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ओडिशा-बंगाल में अम्फान तूफान का कहर, ममता बोलीं- बंगाल में कम से कम 10-12 लोग चढ़े तूफान की भेंट

ओडिशा-बंगाल में अम्फान तूफान का कहर, ममता बोलीं- बंगाल में कम से कम 10-12 लोग चढ़े तूफान की भेंट

कोलकाता: पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भयावह चक्रवात अम्फान ने तबाही मचाई है. पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने बताया कि बुधवार देर रात तक मिली जानकारी के मुताबिक कम से कम 12 लोगों की जान गई है. कई इलाकों में भारी तबाही हुई है. संचार व्यवस्था भी बुरी तरह से प्रभावित हुई है. सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में नहीं पहुंचने से इसका वास्तविक आकलन नहीं हो पाया है. उन्होंने कहा कि हम कोरोना महामारी से ज्यादा नुकसान तो इस चक्रवात के कारण झेल रहे हैं. 

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तूफान ने पश्चिम बंगाल और ओडिशा को झकझोर किया:
वहीं देर रात तक तेज बारिश और तूफानी हवाएं पश्चिम बंगाल और ओडिशा को झकझोरती रही. ऐसा अंधड़ बीते कई सालों में न किसी ने देखा न सुना गया. हवा की रफ्तार से ऐसा लग रहा था कि मानो सब कुछ तबाह हो जाएगा. तूफान की रफ्तार जब तक थमी, कोलकाता में सबकुछ उलट पुलट हो चुका था. बुधवार शाम के वक्त जब तूफान पूरे शबाब पर था. 

18 घंटे में श्रेणी-1 से श्रेणी-5 में बदला:
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार चक्रवाती तूफान अम्फान रिकॉर्ड 18 घंटे में श्रेणी-1 से श्रेणी-5 के सुपर साइक्लोनिक तूफान में बदल गया. अम्फान बीते 20 वर्षों में पूर्वी तट से टकराने वाला दूसरा सबसे शक्तिशाली तूफान है. इससे पहले 1999 में ओडिशा में आए तुफान ने भारी तबही मचाई थी और इसमें 15 हजार लोगों की जान गई थी.

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राहत और बचाव कार्य जारी:
तबाही का मंजर बंगाल में कई जगहों पर है, तूफान के गुजर जाने के बाद राहत टीमें टूटे पेड़ों को सड़कों से हटाने में जुटी हैं, लेकिन काम खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा. सड़कों पर पानी भरा होने के चलते राहत काम में और भी मुश्किल आ रही है.


 

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कृषि कानून के विरोध में धरने पर बैठे पंजाब के CM, राहुल गांधी ने बताया किसानों की मौत का फरमान

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नई दिल्ली: कृषि कानून के विरोध में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टम अमरिंदर सिंह शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती पर उनके जन्मस्थान खटकर कलां गांव में धरना  दे रहे हैं. उनके साथ मंत्री, विधायक और कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए हैं. धरना शुरू करने से पहले सीएम कैप्टम अमरिंदर सिंह ने भगत सिंह की प्रतिमा को श्रद्धांजलि दी.

विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी को 'दुर्भाग्यपूर्ण और निराशाजनक': 
इस दौरान उन्होंने कृषि विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी को 'दुर्भाग्यपूर्ण और निराशाजनक' बताया है. अमरिंदर सिंह ने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को संसद में अपनी चिंताएं जाहिर करने का मौका नहीं दिया गया. ऐसे में राष्ट्रपति की मंजूरी उन किसानों के लिए झटका है जो केंद्र के इन कानूनों के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं. इन कानूनों के लागू होने से पंजाब का कृषि क्षेत्र बर्बाद हो जाएगा. 

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राहुल गांधी ने बताया किसानों की मौत का फरमान: 
वहीं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कृषि कानून को किसानों के मौत का फरमान बताया है. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि नया कृषि कानून किसानों के लिए मौत का फरमान है. उनकी आवाज को संसद और संसद के बाहर दबाया जा रहा है. ये सबूत है कि देश में लोकतंत्र मर चुका है. 

