एक साल पहले हुई इस घटना की वजह से आज तक कश्मीर की घाटियों में फैली है अशांति

FirstIndia Correspondent Published Date 2017/07/08 09:48

1 साल पहले 8 जुलाई 2016 को हिज्बुल मुजाहिद्दीन के आतंकी बुरहान वानी को सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में मार गिराया था। बुरहान के खात्मे के बाद आतंकी संगठन कमजोर हुआ, लेकिन कश्मीर घाटी में अशांति फैल गई। खुफिया सूत्रों से सेना को जानकारी मिली कि कोकरनाग इलाके के एक घर में मेहमाननवाजी चल रही है। दरअसल, सेब के जंगलों के बीच यह घर था हिज्बुल आतंकी सरताज अहमद शेख के चाचा गुलाम मोहम्मद शेख का। वह चाचा से मिलने आया था और उसके साथ बुरहान वानी तथा एक अन्य आतंकी परवेज अहमद भी था।

 


खुफिया जानकारी को पुष्ट करने के लिए सेना और पुलिस ने इलाके में काम कर रहे अपने लोगों को खंगाला। वहीं एक कसाई से पुष्टि हुई कि गुलाम मोहम्मद के घर कई मेहमानों की दावत के लिए मांस गया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ ही 19 राष्ट्रीय रायफल्स को रवाना कर दिया गया। तैयार करते-करते दोपहर होने लगी थी। शाम चार बजे तक इलाके को घेर लिया गया था। सेना की हलचल देख स्थानीय लोग भी हरकत में आ गए थे।

 

 

बुरहान के पिता ने कहा, 'कश्मीर खून-खराबे का गवाह रहा है, जिसमें मैंने अपने दो जवान बेटे खोए हैं। हिंसा से हमारे मन में जो आजादी की भावना है वह दबने नहीं वाली। न्याय के लिए लड़ाई चलती रहेगी।' हुर्रियत नेता और आतंकवादियों ने बुरहान की पहली बरसी को बड़े स्तर पर मनाने की घोषणा की है। अमेरिका द्वारा अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किए जाने से एक दिन पहले ही हिज्बुल चीफ सैयद सलाउद्दीन ने घाटी में 8 जुलाई से 13 जुलाई तक बंद की घोषणा है।

 

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