन्यूमेंट, म्यूजियम, नेशनल पार्क, बायोलॉजिकल पार्क, सफारी सभी को बंद कर दिया गया था. यही नहीं टूरिज्म इंडस्ट्री से जुड़े तमाम स्टेक होल्डर जिनमें होटल, रिसॉर्ट, रेस्टोरेंट्स, हाथी गांव जैसे तमाम पर्यटन से जुड़े स्थलों को भी बंद कर दिया गया था. इससे पर्यटन उद्योग को अरबों रुपए का नुकसान उठाना पड़ा. आखिर अनलॉक वन में 1 जून को प्रदेश के पर्यटन स्थलों को शुरू कर दिया गया. इसके बाद 8 जून से तमाम होटल, रेस्टोरेंट और पर्यटन से जुड़े अन्य स्थल भी सैलानियों के लिए खोल दिए गए. लेकिन 1 जून से 30 जून तक के पहले 1 महीने में पर्यटन स्थलों पर माहौल निराशाजनक ही रहा. राजधानी में के कुल 8 स्मारक और संग्रहालयों पर 1 महीने में महज 5269 पर्यटक पहुंचे. जबकि राजधानी के बाहर के प्रदेश के मॉन्यूमेंट और म्यूजियम जिनकी संख्या 24 है उन पर महज 3537 पर्यटक ही 1 महीने में पहुंचे. इसका सीधा मतलब है प्रदेश में जून के महीने में पर्यटकों की संख्या महज 8806 रही जो राजस्थान जैसे पर्यटन के प्रदेश के लिए कतई उत्साहजनक नहीं है. एक महीने में 8806 पर्यटकों का आंकड़ा इसलिए भी निराशाजनक है क्योंकि आमतौर पर ऑफ सीजन में इतने पर्यटक महज एक दिन में राजधानी में दिखाई देते रहे हैं. लेकिन कोरोना के हमले के आगे पर्यटन पूरी तरह पस्त हो गया है. 

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सर्वाधिक पर्यटक विश्व विरासत में शुमार आमेर में पहुंचे:
राजधानी में 1 महीने में सर्वाधिक पर्यटक विश्व विरासत में शुमार आमेर में पहुंचे. आमेर में पर्यटकों की संख्या 1 महीने में 1585 रहीं जबकि नाहरगढ़ यह आंकड़ा 1326 के स्तर पर रहा. राजधानी के बाहर सर्वाधिक पर्यटक 901 अलवर में पहुंचे जबकि चित्तौड़ 500 और अजमेर में पर्यटकों की संख्या 369 रही. प्रदेश में पर्यटन उद्योग से प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से 10 लाख से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं जिनमें छोटे-छोटे वेंडर, हॉकर से लेकर गाइड, महावत, लोक कलाकार और बड़े स्तर पर होटल, रिसोर्ट संचालक तक शामिल हैं. कोरोना संक्रमण का इन सभी पर बुरा असर हुआ है अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देश के बाद प्रदेश के पर्यटन और देवस्थान मंत्री विश्वेंद्र सिंह और विभाग के प्रमुख सचिव आलोक गुप्ता सहित तमाम अधिकारी इस प्रयास में जुटे हुए हैं कि प्रदेश में सुरक्षित और स्वास्थ्य पर माहौल तैयार कर पर्यटन को वापस मुख्यधारा में लाया जाए. सभी का प्रयास है कि सितंबर में शुरू होने वाले पर्यटन सत्र से पहले प्रदेश में इस तरह का माहौल तैयार किया जाए जिससे घरेलू पर्यटक ज्यादा से ज्यादा संख्या में राजस्थान आएं. 
 

Sawan Somvar 2020: सावन का पहला सोमवार आज, जानें घर पर रहकर कैसे करें भगवान शिव की पूजा

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जयपुर: आज से भगवान शिव का प्रिय सावन मास शुरू हो गया है. हिंदू धर्म में सावन के महीने का खास महत्व माना जाता है. इस पूरे महीने में भगवान शिव की पूजा होती है. इस दौरान भगवान शिव की पूजा करके मनचाहा फल प्राप्त किया जा सकता है. इस मास भगवान शिव और पार्वती जी का मांगलिक मिलन हुआ. भोले नाथ का विवाह भी लोकमंगलकारी है. इसलिये सामाजिक सरोकार से भी विवाह को यही दर्ज़ा मिला है. परिवार चलता रहे. वंश परंपरा आगे बढ़ती रहे. भगवान का विवाह भी संकटकाल में हुआ. 