कांग्रेस सांसद ने दी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: 
इससे पहले केरल से कांग्रेस सांसद टीएन प्रतापन ने कृषि अधिनियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. संसद द्वारा किसानों से जुड़े बिल को वापस लेने के लिए रिट याचिका दायर की गई है. सुप्रीम कोर्ट के समक्ष टीएन प्रतापन के वकील आशीष जॉर्ज, एडवोकेट जेम्स पी थॉमस और एडवोकेट सीआर रेखेश शर्मा पेश होंगे.

ट्रैक्टर में आग मामले में 5 लोगों को हिरासत में लिया:  
वहीं दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने इंडिया गेट के पास ट्रैक्टर में आग मामले में 5 लोगों को हिरासत में लिया है. इनकी पहचान मनजोत सिंह, रमन सिंह, राहुल, साहिब और सुमित के तौर पर हुई है. ये सभी पंजाब के हैं. उनसे पूछताछ की जा रही है एक गाड़ी भी बरामद हुई है.

SMS सहित राज्य के अन्य सरकारी अस्पतालों में भी क्यों ना शुरू हो कोरोना इलाज - हाईकोर्ट

SMS सहित राज्य के अन्य सरकारी अस्पतालों में भी क्यों ना शुरू हो कोरोना इलाज - हाईकोर्ट

जयपुर: राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसएमएस सहित विभिन्न जिलों के सरकारी अस्पतालों में कोरोना मरीजों का इलाज करने...कोरोना से जुड़े सभी टेस्ट और इलाज निशुल्क करने, राज्य के निजी अस्पतालों और होटलों को सरकार के नियत्रंण में लेने को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी किया है. मोहनसिंह की ओर से दायर जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति और जस्टिस प्रकाश गुप्ता की खण्डपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य के मुख्य सचिव, एसीएस चिकित्सा और एसएमएस अधीक्षक को नोटिस जारी किये है. याचिका में बीपीएल, गरीब और जरूरमंदों कोरोना मरीजों का निशुल्क इलाज करने की गुहार की गयी है. 

प्रदेश के कई स्थानों पर मरीजों को अस्पताल में बैड नहीं मिल रहे: 
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता समीर जैन ने अदालत को बताया कि देश और प्रदेश में लगातार कोरोना महामारी का प्रभाव बढ़ रहा है. राज्य में प्रतिदिन कोरोना संक्रमितों की संख्या कई गुना बढ़ रही है. प्रतिदिन बढ़ रहे कोरोना संक्रमितों के चलते जयपुर सहित प्रदेश के कई स्थानों पर मरीजों को अस्पताल में बैड नहीं मिल रहे हैं. राज्य के सबसे बड़े एसएमएस सहित कई जिलों के सरकारी अस्पतालों को सरकार ने कोरोना फ्री अस्पताल के लिए आरक्षित कर रखे हैं. जिसके चलते इन अस्पतालों में कोरोना मरीजों का इलाज नहीं किया जा रहा है. जबकि वर्तमान में बिगड़ते हालात के चलते सरकार को एसएमएस सहित राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में कोरोना मरीजों का इलाज शुरू किया जाना चाहिए. 

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सरकार को निजी होटलों को अपने नियत्रंण में लिया जाना चाहिए:
साथ ही सरकार को सभी निजी अस्पतालों को अपने अधीन नियत्रंण में लेकर युद्ध स्तर पर कार्य किया जाना चाहिए. आईसोलेशन के लिए भी सरकार को निजी होटलों को अपने नियत्रंण में लिया जाना चाहिए. याचिका में कहा गया कि निजी और सरकारी अस्पतालों में बैड की व्यवस्था नहीं होने से बीपीएल, गरीब और जरूरतमंदों लोग को होम आईसोलेशन में ही इलाज कराना पड़ रहा है जो उनके लिए संभव नहीं है. याचिका मे राज्यभर में कोरोना मरीजों की सहायता के लिए हैल्थ सेंटर बनाने की भी गुहार लगायी गयी है. बहस सुनने के बाद खण्डपीठ ने मुख्य सचिव सहित अन्य को नोटिस जारी कर 12 अक्टूबर तक जवाब पेश करने के आदेश दिये है. 

