कोविड-19: दुनियाभर में महिलाओं के प्रजनन और यौन स्वास्थ्य अधिकारों को झटका

कोविड-19: दुनियाभर में महिलाओं के प्रजनन और यौन स्वास्थ्य अधिकारों को झटका

कोविड-19: दुनियाभर में महिलाओं के प्रजनन और यौन स्वास्थ्य अधिकारों को झटका

शेरब्रुक(फ्रांस): गेब्रियल ब्लौइन-जेनेस्ट, फ्रांस्वा कॉट्यूरियर, मिशेल रिटमैन, नतालिया टोरेस ओरोज्को, रोज़ली एमोंड-ट्रेमब्ले और सारा स्टेको, यूनिवर्सिटी डी शेरब्रुक.

कोविड-19 महामारी के दौरान सरकारों और स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा अपनाए गए असाधारण उपायों, जैसे कि लॉकडाउन, पृथकवास या स्वास्थ्य सेवाओं का पुनर्गठन ने यौन और प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों को सीधे तौर पर प्रभावित किया है. खासकर महिलाओं और लड़कियों के मामले में इन प्रभावों को कई स्तरों पर महसूस किया गया और इस मुद्दे को वैश्विक प्राथमिकता बनाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विकास पर एक बड़े पुनर्विचार की आवश्यकता है.

जन्म नियंत्रण तक पहुंच:
जन्म नियंत्रण तक पहुंच यौन और प्रजनन स्वास्थ्य के मुद्दों में से एक है जो महामारी से सबसे अधिक प्रभावित हुई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, महामारी के दौरान परिवार नियोजन और जन्म नियंत्रण बुरी तरह बाधित हुआ है, जिससे 10 में से सात देश प्रभावित हुए हैं.
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) के अनुसार, 114 निम्न/मध्यम आय वाले देशों में चार करोड़ 70 लाख से अधिक महिलाएं गर्भ निरोधकों का उपयोग करने में असमर्थ हैं. उपायों के प्रत्येक तीन महीने के विस्तार के साथ, बीस लाख से अधिक महिलाएं इस आंकड़े में जुड़ती चली जाएंगी.

घरों में बंद रहने के उपायों ने गर्भनिरोधक आपूर्ति श्रृंखला और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचने की क्षमता को भी बाधित किया. कोविड-19 का मुकाबला करने के लिए आवश्यक आपूर्ति पर ध्यान केंद्रित करने के कारण, यौन और प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी उत्पाद दुर्गम या स्टॉक से बाहर हो गए, जिससे लाखों महिलाओं और लड़कियों के यौन और प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों में सीधे बाधा उत्पन्न हुई.

यौन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच:
कोविड-19 के प्रभावों को यौन और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच पर भी महसूस किया जाता है, जिसमें प्रसव पूर्व देखभाल, मातृ और नवजात स्वास्थ्य सेवाएं, यौन संचारित संक्रमणों से संबंधित देखभाल या यौन स्वास्थ्य परामर्श शामिल हैं. अमेरिका में, तीन में से एक महिला ने बताया कि वह इस दौरान यौन और प्रजनन स्वास्थ्य प्रदाता तक या तो देर से पहुंची या पहुंच ही नहीं पाई. या गर्भ निरोधक प्राप्त करने में कठिनाई हुई. यौन और प्रजनन स्वास्थ्य क्लीनिक बंद होने से यौन और प्रजनन स्वास्थ्य जरूरतों वाली महिलाओं और लड़कियों पर अधिक बोझ पड़ा.

स्कूल बंद होने (एक उपाय जिसे व्यापक रूप से विश्व स्तर पर लागू किया गया) ने भी सूचना और यौन शिक्षा तक पहुंच को कम कर दिया है, ज्यादातर लड़कियों को स्कूल न जा पाने के कारण जानकारी के अभाव और संसाधनों की कमी के चलते उच्च जोखिम वाली किशोर गर्भावस्था और मृत्यु का सामना करना पड़ा (जैसा कि सेव द चिल्ड्रन की रिपोर्ट है कि 15-19 वर्ष की आयु की लड़कियों के लिए विश्व स्तर पर प्रसव मृत्यु का प्रमुख कारण है).

