कलह की आग में क्रिकेट का कुनबा, कब होगी इस रात की सुबह

Naresh Sharma Published Date 2019/03/04 08:36

जयपुर (नरेश शर्मा)। कंगाली के कगार पर खड़े राज्य के सबसे धनी खेल संघ आरसीए में ऐसा अंधियारा छाया है कि सुबह होने का नाम ही नहीं ले रही है। पिछले डेढ़ साल से अलग अलग दावे किए जा रहे हैं। कभी आरसीए के अच्छे दिन आने के, तो कभी क्रिकेट की वापसी के, कभी पदाधिकारी ग्रुप फोटो खींचवाकर आपसी मतभेद भुलाने का दावा करते हैं, लेकिन यह सब कुछ ढाक के तीन पात है। क्रिकेट संघ पूरी तरह बिखर चुका है, पदाधिकारी एक दूसरे के साथ बैठने को तैयार नहीं है। ऐसे में एक ही सवाल उठ रहा है कि आखिर इस रात की सुबह कब होगी।

पिछले एक दशक से क्रिकेट का कुनबा कलह की आग में जल रहा है। पदाधिकारी मैदान में कम और कोर्ट में ज्यादा नजर आते हैं। खिलाड़ियों को तैयार करने की बजाय वकीलों की फौज तैयार की जाती है। विपक्षी टीम को हराने की बजाय पदाधिकारियों को आपस में पटखनी देने की रणनीति तय होती है।

कभी जैंटलमैन कहा जाना वाला क्रिकेट अब राजस्थान में तो खराब हो चुका है। हालात यह है कि जिस ललित मोदी के कारण आरसीए पर प्रतिबंध लगा था, वे तो क्रिकेट से दूर हो चुके हैं, लेकिन आरसीए के विवाद जलेबी की तरह इतने उलझ चुके हैं कि राज्य के क्रिकेट आरसीए के बैनर तले खेलने को तरस रहे हैं। ना आरसीए को क्रिकेट विकास के लिए पैसा मिल रहा है और न ही अंतरराष्ट्रीय मैचों की मेजबानी। बस पैसों की लीग आईपीएल के मैच जरूर यहां हो जाते हैं, लेकिन वह प्रायोजकों व टीम मालिकों की मजबूरी के कारण। बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस क्रिकेट संघ का संकट कब खत्म होगा।

संघ की वर्तमान स्थिति :
— क्रिकेट के कुनबे में चल रही है कलह
— पदाधिकारियों में आपसी विवाद चरम पर
— आरोप-प्रत्यारोप के लगातार चल रहे सिलसिले
— कोर्ट में भी तारीख पर तारीख पड़ रही है
— दो संविधान बनकर पहुंच गए बीसीसीआई के पास
— बीसीसीआई भी नहीं ले रही आरसीए पर कोई फैसला
— अब कोर्ट ने दिया है बीसीसीआई को साफ निर्देश
— 15 दिन में संविधान पर फैसला करने का निर्देश
— इसके साथ ही होगा आरसीए का भविष्य तय
— साथ ही रुचिर मोदी के बारे में हो जाएगा फैसला

आरसीए के अध्यक्ष सीपी जोशी व सचिव राजेंद्र नांदु में लगातार चल रहे विवाद के कारण ही आज आरसीए चौराहे पर खड़ा है। कई बार दोनों साथ-साथ भी आए हैं, लेकिन फिर अलगाव जल्दी ही हो जाता है। अब सीपी जोशी का कहना है कि नांदु नाम का कोई व्यक्ति आरसीए में नहीं है, तो नांदु कहते हैं कि सीपी जोशी पर उम्र का असर है।

इधर, कोर्ट में भी मामले की सुनवाई चल रही है। हाईकोर्ट ने बीसीसीआई को 15 मार्च तक आरसीए के संविधान के संबंध में निर्णय लेकर कोर्ट को अवगत कराने के लिए कहा है। अदालत ने कहा कि इससे आरसीए का काम सुचारू रूप से चल सकेगा। मामले की सुनवाई के दौरान बीसीसीआई ने कहा कि उनके पास आरसीए के दो संविधान हैं और बीसीसीआई इनका अध्ययन कर रहा है। इसलिए अदालत संविधानों के अध्ययन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय दें। अदालत ने बीसीसीआई को 15 मार्च तक का समय देते हुए कहा कि वह संविधान के संबंध में निर्णय करें और अदालत को भी इस संबंध में बताएं।

विडंबना की बात यह है कि पिछले एक महीने से बीसीसीआई संविधान की जांच की कर रहा है, फैसला नहीं। पहले एक संविधान एड हॉक कमेटी ने बीसीसीआई को भेजा था। इसके बाद राजस्थान में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद सीपी जोशी की आरसीए पद पर बहाली हो गई। रजिस्ट्रार ने भी जिस सीपी जोशी गुट के संविधान को मानने से पहले इनकार कर दिया था, बाद में उसी रजिस्ट्रार नीरज के पवन ने सीपी जोशी द्वारा भेजे गए संविधान को रजिस्टर कर दिया। यह संविधान भी लगभग एक महीने पहले बीसीसीआई को भेजा जा चुका है। एक महीने में भी बीसीसीआई की लीगल टीम इस संविधान का अध्ययन नहीं कर सकी है। संविधान पर फैसला होने के साथ ही रुचिर मोदी को लेकर भी फैसला हो जाएगा कि रुचिर भविष्य में आरसीए का हिस्सा रहेंगे या नहीं।

इस बीच जयपुर को फिर से आईपीएल की मेजबानी मिल गई है, लेकिन यह आयोजन करेगा कौन, इसको लेकर सवाल अभी खत्म नहीं हुआ। क्योंकि एक तरफ बीसीसीआई आरसीए से प्रतिबंध नहीं हटा रहा है, वहीं दूसरी तरफ यहां पर मैच भी होंगे। ऐसे में बीसीसीआई की यह दोहरी नीति समझ से परे है। जब बीसीसीआई से आरसीए को मान्यता ही नहीं है, तो आईपीएल की मेजबानी कैसे संभव है। झगड़े तो आईपीएल के लिए आने वाले बजट को लेकर भी होंगे, क्योंकि पिछले आईपीएल का विवाद अभी तक नहीं निपटा है। इस बार भी स्थिति वैसी ही है, अध्यक्ष अलग, तो सचिव व कोषाध्यक्ष अलग। अब देखना यह है कि क्या फिर पिछली बार हाईकोर्ट ने आईपीएल की मेजबानी के लिए जो व्यवस्था की थी, इस बार भी वही जारी होगी या फिर बीसीसीआई आईपीएल से पहले आरसीए का सस्पेंशन खत्म करेगा। वैसे आरसीए अध्यक्ष सीपी जोशी दावा कर चुके हैं  कि वे हर हाल में बीसीसीआई से आरसीए का सस्पेंशन खत्म कराएंगे, लेकिन कब तक, यह देखना होगा।

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