VIDEO: गहलोत मंत्रिमंडल फेरबदल-विस्तार जल्द, पूरी कांग्रेस पार्टी की नजरें गहलोत के अगले STEP पर ! पढ़िए पूरी रिपोर्ट

VIDEO: गहलोत मंत्रिमंडल फेरबदल-विस्तार जल्द, पूरी कांग्रेस पार्टी की नजरें गहलोत के अगले STEP पर ! पढ़िए पूरी रिपोर्ट

जयपुर: प्रदेश में जल्द ही गहलोत मंत्रिमंडल फेरबदल-विस्तार (Gehlot cabinet reshuffle-expansion) के संकेत मिल रहे हैं. इसे लेकर अब पूरी कांग्रेस (Congress) पार्टी की नजरें गहलोत के अगले STEP पर है. सोनिया गांधी, अजय माकन और सचिन पायलट को भी आलाकमान द्वारा प्रस्तावित फॉर्मूले पर गहलोत की 'सहमति' का इंतजार है. 

सूत्रों के अनुसार इस फॉर्मूले पर गहलोत के कुछ RESERVATIONS है. मुख्यमंत्री चाहते हैं कि पार्टी में गहलोत या पायलट का कोई गुट नहीं रहे. इसके लिए पायलट कैंप के 19 विधायकों में से 6 या 7 मंत्री चुनने का अधिकार गहलोत खुद चाहते हैं. दूसरी ओर पायलट कैंप खुद अपने मंत्रियों के नाम सुझाना चाहता है और इसके साथ ही उनको दिए जाने वाले विभागों पर भी उनकी चले. 

गहलोत कैंप राजस्थान में पायलट का कोई ACTIVE POLITICAL ROLE नहीं चाहता: 
इसी प्रकार गहलोत कैंप राजस्थान में पायलट का कोई ACTIVE POLITICAL ROLE नहीं चाहता और पायलट एक AICC GENERAL SECRETARY की संभावित भूमिका की सीमा में रहे. लेकिन सूत्रों के अनुसार इस बारे में पायलट की अपनी दो टूक राय है. जब तक पायलट कैंप के लोगों का मंत्रिमंडल और राजनीतिक नियुक्तियों में एक PROPER POWER SHARING नहीं होगा तब तक संभवतः खुद पायलट दिल्ली में AICC की कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं लेंगे. वस्तुतः पायलट एक वर्ष पुराने प्रियंका गांधी-स्व.अहमद पटेल समझौता फॉर्मूले को तत्काल लागू करने की मांग कर रहे हैं. लेकिन गहलोत की सहमति के अभाव में मामला आगे नहीं बढ़ रहा.   

अब खुद आलाकमान इस सारे मामले को लेकर दुविधा में:
अब खुद आलाकमान इस सारे मामले को लेकर दुविधा में है. एक ओर आलाकमान गहलोत का फ्री हैंड बनाए रखना चाहता है. लेकिन इसके साथ ही वह पायलट कैंप का सम्मानजनक ADJUSTMENT भी चाहता है. अब प्रियंका-अजय माकन-अशोक गहलोत इस उलझी गुत्थी को सुलझाने में लगे हैं और पायलट को इन सबके फैसले का इंतजार  है. क्योंकि इस फैसले के बाद ही पायलट कैंप आगे की रणनीति बना सकता है. इस STALEMATE के चलते फिलहाल 17-18 जुलाई तक कैबिनेट विस्तार नहीं होगा और 17 या 18 जुलाई को एक बार फिर माकन जयपुर आकर सीएम गहलोत से मुलाकात कर सकते हैं. 

इस प्रकरण में आलाकमान के बढ़ते दबाव से खुद मुख्यमंत्री थोड़े बहुत परेशान:
दूसरी ओर इस प्रकरण में आलाकमान के बढ़ते दबाव से खुद मुख्यमंत्री थोड़े बहुत परेशान है. क्योंकि पायलट कैंप के 6-7 लोगों के अलावा उनके सामने 102 वफादार विधायकों को भी संतुष्ट रखने की चुनौती है. अब संभवतः पंजाब शांति फॉर्मूले की घोषणा के तत्काल बाद राजस्थान का मामला भी FINALLY TAKE UP हो सकता है. अलबत्ता अभी भी प्रायः हर रोज आलाकमान और गहलोत के बीच कुछ न कुछ बातचीत हो रही है. 

इसी बीच कांग्रेसी क्षेत्रों में एक अहम सवाल पूछा जा रहा है? 
इसी बीच कांग्रेसी क्षेत्रों में एक अहम सवाल पूछा जा रहा है? क्या ये प्रस्तावित फेरबदल सीमित रहेगा केवल 'विस्तार' अर्थात नए मंत्रियों को जोड़ने तक? अथवा मौजूदा मंत्रिमंडल में से लगभग आधा दर्जन मंत्री भी होंगे ड्रॉप? अब इन सारे सवालों के जवाब केवल सोनिया गांधी और अशोक गहलोत के पास है. इसी बीच हरीश चौधरी के संगठन में अपनी सेवाएं देने का प्रस्ताव राहुल को दिए जाने की चर्चा है. 

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