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VIDEO: जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण की करीब 40 फीसदी तक घटेगी लागत

VIDEO: जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण की करीब 40 फीसदी तक घटेगी लागत

जयपुर: पिछली भाजपा सरकार ने जहां जयपुर मेट्रो परियोजना के दूसरे चरण की डीपीआर फाइनल करने में ही पांच साल पूरे कर दिए थे, वहीं मौजूदा सरकार ने मामले में दृढ़ इच्छा शक्ति दिखाई, तो दूसरे चरण में मेट्रो ट्रेन चलाने की जो लागत पहले करीब साढ़े दस हजार करोड़ रुपए थी, उस लागत में चालीस फीसदी से अधिक की कमी करना अब संभव नजर आ रहा है. जी हां देश-विदेश में मेट्रो ट्रेन के क्षेत्र में अपनी तकनीकी विशेषज्ञता के लिए मशहूर खुद दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समक्ष यह दावा किया है. खास रिपोर्ट:

मेट्रो के दूसरे चरण की घटेगी लागत: 
प्रदेश की दूसरी अशोक गहलोत सरकार के प्रयासों से ही वर्ष 2014 में जयपुर मेट्रो परियोजना के दूसरे चरण में अम्बाबाड़ी से सीतापुरा तक मेट्रो चलाने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली गई थी. इस डीपीआर में दूसरे चरण की लागत करीब साढ़े दस हजार करोड़ आंकी गई. लेकिन तत्कालीन भाजपा सरकार ने पूरे पांच साल में मामले में किसी प्रकार की दिलचस्पी नहीं दिखाई. प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार ने अपने गठन के साथ ही इस परियोजना में गंभीरता दिखाना शुरू कर दिया. पुरानी डीपीआर को संशोधित करने का फैसला किया गया. दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) संशोधित डीपीआर तैयार कर रही है. इस वर्ष तक दिसम्बर तक संशोधित डीपीआर राज्य सरकार को सौंपी जाएगी. इसी बीच हाल ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने परियोजना की प्रगति की समीक्षा की. समीक्षा बैठक में मंत्री शांति धारीवाल, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त निरंजन आर्य, प्रमुख सचिव यूडीएच भास्कर ए सावंत, जयपुर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के आला अधिकारी मौजूद थे. इस समीक्षा बैठक में डीएमआरसी की ओर से परियोजना के दूसरे चरण को लेकर प्रस्तुतीकरण दिया गया. आपको बताते हैं कि इस प्रस्तुतीकरण में किस तरह दूसरे चरण की लागत में चालीस फीसदी की कमी का दावा किया गया है. 

लागत में कमी के डीएमआरसी के तर्क:
—पुरानी डीपीआर में भूमि की लागत 875 करोड़ रुपए और परियोजना की लागत 9500 करोड़ रुपए आंकी गई है
—पुरानी डीपीआर के अनुसार ही भूमि ली जाए तो इसकी लागत 800 करोड़ रुपए से बढ़कर 1600 करोड़ रुपए होगी
—डीएमआरसी के नए आकलन के अनुसार पहले से कम भूमि की जरूरत होगी,जिसकी लागत 800 करोड़ रुपए ही आएगी
—पुरानी डीपीआर में SMS अस्पताल से एमआई रोड,संसारचंद्र रोड के करीब 10 किलोमीटर रूट में भूमिगत कोरिडोर बनना है
—इस रूट पर भूमिगत के बजाए एलिवेटेड कोरिडोर बनाने की लागत में एक तिहाई तक कमी की जा सकती है
—चार डिब्बों की ट्रेन की जगह तीन डिब्बे की ट्रेन चलाने पर रोलिंग स्टॉक की लागत में काफी कमी की जा सकती है
—जीएसटी लागू होने से रोलिंग स्टॉक और अन्य मशीनरी की लागत में 12 से 15 फीसदी तक की कमी आई है
—मेट्रो से जुड़े उपकरण व मशीनरी निर्माण में कई कंपनियों के आने के कारण प्रतिस्पर्धा के चलते भी लागत पहले से कम हो गई है
—इस प्रकार परियोजना की लागत 5200 करोड़ रुपए और भूमि की लागत मिलाकर करीब 6000 करोड़ रुपए कुल लागत आ सकती है

