VIDEO: जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण की करीब 40 फीसदी तक घटेगी लागत

Abhishek Shrivastava Published Date 2019/09/22 03:33

जयपुर: पिछली भाजपा सरकार ने जहां जयपुर मेट्रो परियोजना के दूसरे चरण की डीपीआर फाइनल करने में ही पांच साल पूरे कर दिए थे, वहीं मौजूदा सरकार ने मामले में दृढ़ इच्छा शक्ति दिखाई, तो दूसरे चरण में मेट्रो ट्रेन चलाने की जो लागत पहले करीब साढ़े दस हजार करोड़ रुपए थी, उस लागत में चालीस फीसदी से अधिक की कमी करना अब संभव नजर आ रहा है. जी हां देश-विदेश में मेट्रो ट्रेन के क्षेत्र में अपनी तकनीकी विशेषज्ञता के लिए मशहूर खुद दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समक्ष यह दावा किया है. खास रिपोर्ट:

मेट्रो के दूसरे चरण की घटेगी लागत: 
प्रदेश की दूसरी अशोक गहलोत सरकार के प्रयासों से ही वर्ष 2014 में जयपुर मेट्रो परियोजना के दूसरे चरण में अम्बाबाड़ी से सीतापुरा तक मेट्रो चलाने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली गई थी. इस डीपीआर में दूसरे चरण की लागत करीब साढ़े दस हजार करोड़ आंकी गई. लेकिन तत्कालीन भाजपा सरकार ने पूरे पांच साल में मामले में किसी प्रकार की दिलचस्पी नहीं दिखाई. प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार ने अपने गठन के साथ ही इस परियोजना में गंभीरता दिखाना शुरू कर दिया. पुरानी डीपीआर को संशोधित करने का फैसला किया गया. दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) संशोधित डीपीआर तैयार कर रही है. इस वर्ष तक दिसम्बर तक संशोधित डीपीआर राज्य सरकार को सौंपी जाएगी. इसी बीच हाल ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने परियोजना की प्रगति की समीक्षा की. समीक्षा बैठक में मंत्री शांति धारीवाल, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त निरंजन आर्य, प्रमुख सचिव यूडीएच भास्कर ए सावंत, जयपुर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के आला अधिकारी मौजूद थे. इस समीक्षा बैठक में डीएमआरसी की ओर से परियोजना के दूसरे चरण को लेकर प्रस्तुतीकरण दिया गया. आपको बताते हैं कि इस प्रस्तुतीकरण में किस तरह दूसरे चरण की लागत में चालीस फीसदी की कमी का दावा किया गया है. 

लागत में कमी के डीएमआरसी के तर्क:
—पुरानी डीपीआर में भूमि की लागत 875 करोड़ रुपए और परियोजना की लागत 9500 करोड़ रुपए आंकी गई है
—पुरानी डीपीआर के अनुसार ही भूमि ली जाए तो इसकी लागत 800 करोड़ रुपए से बढ़कर 1600 करोड़ रुपए होगी
—डीएमआरसी के नए आकलन के अनुसार पहले से कम भूमि की जरूरत होगी,जिसकी लागत 800 करोड़ रुपए ही आएगी
—पुरानी डीपीआर में SMS अस्पताल से एमआई रोड,संसारचंद्र रोड के करीब 10 किलोमीटर रूट में भूमिगत कोरिडोर बनना है
—इस रूट पर भूमिगत के बजाए एलिवेटेड कोरिडोर बनाने की लागत में एक तिहाई तक कमी की जा सकती है
—चार डिब्बों की ट्रेन की जगह तीन डिब्बे की ट्रेन चलाने पर रोलिंग स्टॉक की लागत में काफी कमी की जा सकती है
—जीएसटी लागू होने से रोलिंग स्टॉक और अन्य मशीनरी की लागत में 12 से 15 फीसदी तक की कमी आई है
—मेट्रो से जुड़े उपकरण व मशीनरी निर्माण में कई कंपनियों के आने के कारण प्रतिस्पर्धा के चलते भी लागत पहले से कम हो गई है
—इस प्रकार परियोजना की लागत 5200 करोड़ रुपए और भूमि की लागत मिलाकर करीब 6000 करोड़ रुपए कुल लागत आ सकती है

कटौती तभी संभव, जब जल्द से जल्द काम हो शुरू:
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में हुई इस समीक्षा बैठक में डीएमआरसी की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि दूसरे चरण की लागत में इतनी अधिक कटौती तभी संभव है, जब जल्द से जल्द परियोजना पर काम शुरू कर दिया जाए. जैसे-जैसे समय बीतेगा उस हिसाब से इस लागत में बढ़ोतरी होगी. जानकारों के अनुसार डीएमआरसी के प्रस्तुतीकरण से बैठक में काफी सकारात्मक माहौल रहा. भारी भरकम लागत में कमी करने के डीएमआरसी के तर्कों ने सरकार के हौसले परियोजना के पहले से और अधिक बुलंद कर दिए. आपको बताते हैं कि परियोजना की लागत का जुगाड़ किस प्रकार किया जाएगा. 

परियोजना के दूसरे चरण की लागत यूं होगा जुगाड़:
—केन्द्र सरकार की मेट्रो नीति के तहत लागत का 20 फीसदी केन्द्र सरकार देगी
—राज्य सरकार लागत की 20 फीसदी हिस्सेदारी देगी
—शेष 60 फीसदी जापान इंटरनेशन कॉर्पोरेशन एजेंसी (जायका) जैसी संस्था से ऋण लिया जाएगा
—राज्य सरकार चाहती थी कि पहले व दूसरे दोनों चरण की लागत का 20 फीसदी केन्द्र सरकार दे
—लेकिन पिछली भाजपा सरकार ने पहले चरण में केन्द्र को हिस्सेदारी देने से मना कर दिया
—इसी के चलते केन्द्र सरकार अब केवल दूसरे चरण की लागत में ही हिस्सेदार बनेगी

रूट के तीन विकल्पों पर मंथन:
जयपुर मेट्रो परियोजना के दूसरे चरण के रूट के तीन विकल्पों पर फिलहाल मंथन चल रहा है. डीएमआरसी की ओर से दिसम्बर में सौंपी जाने वाली डीपीआर में इन सभी विकल्प की आवश्यकता और लागत के बारे में बताया जाएगा. हाल ही समीक्षा बैठक ये यह तो तय हो गया है कि परियोजना को लेकर राज्य सरकार जल्द ही बड़ा फैसला कर सकती है. 

... संवाददाता अभिषेक श्रीवास्तव की रिपोर्ट 


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