कर्ज माफी के नाम पर कांग्रेस सरकार ने किसानों से किया छलावा : राठौड़

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/01/08 07:54

जयपुर (ऐश्वर्य प्रधान)। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की कल जयपुर में होने वाली रैली को लेकर अब प्रदेश भाजपा ने कहा है कि कांग्रेस की सरकार ने किसान को ठगा है, वहीं दूसरी ओर सवर्ण आरक्षण पर सूबे के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से सवाल भी किये हैं। भाजपा ने किसानों की कर्ज माफी को लेकर भी कांग्रेस की सरकार को निशाने पर लिया है।

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने प्रदेश के किसानों को ठगा है और उन्हें छला है। उन्होंने कहा है कि पूरी सरकार राहुल गांधी के स्वागत में लगी हुई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कहते हैं कि राहुल गांधी के नेतृत्व में केंद्र सरकार पर किसानों की ऋण माफी के लिए दबाव बनाएंगे। अपने घोषणा पत्र को शासन का आधार मानने वाली कांग्रेस के घोषणा पत्र के पृष्ठ तीन, पैरा एक में दस दिन में कर्ज माफी की बात कही गई है, किन्तु सरकार ने अभी तक 7 मंत्रियों की एक विशाल कमेटी बनाई है तथा विभिन्न अधिकारियों के अध्ययन दल 9 राज्यों में गए हैं।

राठौड़ ने यूडीएच मिनिस्टर शांति धारीवाल पर हमला बोलते हुए कहा कि उस समिति के संयोजक का कहना है कि आर्थिक विपन्नता के चलते प्रदेश में 150 किसानों ने आत्महत्या की है, जिसमें केवल हाड़ौती में 70 किसानों ने आत्महत्या की है, सरकार उनका कर्जा माफ करेगी। समिति के संयोजक कहते हैं कि वे प्रदेश के किसानों का 18 हजार करोड़ रुपए का कर्जा माफ करेंगे, जबकि राज्य में किसानों पर कुल 99,995 करोड़ रुपए का कर्जा है।

राठौड़ ने कहा कि राज्य सरकार अभी तक रोडमैप भी नहीं दे पाई कि किसानों का कर्जा किस प्रकार माफ किया जाएगा। सरकार कहती है कि डिफाल्टर का कर्जा माफ करेंगे, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि लिए गए ऋण की मूल राशि माफ करेंगे या ब्याज माफ करेंगे या पैनल्टी माफ करेंगे। मुख्यमंत्री का कहना है कि राज्य सरकार पर तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक का कर्जा है। इस प्रकार की बातें करके राज्य सरकार किसानों से किए गए वादे से मुकर रही है, यह किसान के साथ छलावा है। राठौड़ ने कहा कि 19 दिसंबर को मुख्य सचिव के आदेश से किसानों के कर्ज माफी का आदेश तो जारी किया गया, लेकिन बिना वित्त विभाग की सहमति के उसकी रिलेवेंसी क्या है।

इसके साथ ही राठौड़ ने केंद्र सरकार द्वारा गरीब सवर्णों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण वाले फैसले को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक तरफ इसे राजनीतिक जुमला बता रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर कह रहे हैं कि वर्ष 2003 में गरीब सवर्णों के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण के लिए उन्होंने पत्र लिखा था। मुख्यमंत्री से भी इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है और कहा कि है कि 2008 में भाजपा सरकार ने गरीब सवर्णों के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण का विधेयक पारित करके राह खोली थी, जिसका आधार शशिमोहन कमीशन था। 2015 में भी भाजपा इस विषय में विधेयक लाई थी, जो सर्वसम्मति से पारित हुआ था।

बहरहाल, अब देखना है कि तीन राज्यों में हार चुकी भाजपा को सवर्ण आरक्षण अब कितना फायदा देगा। साथ ही राहुल गांधी का किसान सम्मेलन के बाद भाजपा का अगला कदम क्या होगा? ऐसे में बात साफ है कि भाजपा फिलहाल बयान ही जारी कर रही है, जबकि कॉमरेड तो आंदोलन की घोषणा कर चुके हैं।

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