कटौती तभी संभव, जब जल्द से जल्द काम हो शुरू:
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में हुई इस समीक्षा बैठक में डीएमआरसी की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि दूसरे चरण की लागत में इतनी अधिक कटौती तभी संभव है, जब जल्द से जल्द परियोजना पर काम शुरू कर दिया जाए. जैसे-जैसे समय बीतेगा उस हिसाब से इस लागत में बढ़ोतरी होगी. जानकारों के अनुसार डीएमआरसी के प्रस्तुतीकरण से बैठक में काफी सकारात्मक माहौल रहा. भारी भरकम लागत में कमी करने के डीएमआरसी के तर्कों ने सरकार के हौसले परियोजना के पहले से और अधिक बुलंद कर दिए. आपको बताते हैं कि परियोजना की लागत का जुगाड़ किस प्रकार किया जाएगा. 

परियोजना के दूसरे चरण की लागत यूं होगा जुगाड़:
—केन्द्र सरकार की मेट्रो नीति के तहत लागत का 20 फीसदी केन्द्र सरकार देगी
—राज्य सरकार लागत की 20 फीसदी हिस्सेदारी देगी
—शेष 60 फीसदी जापान इंटरनेशन कॉर्पोरेशन एजेंसी (जायका) जैसी संस्था से ऋण लिया जाएगा
—राज्य सरकार चाहती थी कि पहले व दूसरे दोनों चरण की लागत का 20 फीसदी केन्द्र सरकार दे
—लेकिन पिछली भाजपा सरकार ने पहले चरण में केन्द्र को हिस्सेदारी देने से मना कर दिया
—इसी के चलते केन्द्र सरकार अब केवल दूसरे चरण की लागत में ही हिस्सेदार बनेगी

रूट के तीन विकल्पों पर मंथन:
जयपुर मेट्रो परियोजना के दूसरे चरण के रूट के तीन विकल्पों पर फिलहाल मंथन चल रहा है. डीएमआरसी की ओर से दिसम्बर में सौंपी जाने वाली डीपीआर में इन सभी विकल्प की आवश्यकता और लागत के बारे में बताया जाएगा. हाल ही समीक्षा बैठक ये यह तो तय हो गया है कि परियोजना को लेकर राज्य सरकार जल्द ही बड़ा फैसला कर सकती है. 

... संवाददाता अभिषेक श्रीवास्तव की रिपोर्ट 


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जयपुर: राजस्थान में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. पिछले 12 घंटे में 6 मरीजों की मौत हो गई. जबकि 224 नए पॉजिटिव केस सामने आये है. जोधपुर में चार, कोटा, उदयपुर में 1-1 मरीज की मौत हो गई. सर्वाधिक 48 कोरोना पॉजिटिव मरीज प्रतापगढ़ जिले में मिले. अजमेर 7 , अलवर 23, बारां 4 , भरतपुर 8, भीलवाड़ा 3, बीकानेर 12 , चूरू 1 , दौसा 7 , डूंगरपुर 1 , जयपुर 31, जालोर 18 , झालावाड़ 3 , झुंझुनूं 7, कोटा 5 , पाली 33 , राजसमंद 6 , टोंक 3, उदयपुर 4 कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले है. राजस्थान में मौत का आंकड़ा 453 पहुंच गया है. वहीं प्रदेश में कुल पॉजिटिव मरीजों की संख्या 19 हजार 756 पहुंच गई है. 

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पॉजिटिव से नेगेटिव हुए 15 हजार 663 मरीज:
राजस्थान में कुल 15 हजार 663 मरीज पॉजिटिव से नेगेटिव हुए है. वहीं कुल 15 हजार 351 मरीज अस्पताल से डिस्चार्ज किए गए है. अगर बात करें एक्टिव मरीजों की, तो 3 हजार 640 मरीज अस्पताल में उपचाररत है. कुल कोरोना पॉजिटिव प्रवासियों की संख्या 5 हजार 429 पहुंच गई है.