कांग्रेस सांसद ने सुप्रीम कोर्ट में कृषि अधिनियम को दी चुनौती, कानून वापस लेने की मांग

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नई दिल्ली: कृषि बिल के खिलाफ सड़क पर जारी प्रदर्शन का मसला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है. केरल से कांग्रेस सांसद टीएन प्रतापन ने कृषि अधिनियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. संसद द्वारा किसानों से जुड़े बिल को वापस लेने के लिए रिट याचिका दायर की गई है. सुप्रीम कोर्ट के समक्ष टीएन प्रतापन के वकील आशीष जॉर्ज, एडवोकेट जेम्स पी थॉमस और एडवोकेट सीआर रेखेश शर्मा पेश होंगे.

ट्रैक्टर में आग मामले में 5 लोगों को हिरासत में लिया:  
वहीं दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने इंडिया गेट के पास ट्रैक्टर में आग मामले में 5 लोगों को हिरासत में लिया है. इनकी पहचान मनजोत सिंह, रमन सिंह, राहुल, साहिब और सुमित के तौर पर हुई है. ये सभी पंजाब के हैं. उनसे पूछताछ की जा रही है एक गाड़ी भी बरामद हुई है.

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कर्नाटक में जदएस के कार्यकर्ताओं ने शिवमोगा में एक बाइक रैली निकाली:
कर्नाटक में भी आज कृषि बिल का विरोध देखने को मिल रहा है. कर्नाटक में जनता दल सेक्युलर (जदएस) के कार्यकर्ताओं ने शिवमोगा में एक बाइक रैली निकाली, उन्हें पुलिस ने लक्ष्मी थिएटर सर्कल पर रोक दिया. कृषि कानून, भूमि सुधार अध्यादेश, कृषि उपज मंडी समिति में संशोधन और श्रम कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों ने आज राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है. 

कृषि कानून के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी:
बता दें कि कृषि कानून के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी है. दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है. 

VIDEO: राजस्थान में खतरे में बघेरों की जान! आखिर कब जागेगा वन विभाग

जयपुर: प्रदेश में एक ओर जहां बघेरों का कुनबा बढ़ रहा है वहीं दूसरी ओर जंगल में भोजन के प्रोपर इंतजाम न होने से बघेरों की आबादी क्षेत्र में लगातार घुसपैठ बढ़ रही है, जोकि इनके लिए खतरनाक साबित हो रही है. जिम्मेदार बघेरों की समस्याओं से बेखबर है. वन विभाग के आंकड़े देखे तो राज्य में 8 साल में करीब दो दर्जन बघेरों को लोगों ने घेरकर मार दिया है. 

- प्रदेश भर में 600 से ज्यादा बघेरे हैं.

- 250 से ज्यादा सेंचुरी तो 300 से ज्यादा जंगल में कर रहे प्रवास.

- बीते 5 साल में 35 से 40 फीसदी बढ़ी संख्या.  

- वाहन की टक्कर, करंट या फंदा लगने, आपसी टकराव, लोगों ने घेरकर मारने, शिकार सहित कई वजह से बीते 8 साल में 300 से ज्यादा बघेरों की मौत हुई है. 

प्रदेशभर के फॉरेस्ट रिजर्व और जंगलों में बघेरों की आबादी पांच साल में 35 से 40 फीसदी तक बढ़ी है, लेकिन सरकार और अफसर ने इनके प्रे बेस यानी सुरक्षा, प्रवास और भोजन के इंतजाम ढंग से नहीं कर पा रहे हैं. जो इनके लिए काफी नुकसान दायक साबित हो रहा है. यह लेपर्ड टेरिटोरियल फाइट और भूख-प्यास से व्याकुल होकर आए दिन आबादी क्षेत्र में जा रहे है, जहां या तो इनको मार दिया जाता है या फिर शिकारियों के फंदे में फंस जाते हैं. अजमेर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, राजसमंद, प्रतापगढ़, उदयपुर समेत कई जिलों में इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही है. राजधानी से जुड़े जंगल में इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही है. जिसे रोकना विभाग के लिए चुनौती साबित हो रहा है. वन विभाग के अफसरों ने कई बार इनको लेकर मंथन भी किए, योजनाएं भी बनाई, लेकिन वो कभी फाइलों से बाहर ही नहीं निकल पाई. जिसका खामियाजा वन्यजीवों को भुगतना पड़ रहा है.  