इस बात को समझने की जरूरत है कि यौन और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएं मिलने में मामूली बाधाओं के भी बड़े स्वास्थ्य प्रभाव हो सकते हैं. उदाहरण के लिए, यदि गर्भावस्था से संबंधित स्वास्थ्य देखभाल में 10 प्रतिशत की कमी आती है तो उसके परिणाम महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए विनाशकारी हो सकते हैं: बच्चों को जन्म देने वाली 17 लाख महिलाएं और 26 लाख नवजात शिशु गंभीर जटिलताओं से पीड़ित होंगे और उन्हें आवश्यक देखभाल नहीं मिलेगी.

गर्भपात तक पहुंच:
महामारी के दौरान, कई राज्यों और स्वास्थ्य क्षेत्राधिकारों में गर्भपात को ‘‘गैर-जरूरी’’ सेवा घोषित किया गया था, जिससे लाखों महिलाओं और लड़कियों को गर्भपात कराने में दिक्कत हुई. मई 2020 में, मानवाधिकार संबंधी संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त के कार्यालय ने बताया कि कुछ अमेरिकी राज्य कोविड-19 की आपातकालीन स्थिति की आड़ में गर्भपात संबंधी सेवा को प्रतिबंधित कर रहे थे. इसी तरह इटली में, स्वास्थ्य सुविधाओं ने गर्भपात से संबंधित सेवाओं को निलंबित कर दिया और स्त्री रोग संबंधी कर्मचारियों को कोविड-19 देखभाल से जुड़े कार्यों में लगा दिया, जिससे कानूनी गर्भपात में बाधाएं बढ़ रही हैं.

लिंग आधारित हिंसा में वृद्धि:
स्वास्थ्य संकट से हिंसा भी तेज हो गई है, जिससे लिंग आधारित हिंसा में वृद्धि हुई है जिससे सेहत और स्वास्थ्य को खतरा है. उदाहरण के लिए, यूएनएफपीए ने अनुमान लगाया है कि छह महीने के लॉकडाउन के परिणामस्वरूप लिंग आधारित हिंसा के तीन करोड़ 10 लाख अतिरिक्त मामले सामने आए हैं. प्रत्येक तीन महीने के विस्तार के लिए अतिरिक्त डेढ़ करोड़ मामले जोड़े जाएंगे.

बच्चे विशेष रूप से प्रभावित होते हैं. मई 2020 में सेव द चिल्ड्रन का अनुमान है कि घरों से बाहर न निकलने के दिशा-निर्देशों के लागू होने के तीन महीने के बाद बच्चों के शारीरिक, यौन और भावनात्मक शोषण में 20 प्रतिशत से 32 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. इसका मतलब है कि दुनिया भर में केवल जून, जुलाई और अगस्त 2020 में आठ करोड़ 50 लाख से अधिक लड़कियां और लड़के इस मद में प्रभावित हुए हैं.

सिफारिशें:
यौन और प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों पर पहुंच बनाए रखना एक दीर्घकालिक प्रयास है जो एक महामारी में भी रुकने का जोखिम नहीं उठा सकता है.

इन उपायों तक पहुंच प्रतिबंधित होने से विश्व स्तर पर करोड़ों महिलाएं और लड़कियां प्रभावित हैं - कोविड-19 से प्रभावित लोगों की तुलना में अधिक. गुट्टमाकर इंस्टीट्यूट के अनुसार, उदाहरण के लिए, 2020 में, 21 करोड़ 80 लाख महिलाओं को आधुनिक गर्भ निरोधक नहीं मिल पाए, 11 करोड 10 लाख महिलाओं ने अनचाहा गर्भधारण किया, तीन करोड़ अनियोजित बच्चे पैदा हुए और तीन करोड़ 50 लाख असुरक्षित गर्भपात हुए, और यह आंकड़ा केवल निम्न और मध्यम आय वाले देशों का है. इसके मुकाबले, 2020 में वैश्विक स्तर पर कोविड-19 के लगभग आठ करोड़ मामले दर्ज किए गए.

इस मामले में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को उसी ताकत के साथ लामबंद होना चाहिए जैसा उसने वर्तमान महामारी के लिए किया था. यौन और प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकार एक वैश्विक प्राथमिकता होनी चाहिए. सोर्स- भाषा 

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