शनिवार को आये थे 480 पॉजिटिव मरीज:
शनिवार को 7 मरीजों की मौत हो गई. जबकि रिकॉर्ड 480 नए पॉजिटिव केस सामने आये थे. भरतपुर में एक,धौलपुर में तीन, झुंझुनूं में एक,सीकर में एक राज्य से बाहर के एक मरीज की मौत हुई. सर्वाधिक 54 कोरोना पॉजिटिव मरीज अलवर जिले में मिले थे. अजमेर 7,बाड़मेर 43,भरतपुर 30,भीलवाड़ा 1,बीकानेर 46,दौसा 4, धौलपुर 39, डूंगरपुर 13,श्रीगंगानगर 1,हनुमानगढ़ 1,जयपुर 40, जालोर 42,झुंझुनूं 11,जोधपुर 29,करौली 3,कोटा 14,नागौर 26, पाली 22,राजसमंद 2,सवाई माधोपुर 1,सीकर 16,सिरोही 8,टोंक 2, उदयपुर 20 और दूसरे राज्य के 4 मरीज पॉजिटिव मिले थे. राजस्थान में कोरोना की वजह से अब तक 447 मरीजों की मौत हो गई थी. जबकि कुल 19 हजार 532 पॉजिटिव मरीजों की संख्या पहुंच गई थी. 

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जयपुर: राजधानी जयपुर में सवाई मानसिंह अस्पताल (SMS) में फूड वैन की शुरुआत हुई. यह सुविधा SMS अस्पताल में इलाज करवाने आये लोगों को मिलेगी. प्रदेश के मुख्य सचिव राजीव स्वरूप पत्नी ईशा स्वरूप के साथ एसएमएस अस्पताल पहुंचे. लोगों को फूड पैकेट वितरित करके की फूड वैन की शुरुआत की गई.

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कोरोना काल में लोगों की सोच में बड़ा बदलाव:
मुख्य सचिव राजीव स्वरूप ने इस तरह के काम को पुनीत पहल बताया. स्वरूप ने कहा कि कोरोना काल में लोगों की सोच में बड़ा बदलाव हुआ है. पुलिस हो या चिकित्सक,सभी ने आगे बढ़कर जनसेवा का काम किया है. CS राजीव स्वरूप ने कोरोना काल के बीच ब्यूरोक्रेसी में बदलाव को लेकर कहा कि सभी अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी का अहसास है. 

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कोरोना काल अभी खत्म नहीं हुआ है,आगे बड़ी चुनौती है. इसलिए सभी को टीम वर्क के रूप में काम करने के निर्देश दिए है. कार्यक्रम में आबकारी आयुक्त जोगाराम,SMS मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ सुधीर भंडारी समेत अस्पताल के अन्य चिकित्सक कार्यक्रम में मौजूद रहे.

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जयपुर: राज्य सरकार ने कोरोना महामारी के संक्रमण की स्थिति के मद्देनजर इस वर्ष राजस्थान के सभी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और तकनीकी शिक्षण संस्थानों में स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं नहीं कराने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में शनिवार को मुख्यमंत्री निवास पर एक उच्च स्तरीय बैठक में यह फैसला लिया गया.

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बिना परीक्षा के अगली कक्षा में किया जाएगा प्रमोट:
सीएम गहलोत ने कहा कि कोरोना महामारी के परिदृश्य को देखते हुए इस वर्ष उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं नहीं कराई जाएंगी तथा सभी विद्यार्थियों को बिना परीक्षा के अगली कक्षा में प्रमोट किया जाएगा. प्रमोट होने वाले विद्यार्थियों के अंकों के निर्धारण के सम्बन्ध में भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा आगामी कुछ दिनों में जारी होने वाले दिशा-निर्देशों का अध्ययन कर समुचित निर्णय लिया जाएगा.

