10% सवर्ण आरक्षण को लेकर लोकसभा में बहस जारी

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/01/08 05:53

नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र का आज 17वां एवं आखिरी दिन है और मंगलवार को लोकसभा में आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल पेश किया गया। लोकसभा में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों के लिए पेश होने वाले बिल को प्रस्तुत किया। इस बिल पर फिलहाल सदन में बहस जारी है और सरकार की कोशिश है कि आज ही इसे सदन से पास करा लिया जाए।

आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण दिए जाने के फैसले को कल हुई मोदी बैबिनेट की बैठ​​क में मंजूरी मिलने के बाद इस बिल को आज लोकसभा में रखा गया। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि एससी-एसटी आरक्षण व्यवस्था को छेड़ा नहीं जाएगा और सरकारी मदद नहीं लेने वालों को आरक्षण देना होगा। सरकार के मुताबिक देश की एक बड़ी आबादी को इस आरक्षण बिल से लाभ मिलेगा। थावरचंद गहलोत ने कहा कि यह आरक्षण निजी संस्थानों में भी लागू होगा और राज्य सरकार को यह तय करना होगा कि कौन सवर्ण गरीब है।

लोकसभा में बिल पेश किए जाने के बाद इस बिल पर बहस के दौरान वित्त मंत्री अरूण जेटली ने आरक्षण के मुद्दे पर कहा कि अब तक सही रास्ते में प्रयास नहीं हुआ, आरक्षण के मुद्दे पर राज्यों के पास जाने की जरूरत नहीं है। आरक्षण की कोशिश सभी पार्टियों ने की, वहीं जुमले की शुरुआत विपक्ष ने की थी। बिल के जरिए बराबरी लाने की कोशिश की जा रही है, जिसका लाभ प्राइवेट संस्थानों में भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सहायता देने की कोशिश है। जेटली ने कहा कि हमें हर नागरिक को सामान्य अवसर देने की कोशिश करना चाहिए।

इसके बाद कांग्रेस नेता केवी थोमस ने कहा कि हम इस कोटा बिल का समर्थन करते हैं, हम इसके खिलाफ नहीं हैं। लेकिन जिस तरीके से यह बिल लाया जा रहा है, वह सवाल खड़े करता है। मेरा निवेदन है कि इस बिल को पहल जेपीसी के समक्ष भेजा जाए। वहीं AIADMK नेता एम थंबीदुरई ने लोकसभा में सवाल किया कि क्या सभी सरकारी योजनाएं विफल हो गई हैं? बहुत सारी योजनाएं हैं। साथ ही उन्होंने बीजेपी को चुनौती देते हुए कहा कि आपके इस बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। AIADMK ने आरक्षण की सीमा को बढ़ाकर 70 प्रतिशत करने की मांग की है। थंबीदुरई ने कहा कि संविधान संशोधन लाएं। 9वीं अनुसूची की बचाव एक स्थाई उपाय नहीं है।

इसी प्रकार से तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने लोकसभा में सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि सरकार इस कोटा बिल की तरह ही महिला आरक्षण बिल को प्राथमिकता के साथ क्यों नहीं लेती है? यह बिल केवल नौकरियों के बारे में ही नहीं है, बल्कि झूठी आशाओं और नकली सपनों के साथ युवाओं को गुमराह करने के बारे में भी है।

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