बघेरों के लिए सौगात अधूरी ही रह गई: 
पिछली राज्य सरकार ने वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन और ट्यूरिज्म के रूप शुरू विकसित करने के लिए लेपर्ड प्रोजेक्ट की शुरूआत की. इसमें झालाना, बस्सी सीतामाता, खेतड़ी बांसिलायल, माउंटआबू और कुंभलगढ(रावली टॉडगढ) अभयारण्य को शामिल किया गया,,, यहां ग्रासलैंड, चारदीवारी, सुरक्षा, सर्विलांस समेत कई सुविधाएं विकसित करनी थी, लेकिन फंड नहीं मिलने से झालाना के अलावा कहीं भी काम पूरा नहीं हुआ. सरकार ने कोई रूचि भी नहीं दिखाई जिससे बघेरों के लिए सौगात अधूरी ही रह गई है.

झालाना जंगल में भी आए दिन बघेरे बेघर हो रहे: 
बघेरे के प्रवास से देशभर से ख्याति पा चुके झालाना जंगल में भी आए दिन बघेरे बेघर हो रहे हैं. यहां वर्चस्व की लड़ाई और भोजन की कमी है. जिससे आए दिन यहां से बघेरे जंगल से आबादी इलाकों में जा रहे हैं. 20 वर्ग किलोमीटर के इस जंगल में 30 बघेरे प्रवास कर रहे हैं. इस ओर भी जिम्मेदारों का ध्यान नहीं है. 

प्रे बेस की कमी लेपर्ड्स पर भारी पड़ रही:
जंगलात महकमें के अधिकारी भी मानते है कि प्रे बेस की कमी लेपर्ड्स पर भारी पड़ रही है. अब विभाग नए लेपर्ड रिजर्व तैयार करने के साथ ही जो फॉरेस्ट रिजर्व हैं उनमें प्रे बेस बढ़ाने की तैयारी कर रहा है. उम्मीद की जानी चाहिए कि जल्द ही लेपर्ड्स के लिए माकूल व्यवस्था करने में वन विभाग कामयाब होगा. 
 

प्रदेश कांग्रेस का पैदल मार्च हुआ स्थगित, अब दो ही नेता सौंपेंगे राज्यपाल को ज्ञापन

प्रदेश कांग्रेस का पैदल मार्च हुआ स्थगित, अब दो ही नेता सौंपेंगे राज्यपाल को ज्ञापन

जयपुर: कृषि अध्यादेशों के खिलाफ 24 सितंबर से शुरू हुए कांग्रेस के विरोध पखवाड़े के तहत आज प्रस्तावित पैदल मार्च अब स्थगित कर दिया गया है. यह पैदल मार्च कोरोना संक्रमण के कारण जयपुर में लगाई गई धारा 144 के चलते स्थगित किया गया है. 

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जयपुर में धारा 144 के चलते पैदल मार्च स्थगित किया गया:  
प्रदेश कांग्रेस ने ट्वीट करके इसकी जानकारी दी. पीसीसी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि जयपुर में धारा 144 के चलते पैदल मार्च स्थगित किया गया है. अब केवल दो ही नेता सोमवार दोपहर 12:30 बजे राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात कर उन्हें राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपेंगे. 

डोटासरा और सीएम गहलोत सौंप सकते हैं ज्ञापन:
बताया जा रहा है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राज्यपाल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंप सकते हैं. गौरतलब है कि केंद्र सरकार की ओर से लागू  किए गए कृषि अध्यादेश के खिलाफ कांग्रेस ने 24 सितंबर से 10 अक्टूबर तक विरोध पखवाड़ा शुरू किया है जिसके तहत 28 सितंबर को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय से राजभवन तक पैदल मार्च रखा गया था. 

