शीतला माता की पूजा के लिए उमड़ी भीड़, गधे की भी की जाती है पूजा

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/03/25 09:48

भरतपुर। प्रदेशभर में आज शीतला अष्टमी का त्योहार बड़ी ही धूम-धाम से मनाया जा रहा है। भरतपुर की बात करें तो यहां पर भी शीतला अष्टमी को लेकर काफी उत्साह नजर आ रहा है। शीतला अष्टमी होली से ठीक आठ दिनों बाद मनाई जाती है। इस दिन शीतला माता की पूजा की जाती है। शीतला माता की पूजा चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को होती है, लेकिन कुछ स्थानों पर इनकी पूजा होली के बाद आने वाले पहले सोमवार अथवा गुरुवार के दिन भी की जाती है। 

भरतपुर में शीतला माता के मंदिर में गधे की पूजा भी की जाती है और महिलाएं शीतला माता की पूजा के बाद गधे की पूजा करती है । शीतला माता हर तरह के पापों का नाश करती हैं और अपने भक्तों के तन-मन को शीतल करती हैं। इस पर्व को बूढ़ा बसौड़ा, बसौड़ा, बासौड़ा, लसौड़ा या बसियौरा भी कहा जाता है। शीतला माता की पूजा के दिन घर में चूल्हा नहीं जलता है। आज भी लाखों लोग इस नियम का बड़ी आस्था के साथ पालन करते हैं। शीतला माता की उपासना वसंत एवं ग्रीष्म ऋतु में होती है। चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ और आषाढ के कृष्ण पक्ष की अष्टमी शीतला देवी की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित होती है। इसलिए यह दिन शीतलाष्टमी के नाम से विख्यात है। 

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