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सावन माह के पहले और आखिरी दिन सोमवार: 
इस बार सावन माह के पहले और आखिरी दिन सोमवार है. इसके साथ ही पांच सोमवार के साथ जबरदस्त संयोग भी बना है. लेकिन कोरोना काल के चलते इस बार शिवभक्त मंदिरों में जाकर भोले बाबा की पूजा नहीं कर पाएंगे. ऐसे में हम आपको घर पर रहकर ही शिव आराधना करने के बारे में बता रहे हैं....

- इस महीने सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहने. 

- पूजा स्थल पर अच्छी तरह से साफ-सफाई करके गंगाजल का छिड़काव करें.

- शिव पुराण पढ़े. संधिकाल अवश्य पढ़ें.

- शिव गायत्री की एक माला करें अन्यथा 3, 5, 7, 11, 13, 21 या 33 बार पढ़ें.

- संभव हो तो तीन बार रुद्राष्टक पढ़ ले. अथवा ॐ नमः शिवाय के मन्त्र से अंगन्यास करें. 

- भगवान शिव को 11 लोटे जल अर्पण करें. प्रयास करें कि यह पूरे सावन मास हो जाये. काले तिल,और दूध के साथ.

- यदि विल्व पत्र नहीं मिले तो एक जनेऊ अथवा तीन या पांच कमलगट्टे अर्पित कर दें.

- आसपास के शिवमंदिर में जल व दूध का अभिषेक कर चंदन का तिलक करें.

- शिव कथा व शिव चालीसा का पाठ कर, महादेव की आरती करें. 

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जयपुर: राज्य सरकार ने आखिरकार 3 दिन के सस्पेंस के बाद डीबी गुप्ता को मुख्यमंत्री का सलाहकार बना दिया. डीओपी ने रविवार रात आदेश जारी करके उनके बारे में 3 दिन से जारी सस्पेंस को खत्म कर दिया है. 2 जुलाई को मध्यरात्रि बाद राजीव स्वरूप को नया सीएस बनाने और 3 जुलाई को डीबी गुप्ता के उन्हें चार्ज देने के साथ ही यह सस्पेंस बना हुआ था. डीओपी की ओर से जारी आदेश में हालांकि डीबी गुप्ता के कार्यकाल और काम के बारे में नहीं बताया गया है. लेकिन वे अब अग्रिम आदेशों तक इस पद पर बने रहेंगे. इसके तहत वे सितंबर तक भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के रूप में और सितंबर में आईएएस से रिटायरमेंट होने पर रिटायर्ड IAS के रूप में अपनी सेवाएं देंगे. 

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सरकार की नाराजगी सहित तमाम अटकलें खारिज: 
इसके साथ ही उनसे सरकार की नाराजगी सहित तमाम अटकलें खारिज हो गईं हैं और वे गहलोत सरकार में अग्रिम आदेशों तक अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे. वे सोमवार सुबह ही पदभार ग्रहण करेंगे हालांकि उनका ऑफिस और कामकाज के स्वरूप को लेकर बाद में ही स्थिति साफ हो पाएगी. सीएम गहलोत के जनवादी या गुड गवर्नेंस वाली सरकार के विजन को धरातल पर उतारने को लेकर भूमिका निभाने की बात उन्होंने कही है. साथ ही फ्लैगशिप योजनाओं, बजट घोषणाओं से लेकर सीएम की घोषणा के क्रियान्वयन की मॉनिटरिंग के साथ कोरोना से सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को गति देने के मकसद से वे काम करेंगे. उनका ऑफिस सीएमओ में या सचिवालय के किसी भवन में हो सकता है. अभी सरकार में डॉक्टर गोविंद शर्मा सीएम के सलाहकार की भूमिका निभा रहे हैं. वहीं अरविंद मायाराम सीएम के अभी आर्थिक सलाहकार हैं और उनकी नियुक्ति भी डॉक्टर शर्मा के साथ ही 21 दिसंबर 2018 को ही हुई थी.जबकि गुप्ता को भी डॉक्टर शर्मा जैसे सीएम सलाहकार का ही पद दिया है...ऐसे में तीनों सलाहकारों के बीच कार्य विभाजन को लेकर स्थिति जल्द साफ होगी. 

1983 बैच के आईएएस डीबी गुप्ता प्रदेश में प्रशासन तंत्र से जुड़े कई अहम पदों पर रहे.... 

- उन्होंने 30 अप्रैल 2018 से लेकर 2 जुलाई 2020 तक दो विपरीत विचारधारा वाली सरकारों में सीएस रहे.

