एमपी में किसान आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग के बाद मंदसौर में कर्फ्यू, 5 किसानों की मौत, CM ने किया मुआवजे का ऐलान

FirstIndia Correspondent Published Date 2017/06/06 19:10

मंदसौर। मध्यप्रदेश में चल रहा किसानों का आंदोलन मंगलवार को भी जारी रहा और आंदोलन को तेज कर दिया गया है। आज से उग्र हुए आंदोलन में उग्र भीड़ ने 8 ट्रकों और 2 बाइकों को आग के हवाले कर दिया। इस बीच माहौल उस वक्त और तनावपूर्ण हो गया, जब हालत पर काबू पाने के लिए सीआरपीएफ ने फायरिंग की। इस फायरिंग में 5 किसानों के मारे जाने की खबर, जिसके बाद भीड़ और उग्र हो गई। वहीं हालात बेकाबू होने के बाद मंदसौर शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया है। हालांकि फायरिंग की बात से राज्य के गृहमंत्री भूपिंदर सिंह इनकार किया है। उन्होंने बताया कि पुलिस या सीआरपीएफ की तरफ से कोई फायरिंग नहीं हुई है।


दरअसल, आज मंदसौर-नीमच रोड पर करीब एक हजार किसानों ने चक्काजाम किया था। इस दौरान मौके पर पुलिस भी मौजूद थी, लेकिन आंदोलनकारियों ने सुरक्षाबलों पर पथराव शुरू कर दिया।  बताया जा रहा है कि रतलाम में भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया, जिसके बाद एक एसआई की आंख फूट गई। यही नहीं, सीहोर में 11 पुलिसकर्मी जख्मी होने की खबर सामने आ रही है।


पुलिस सूत्रों का कहना है कि जिले के पिपल्यामंडी में आंदोलनकारी उपद्रव करने लगे थे। लिहाजा, पुलिस को स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए गोलियां चलानी पड़ीं। फायरिंग में पांच लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई घायल बताए जा रहे हैं। पुलिस के इस कदम से भड़के प्रदर्शनकारियों ने पिपल्यामंडी चौकी का घेराव पर उसमें आग लगाने की कोशिश की और गांधी चौराहे पर कई वाहनों को फूंक दिया।


वहीं दूसरी ओर, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर न्यायिक जांच के आदेश दिये हैं और उच्च अधिकारियों की आपात बैठक बुलाई है। मुख्यमंत्री ने मारे गये लोगों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए और घायलों को एक-एक लाख मुआवजा देने की घोषणा की है।


आपकों बता दें कि, किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार को अपना 32 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा था, जिसमें किसानों ने जमीन अधिग्रहण कानून में बदलाव की मांग की थी। किसानों का आरोप है कि राज्य सरकार ने एक कानून बनाकर भू—अर्जन केस में किसानों ने कोर्ट जाने का अधिकार वापस ले लिया था, जिसे सरकार द्वारा रद्द किए जाने की मांग की गई है। साथ ही किसानों ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश लागू करने की भी मांग की है। किसानों के अनुसार किसानों को फसल तैयार करने में जितनी लागत आती है, उसका डेढ़ गुना समर्थन मिलना चाहिए।

 

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