राजस्थान का रण : कांग्रेस मिलाएगी हाथी से हाथ, बीजेपी का कमल होगा तीर संग सवार

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/05/29 03:27

जयपुर (योगेश शर्मा)। राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीति की बिसात बिछने लग गई है और सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्षी पार्टी में हलचल है। सूबे में सत्ता हासिल करने के लिए विपक्ष की ओर से नित—नये सियासी समीकरण ईजाद किए जा रहे हैं। इन्हीं में से एक समीकरण इन दिनों कांग्रेसी वायुमंडल में शुमार होने वाली चर्चाओं में सबसे प्रमुख बना हुआ है। चर्चा है कि राजस्थान में कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी के बीच गठजोड़ हो सकता है। हाथ और हाथी देशव्यापी गठबंधन की ओर आगे बढ़ रहे हैं। 

सूत्रों के मुताबिक, राजस्थान में बीएसपी चाहती है कि कांग्रेस उन्हें कम से कम 50 सीटें दें। बीएसपी सुप्रीमो मायावती इसी शर्त पर समझौता चाहती हैं, लेकिन राज्य की कांग्रेस अभी बीएसपी से राजस्थान में किसी तरह के गठबंधन के पक्ष में नहीं है। वहीं दूसरी ओर, वागड़ में भी बीजेपी के साथ जनता दल यू के गठजोड़ को लेकर सियासी अटकलों का दौर तेज है। कल यानि बुधवार को जेडीयू नेता और बिहार के सीएम नीतीश कुमार वागड़ में जनसभा करने आ रहे हैं।

गौरतलब है कि कर्नाटक में सेकुलर सरकार के निर्माण में कांग्रेस-जेड़ीएस और बीएसपी एक साथ खड़े नजर आए थे। अब यूपी में भी सपा-बसपा और कांग्रेस एक साथ आगे बढ़ने की तैयारी में है। बीजेपी के विरोध में सेकुलर फ्रंट बनाने की चर्चा केवल कुछ राज्यों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देशव्यापी भी है। राजस्थान भी इससे अछूता न रहे, इसे लेकर यहां गठबंधन की संभावनाएं तलाशी जा रही है। इसके पीछे बड़ा कारण एक ही है कि सत्ता विरोधी वोटों का बिखराव न हो।

सियासी विश्लेषक मानते हैं कि कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस एक साथ लड़ते तो सबसे बड़े दल के तौर पर उभरते। यही कारण है दिल्ली में बैठे कांग्रेस और बीएसपी के दिग्गज राजस्थान में गठबंधन की संभावनाएं तलाश रहे हैं। करीब 34 ऐसी सीटें भी तलाशी गई है, जहां बीएसपी का दावा या यूं कहें कि कांग्रेस के समर्थन से बीएसपी का उम्मीदवार चुनावी समर में उतरे।

बता दें कि पिछली बार गहलोत सरकार के निर्माण में बीएसपी का अहम योगदान रहा था। बीएसपी के ही छह विधायक टूटकर कांग्रेस में मिल गए थे और गहलोत सरकार को बहुमत प्राप्त हुआ था। उस समय बीएसपी के टिकट पर मुरारीलाल मीणा, राजकुमार शर्मा, रमेश मीणा, रामकेश मीणा, राजेन्द्र सिंह गुढा, गिर्राज सिंह मलिंगा ने चुनावी जीता था और ये सभी गहलोत सरकार में भागीदार बने थे। आज मुरारीलाल मीणा, रमेश मीणा, रामकेश मीणा और गिर्राज सिंह मलिंगा कांग्रेस में है। मलिंगा तो कांग्रेस पार्टी के विधायक है, वहीं नवलगढ़ से निर्दलीय विधायक राजकुमार शर्मा का झुकाव भी कांग्रेस की ओर है।

कई सीटें ऐसी भी है, जहां बीएसपी के उम्मीदवार ने कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया और इस कारण से कांग्रेस ने सीट गंवा दी। कांग्रेस के राष्ट्रीय पदाधिकारियों का कहना है कि पूरा मामला केन्द्रीय नेतृत्व के पास विचाराधीन है। वहीं गठबंधन की बातें केवल कांग्रेस में ही नहीं चल रही है, बल्कि एनडीए में भी चल रही है। दिल्ली और बिहार की दोस्ती का असर राजस्थान में भी दिख सकता है।