- जहां उन्होंने भाजपा की सरकार में पारदर्शी ब्यूरोक्रेट की छाप छोड़ी तो वहीं गहलोत सरकार में उन्होंने सीएम गहलोत की जनवादी सोच को नीतियों में ढाला और जमीनी धरातल पर उतारा. 

- इनमें जवाबदेही बिल का पूरा ड्राफ्ट तैयार करवाना प्रमुख है. 

- वहीं गांधीवादी दर्शन को लागू करवाना हो या कोरोना नियंत्रण के उपायों को लागू करवाना..डीबी ने सीएस के रूप में हर मोर्चे पर अग्रणी होकर कार्य किया. 

- इससे पूर्व उन्होंने एसीएस वित्त, एसीएस पीडब्ल्यूडी, इंफ्रास्ट्रक्चर, यूडीएच प्रमुख सचिव, प्रमुख सचिव कृषि,प्लानिंग व देवस्थान की अलग अलग जिम्मेदारी अलग-अलग समय संभाली.

- वे अर्बन गवर्नेंस के प्रमुख सचिव रहे तो उससे पहले जेडीसी जयपुर के रूप में उनका कार्यकाल काफी सफल रहा. 

- वित्त सचिव के रूप में भी पहले उन्होंने काम किया. 

- उससे पहले उन्होंने दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी में प्रिंसिपल कमिश्नर की भूमिका निभाई. 

- वे वित्त विभाग में विशिष्ट सचिव की भूमिका निभा चुके हैं जबकि सिरोही और अजमेर के कलेक्टर के रूप में उन्होंने अपनी प्रशासकीय दक्षता की छाप छोड़ी थी.

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प्रतापगढ़: राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले की जेल में कोरोना का कहर बढ़ता ही जा रहा है. रविवार को भी जिला जेल में 16 कैदियों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद संक्रमितों की संख्या बढ़ कर 124 हो चुकी है. इनमें 3 जेल सुरक्षाकर्मी भी शामिल है. इसके अतिरिक्त एक न्यायिक अधिकारी भी कोरोना की चपेट में है. जेल प्रशासन और स्वास्थ्य महकमा कैदियों के उपचार की तैयारी में जुट गया है. 

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कोरोना के मामले से स्वास्थ्य महकमा चिंतित:
प्रतापगढ़ की जिला जेल में रविवार को एक बार फिर से कोरोना का धमाका हुआ और 16 कैदियों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई. एक जुलाई को जिला जेल में 26, 3 जुलाई को 32, 4 जुलाई को 48 और रविवार को 16 कैदी कोरोना संक्रमित पाए गए. जिला जेल में लगातार बढ़ते कोरोना के मामले से स्वास्थ्य महकमा भी चिंतित है.

आइसोलेशन वार्ड में कैदियों का उपचार जारी:
जिला जेल में स्थापित किए गए आइसोलेशन वार्ड में कैदियों का उपचार जारी है. विभाग की ओर से यहां 4 चिकित्सकों और 6 मेल नर्स की तैनाती की गई है, साथ ही कैदियों को आयुर्वेदिक काढ़े का भी वितरण किया गया है. जेल अधीक्षक शिवेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि 3 जेल कर्मियों और 9 कैदियों को जिला चिकित्सालय के कॉविड केयर सेंटर में भर्ती कराया गया है. जेल में संक्रमित कैदियों को अन्य कैदियों से अलग रखा गया है.

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बौंली(सवाईमाधोपुर): सवाईमाधोपुर के बौंली में नाबालिग यौन शोषण के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. 11 वर्षीय नाबालिग दलित छात्रा से दुष्कर्म का आरोपी 14 माह बाद भी पुलिस गिरफ्त से दूर है. वहीं ताजा मामला रविवार का है, जहां पर 6 वर्षीय नाबालिग बच्ची से हैवानियत की गई है. 

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हैवानियत ने रिश्तों को किया तार-तार: 
आपको बता दें कि बौंली थाना पर दर्ज रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता के चाचा ने ही अपनी भतीजी को चाॅकलेट खिलाने के बहाने सुनसान जगह ले जाकर घटना को अंजाम दिया. पीड़िता को लहुलुहान हालत में जिला अस्पताल रैफर किया गया. 

पिता ने लगाई न्याय की गुहार:
जहां 3 दिन तक उपचार किए जाने के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ. पीड़िता के पिता ने चाइल्ड लाइन और  जिला पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार की है.बहरहाल बौंली एसएचओ बृजेश मीना आरोपी चाचा को ढूंढने का प्रयास कर रहे हैं,वहीं चाइल्ड लाइन द्वारा भी आवश्यक कार्रवाई की जा रही है.

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