शिक्षा मंत्री रहे बैठक में मौजूद
बैठक में उच्च शिक्षा राज्य मंत्री भंवर सिंह भाटी, तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री सुभाष गर्ग, मुख्य सचिव राजीव स्वरूप, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त निरंजन आर्य, उच्च शिक्षा सचिव  शुचि शर्मा, सूचना एवं जनसम्पर्क आयुक्त महेन्द्र सोनी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे.

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जयपुर: देशभर में आज गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है. शिष्य अपने गुरुओं की पूजा अर्चना करके श्रद्धा प्रकट कर रहे है. लेकिन कोरोना संकट की वजह से देशभर में गुरु पूर्णिमा पर कोई बडा आयोजन नहीं होगा. गुरुओं के आश्रम में भी बडे आयोजन पर रोक है. आपको बता दें कि गुरु पूर्णिमा का पर्व आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है. इस दिन गुरु पूजा का विधान है. गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के शुरू में आती है. 

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इस दिन हुआ था महर्षि वेदव्यास का जन्म:
इस दिन से चार महीने तक परिव्राजक साधु-सन्त एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं. ये चार महीने मौसम की दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठ होते हैं. न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी. इसलिए अध्ययन के लिए उपयुक्त माने गए हैं. जैसे सूर्य के ताप से तप्त भूमि को वर्षा से शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है, वैसे ही गुरु-चरणों में उपस्थित साधकों को ज्ञान, शान्ति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है. इस दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म भी हुआ था, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं. इस दिन से ऋतु परिवर्तन भी होता है. इस दिन शिष्य द्वारा गुरु की उपासना का विशेष महत्व भी है.

ऐसे करें गुरु की पूजा...

-सबसे पहले आप गुरु को उच्च आसन पर बैठाये.

-इसके बाद आप गुरु के चरण साफ जल से धुलाएं और फिर चरण को साफ करें. 

-फिर आप गुरुजी के चरणों में पीले या सफेद पुष्प अर्पित कीजिए. 

- इसके बाद गुरुजी को श्वेत या पीले वस्त्र देने चाहिए. 

- यथाशक्ति फल, मिष्ठान्न दक्षिणा अर्पित कीजिए. 

- आप गुरु से अपना दायित्व स्वीकार करने की प्रार्थना कीजिए.

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जयपुर: जयपुर एयरपोर्ट पर किसी स्टाफ के कोरोनावायरस पॉजिटिव मिलने का पहला मामला सामने आया है. इंडिगो एयरलाइन का एक पायलट कोरोना पॉजिटिव पाया गया है. एयरलाइन के इस कैप्टन ने 2 जुलाई को जयपुर से दुबई और वापस दुबई से जयपुर की फ्लाइट उड़ाई थी. इसके बाद कैप्टन होटल मेरियट में रुका हुआ था.

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महात्मा गांधी अस्पताल भिजवाया गया कैप्टन को:
शुक्रवार को उसे बुखार महसूस होने पर कोरोना की जांच करवाई गई. जांच में कैप्टन के कोरोना पॉजिटिव मिलने के बाद इंडिगो एयरलाइन स्टाफ में खलबली मच गई. इसके बाद पायलट को महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पायलट के साथ मौजूद दूसरे क्रू को क्वारंटाइन किए जाने की प्रक्रिया चल रही है.

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जयपुर: राजस्थान में कोरोना वायरस का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है. पिछले 24 घंटे में 7 मरीजों की मौत हो गई. जबकि रिकॉर्ड 480 नए पॉजिटिव केस सामने आये है. भरतपुर में एक,धौलपुर में तीन, झुंझुनूं में एक,सीकर में एक राज्य से बाहर के एक मरीज की मौत हुई. सर्वाधिक 54 कोरोना पॉजिटिव मरीज अलवर जिले में मिले है. अजमेर 7,बाड़मेर 43,भरतपुर 30,भीलवाड़ा 1,बीकानेर 46,दौसा 4, धौलपुर 39, डूंगरपुर 13,श्रीगंगानगर 1,हनुमानगढ़ 1,जयपुर 40, जालोर 42,झुंझुनूं 11,जोधपुर 29,करौली 3,कोटा 14,नागौर 26, पाली 22,राजसमंद 2,सवाई माधोपुर 1,सीकर 16,सिरोही 8,टोंक 2, उदयपुर 20 और दूसरे राज्य के 4 मरीज पॉजिटिव मिले है. राजस्थान में कोरोना की वजह से अब तक 447 मरीजों की मौत हो गई. जबकि कुल 19 हजार 532 पॉजिटिव मरीजों की संख्या पहुंच गई है.