VIDEO: राजस्थान पुलिस ने घूसखोरी में तोड़ा रिकॉर्ड, पिछले 4 सालों से नंबर 1 पर कायम

जयपुर: प्रदेश में इन दिनों एंटी करप्शन ब्यूरो बड़े बड़े घूसखोरो को सलाखों के पीछे पहुंचाती जा रही है. एसीबी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि घूसखोरी में राजस्थान पुलिस पिछले 4 सालों से  नंबर वन है. दूसरे नंबर पर राजस्व विभाग, तीसरे नंबर पर पंचायत विभाग में तैनात कर्मचारियों और अधिकारियो ने रिकॉर्ड बनाया है. प्रदेश की खाकी ही राजस्थान सरकार को शर्मसार कर रही है. ये सभी कार्रवाई एसीबी के डीजी डॉक्टर आलोक त्रिपाठी और एडीजी दिनेश एमएन लगातार भ्रष्टाचारियों पर एक से बढ़कर एक कार्रवाई करते हुए जा रहे हैं. 

पुलिस विभाग रिश्वत खोरी के धंधे में सबसे अव्वल: 
एसीबी की रिपोर्ट में एक बड़ा खुलासा हुआ है पुलिस विभाग रिश्वत खोरी के धंधे में सबसे अव्वल है तो राजस्व विभाग का इस पूरे मामले में नंबर दो पर है. स्वच्छ और बेदाग छवि के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लोगों के बीच भ्रष्टाचार मुक्त माहौल पैदा करने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं. वहीं दूसरी और शांति व्यवस्था स्थापित करने वाली पुलिस मुख्यमंत्री  की छवि को बदनाम करने में लगी है. हाल में ही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने एक रिपोर्ट तैयार की है. इसमें सामने आया है कि राजस्थान पुलिस के हाथ घूस की रकम से लाल-काले हुए हैं. आइये हम आपको बताते है घूसखोरी में किस विभाग का कौनसा नंबर है...

- घूसखोरी में राजस्थान पुलिस नंबर वन के रिकॉर्ड पर

- दूसरे नंबर पर राजस्व विभाग

- तीसरे नंबर पर पंचायत विभाग में तैनात कर्मचारियों और अधिकारियो ने रिकॉर्ड बनाया

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एसीबी डीजी आलोक त्रिपाठी के नेतृत्व में एसीबी की टीम लगातार बड़े बड़े घूसखोरों पर कार्रवाई करती जा रही है. एसीबी डीजी आलोक त्रिपाठी ने सभी चौकी प्रभारियों को फ्री हेंड छोड़ रखा है. जिसके चलते एसीबी की टीम लगातार ताबड़तोड़ कार्रवाई करती जा है. एसीबी ने बजरी में लिप्त पुलिसकर्मियों पर भी शिकंजा कसा है. एसीबी ने अवैध वसूली करने वालों पर भी बड़ी कार्रवाई की है. एसीबी ने  कई बड़े अधिकारियो को रंगें हाथों गिरफ्तार किया है और काला धन इकट्ठा कर अकूत संपत्ति बनाने वाले अधिकारियों को भी सलाखों के पीछे पहुंचाया है. आइये अब आकड़ो के हिसाब से समझते है ट्रैप की कार्रवाइयों को...

- एसीबी ने पुलिस विभाग में पिछले 4 सालों में 263 पुलिसकर्मियों को रिश्वत लेते ट्रैप किया

- राजस्व विभाग में पिछले 4 सालो में 171 कर्मचारियों अधिकारियो को ट्रैप किया

- ऊर्जा विभाग में पिछले 4 सालो में 84 अधिकारी-कर्मचारियों को ट्रैप किया

- मेडिकल विभाग में पिछले 4 सालो में 52 अधिकारी-कर्मचारियों को ट्रैप किया

- पंचायत विभाग में पिछले 4 सालो में  115 अधिकारी-कर्मचारियों को ट्रैप किया

एसीबी लगातार बजरी में लिप्त पुलिस कर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई करती जा रही है. एसीबी के आकड़े जारी करने के बाद ये साबित हो गया है की एसीबी कार्रवाई के बाद पुलिस का भ्रस्टाचार उजागर हुआ है. 

योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला, अब संस्कृत में भी जारी होगी सरकार की विज्ञप्ति

योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला, अब संस्कृत में भी जारी होगी सरकार की विज्ञप्ति

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा फैसला किया है. योगी सरकार ने हिंदी के साथ ही सभी सरकारी सूचनाएं संस्कृत भाषा में जारी करने का फैसला किया है. इसी क्रम में रविवार को कोविड-19 की समीक्षा बैठक का प्रेस नोट हिंदी के साथ ही संस्कृत भाषा में जारी किया गया. 

चार भाषाओं में प्रकाशित होगा कामकाज: 
ऐसे में अब योगी सरकार का सूचना विभाग अब चार भाषाओं में अपने कामकाज को प्रकाशित करेगा. उत्तर प्रदेश में सरकार सूचना विभाग के कामकाज को हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी भाषा के अलावा संस्कृत में भी प्रकाशित करेगी.

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संस्कृत की एक टीम ने काम करना शुरू भी कर दिया:
इसकी शुरुआत करते हुए संस्कृत की एक टीम ने काम करना शुरू भी कर दिया है. सरकार के मुताबिक यह फैसला संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए लिया गया है. साथ ही संस्कृत प्रेमियों की मांग को देखते हुए ये कदम उठाया गया है.

संस्कृत भाषा के उत्थान लिए कई बार सार्वजनिक रूप से बोल चुके: 
इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संस्कृत भाषा के लिए उत्थान और विकास के लिए कई बार सार्वजनिक रूप से बोल चुके हैं. अब सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस बारे में फैसला लिया है. सीएम योगी आदित्यनाथ का संस्कृत प्रेम किसी से छिपा नहीं है. 


 

कृषि बिल पर बवाल जारी, दिल्ली में संसद भवन के पास किसानों ने लगाई ट्रैक्टर में आग

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नई दिल्ली: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तीन कृषि बिलों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, यानी अब ये कानून बन चुके हैं. ऐसे में आज भी देश के कई हिस्सों में बिल के खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है. इसके साथ ही प्रदर्शन की आग देश की राजधानी दिल्ली तक भी पहुंच गई है. आज सुबह दिल्ली में किसानों ने राजपथ के पास एक ट्रैक्टर में आग लगा दी. ये लोग ट्रैक्टर को इंडिया गेट के पास लाकर प्रदर्शन कर रहे थे. मौके पर दिल्ली पुलिस और फायर ब्रिगेड ने पहुंच कर आग पर काबू पाया.  

वीआईपी इलाकों में धारा 144 लागू: 
हालांकि दिल्ली में इंडिया गेट और आस पास के वीआईपी इलाकों में धारा 144 लागू है और कोरोना वायरस के मद्देनजर लोगों को इकट्ठा होने की इजाजत नहीं है.प्रदर्शनकारियों को इक्कठा होने नहीं दिया गया. दूसरी ओर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह आज धरने पर भी बैठेंगे. 

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पंजाब में किसानों और सियासी दलों का विरोध और तेज: 
इसके साथ ही पंजाब में किसानों और सियासी दलों का विरोध और तेज हो रहा है. किसान संगठनों ने पंजाब में रेल रोको प्रदर्शन 29 सितंबर तक बढ़ा दिया है. बिल के खिलाफ अकाली दल जगह-जगह रैली कर रहा है.

कर्नाटक में भी आज किसानों ने फिर राज्य बंद बुलाया:
वहीं कर्नाटक में भी आज किसानों ने फिर राज्य बंद बुलाया है. कृषि बिल के विरोध में राज्य के किसानों ने ये बंद बुलाया है, इस दौरान सोमवार सुबह शिवमोगा में ट्रैफिक सामान्य दिखा.