दरअसल, हम बात कर रहे हैं नरेन्द्र मोदी और नीतीश कुमार के बारे में। सालों बाद वागढ़ के इलाके में मामा बालेश्वर दयाल के आदर्शों और सिद्धांतों को मानने का दावा करने वाली जनता दल यू खुद को स्थापित करने में जुट गई है। 30 मई को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का वागड़ दौरा इसी परिपेक्ष्य में है। बांसवाड़ और डूंगरपुर का इलाका एक जमाने में जनता दल यू का प्रभावी क्षेत्र रहा है। सामाजिक पुरोधा मामा बालेश्वर दयाल का ही प्रभाव था कि राजस्थान में केवल वागड़ से ही जनता दल यू को सीटें मिलती थी।

कांग्रेस के हाथ को यहां जेड़ी यू के तीर से ही टक्कर मिली। बीजेपी ने यहां जड़ें जमाने के लिये जेडी यू से गठबंधन किया। इस गठबंधन ने बीते कुछ सालों में तीर के सिम्बल पर विधायक विधानसभा में भेजे। फतेह सिंह, जीतमल खांट जैसे नेता जेडी यू से चुनाव जीतकर सक्रिय राजनीति का हिस्सा बने। आज जीतमल खांट बीजेपी से विधायक हैं। आगे चलकर यहां जेडी यू कमजोर हो गई और फिर कई नेता बीजेपी में चले गये। राष्ट्रीय स्तर पर भी जेडीयू के दो फाड़ हो गये। अब इस इलाके में जेडी यू फिर से प्रभाव जमाने की कोशिश में है।

राजस्थान में कांग्रेसी मान रहे हैं कि उनकी पूर्ण बहुमत से सरकार बनेगी। ऐसे में शायद ही स्थानीय कांग्रेस नेतृत्व बीएसपी से गठबंधन चाहे। वहीं अगर गठबंधन होता भी है तो कांग्रेस शायद ही अधिक सीटें देने पर राजी हो। वहीं बीते कुछ सालों में वागड़ में बीजेपी ने जड़़े मजबूत की है। लिहाजा, कमल भी तीर का साथ कितना चाहेगा, इस पर संशय बना हुआ है। लेकिन यह जरुर है कि दोनों ही दलों के अंदर शीर्षस्तर पर चर्चा छिड़ चुकी है और अब जल्द ही इस बारे में कुद और संकेत दिखाई दे सकते हैं।

इन सीटों पर हाथी से हाथ मिला सकती है कांग्रेस :
- बीएसपी का राजस्थान में पूर्वी राजस्थान, नहरी क्षेत्र और शेखावाटी में प्रभाव।
- सामान्य वर्ग की सीटों पर बीएसपी की निगाह।
- अभी राज्य विधानसभा में बीएसपी के दो विधायक खेतड़़ी से पूरण सैनी और राजगढ़ से मनोज न्यांगली।
- कांग्रेस-बसपा गठजोड़ के पीछे तर्क एससी, एसटी, मुस्लिम, ओबीसी वोटों का ध्रुवीकरण।

इन सीटों पर है बसपा का दावा :
सूरतगढ़, भादरा, तारानगर, राजगढ़, रतनगढ़, हनुमानगढ़, लूणकरणसर, नवलगढ़, मंडावा, सूरजगढ़, खेतड़ी, खींवसर, डीडवाना, बांदीकुई, दौसा, महुवा, करौली, हिंडौन, गंगापुर सिटी, सपोटरा, धौलपुर, बाड़ी, नदबई, भरतपुर, वैर, नगर, मालपुरा, देवली-उनियारा, तिजारा, रामगढ़, किशनगढ़बास, लूणी, लोहावट, झुंझुनूं।

वागड़ में फिर बन सकता है एनडीए गठबंधन :
- नीतीश कुमार इस बारे में कर सकते हैं नरेन्द्र मोदी और अमित शाह से चर्चा।
- सरकार विरोधी वोटों को एक जाजम पर होने से रोकने के प्रयास।
- जेडी यू यहां मांग सकता है बीजेपी से कुछ सीटें।
- बांसवाड़ा—डूंगरपुर लोकसभा सीट भी मांग सकता है।
- कुशलगढ़, गढ़ी जैसी सीटों पर जेडी यू का व्यापक प्रभाव रहा है।
- बागीदौरा में बीजेपी-जद यू मिलकर दे सकते हैं मालवीय को टक्कर।
- नीतीश कुमार की निगाहें वागड़ पर जम चुकी है।
- हालांकि बीजेपी का स्थानीय नेतृत्व फिलहाल गठबंधन के पक्ष में नहीं।
- जद यू की कोशिश आदिवासी, पिछड़े वर्ग वोटों को एकजुट करने की।
- बीजेपी साथ आती है तो जनरल, जैन वोट भी साथ आ सकते हैं। 

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