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पॉजिटिव से नेगेटिव हुए 15 हजार 640 मरीज:
अगर बात करें राजस्थान में ठीक हो चुके मरीजों की तो अब तक 15 हजार 640 मरीज पॉजिटिव से नेगेटिव हुए है. वहीं कुल 15 हजार 325 मरीजों को अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा चुका है. प्रदेश में कोरोना वायरस के 3 हजार 445 एक्टिव मरीज अस्पताल में उपचाररत है. कुल कोरोना पॉजिटिव प्रवासियों की संख्या 5 हजार 429 पहुंच गई है.

जयपुर में बढ़ता कोरोना का ख़ौफ: 
जयपुर में कोरोना वायरस का खौफ लगातार बढ़ता जा रहा है. पिछले 24 घंटे में 40 नए पॉजिटिव केस सामने आये है. माणक चौक में 8, विदेश से आए हुए 7 प्रवासी,अजमेर रोड पर चार, जौहरी बाजार और दुर्गापुरा में 3-3 पॉजिटिव केस, वैशाली नगर,गलता गेट,सोडाला और सांगानेर में दो-दो केस, कोटपूतली,जवाहर नगर,सी स्कीम, मानसरोवर, सीतापुरा, गोपालपुरा और गांधीनगर में 1-1 पॉजिटिव केस सामने आये है. जयपुर में अब तक 163 मरीजों की मौत हो गई. जबकि कुल 3 हजार 479 पॉजिटिव अब तक सामने आ चुके है.

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जयपुर: आबकारी विभाग की लापरवाही सीकर वासियों पर भारी पड़ सकती है. भीषण गर्मी के दौर में सीकर के गंगानगर शुगर मिल डिपो पर 30000 लीटर स्प्रिट से भरे हुए टैंकर को 6 महीने से ज्यादा समय से खड़ा कर रखा है. ज्वलनशील स्प्रिट से भरे टैंकर से भीषण गर्मी के दौर में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. पूरे मामले में आबकारी विभाग की लापरवाही सामने आई है. बीते वर्ष 29 नवंबर को गंगानगर शुगर मिल ने जिला आबकारी अधिकारी जयपुर शहर से परमिट लेकर गुरदासपुर की एबी ग्रेन स्प्रिट कंपनी से 30,000 लीटर स्प्रिट मंगवाई.

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एक टैंकर में भरी स्प्रिट की रासायनिक जांच:
30000 लीटर स्प्रिट से भरे इस टैंकर को गंगानगर शुगर मिल के सीकर स्थित डिपो भिजवाया गया. इसके बाद एक टैंकर में भरी स्प्रिट की रासायनिक जांच कराई गई, जिसमें इसके अंदर ईएनए की रासायनिक तेजी 68.2 ओपी के स्थान पर 67.11 ओपी ही प्राप्त हुई. ग्रेन एक्स्ट्रा नेचुरल अल्कोहल की तेजी कम आने की वजह से टैंकर को सीकर डिपो से वापस गुरदासपुर भेजा जाना तय किया गया. इसके बाद खुद गंगानगर शुगर मिल के महाप्रबंधक ने आबकारी आयुक्त को 31 जनवरी को पत्र लिखकर इस टैंकर को वापस कंपनी में भेजने की स्वीकृति चाही.

करीब पौने दो लाख रुपए टैंकर ट्रांसपोर्टेशन के भी वसूल लिए:
इसके बाद भी इस टैंकर को वापस गुरदासपुर नहीं भेजा गया। इसके बाद गंगानगर शुगर मिल सीकर के डिपो इंचार्ज ने 6 फरवरी को जिला आबकारी अधिकारी सीकर को फिर से पत्र लिखकर इस टैंकर की वापसी सुनिश्चित करने को कहा लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. सूत्रों का कहना है कि इस अवधि में जिला आबकारी अधिकारी सीकर और उनके मातहत अधिकारी कंपनी प्रतिनिधियों से नेगोशिएशन करते रहे. जब कंपनी की ओर से लेन देन से इनकार किया गया तो आबकारी विभाग सीकर ने कंपनी पर करीब पौने दो लाख रुपए टैंकर ट्रांसपोर्टेशन के भी वसूल लिए.

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6 महिने से ज्यादा समय से खड़ा हैं स्प्रिट का टैंकर:
बावजूद इसके यह टैंकर 6 महीने से भी अधिक समय से डिपो ऑफिस में खड़ा है। चूंकि इस समय भीषण गर्मी का दौर चल रहा है और स्प्रिट अति ज्वलनशील होती है ऐसे में कभी भी यहां बड़ा हादसा हो सकता है, जिसमें जन हानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. पूरे मामले की जानकारी आबकारी आयुक्त को भी है हालांकि दो दिन पहले ही आबकारी आयुक्त का तबादला हो गया और डॉ जोगाराम ने आबकारी आयुक्त का कार्यभार संभाला है. ऐसे में उम्मीद की जानी चाहिए कि आबकारी आयुक्त पूरे मामले में संज्ञान लेकर इस खतरनाक हो चले टैंकर की वापसी तो सुनिश्चित करेंगे ही साथ ही गैर जिम्मेदाराना तरीके से हादसे को न्योता दे रहे अधिकारियों पर कार्रवाई भी सुनिश्चित करेंगे.

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जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने कोविड-19 के संक्रमण के चलते देश और प्रदेश के सफाईकर्मियों व सेनेटाइजेशन के काम में लगे कर्मचारियों को पीपीई किट, मास्क और ग्लब्स सहित अन्य सुरक्षा सामग्री मुहैया कराने के मामले में राज्य सरकार को एडिशनल एफिडेविट पेश करने के आदेश दिए है. मुकुल चौधरी की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति और जस्टिस प्रकाश गुप्ता की खण्डपीठ ने ये आदेश दिए है.

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केन्द्र सरकार और राज्य सरकार को जारी किए नोटिस:
खण्डपीठ ने एडिशनल एफिडेविट में डब्ल्यूएचओ और केन्द्र सरकार की गाइडलाइन के साथ साथ सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में किए गए प्रयासों की जानकारी देने के निर्देश दिये है.साथ ही अदालत ने केन्द्र सरकार और राज्य सरकार को नोटिस जारी किये है.अधिवक्ता महमूद प्राचा व सुनील वशिष्ठ ने बताया कि देशभर में 5 करोड़ सफाईकर्मी हैं जो कोविड-19 के दौरान सफाई व सेनेटाइजेशन का काम कर रहे हैं. 

सेनेटाइजेशन का काम कर रहे लोगों को दी जाए सुरक्षा सामग्री: 
लेकिन फिर भी इन लोगों को खुद के जीवन की सुरक्षा के लिए पीपीई किट और मास्क सहित अन्य सुरक्षा सामग्री नहीं दी जा रही. जबकि केन्द्र सरकार व डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन के मुताबिक इन कर्मचारियों को भी पीपीई किट समेत अन्य सुरक्षा सामग्री दी जानी चाहिए. क्योंकि ये कर्मचारी सीधे तौर पर सफाई व सेनेटाइजेशन के काम से जुड़े हुए हैं. देश और प्रदेश में कोरोना बीमारी संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. इसलिए सफाई व सेनेटाइजेशन का काम कर रहे लोगों को सुरक्षा सामग्री दी जाए.

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