सरकार की उम्मीदों पर खरा उतरा शराब की दुकान खोलने का निर्णय, राजस्थान में करीब 1000 करोड़ रुपए की शराब बिकी

सरकार की उम्मीदों पर खरा उतरा शराब की दुकान खोलने का निर्णय, राजस्थान में करीब 1000 करोड़ रुपए की शराब बिकी

जयपुर: राज्य सरकार ने जिस उम्मीद से लॉक डाउन में शराब की दुकान खोलने का जो साहसिक निर्णय लिया था 1 महीने में ही यह निर्णय सरकार की उम्मीदों पर खरा उतरा है. इस 1 महीने की अवधि में प्रदेश में करीब 1000 करोड़ रुपए की शराब बिकी है जिससे सरकार को करीब 400 करोड़ रुपए आबकारी राजस्व के तौर पर मिला है. 

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शराब की दुकान खोलने को लेकर सरकार को आलोचना भी झेलनी पड़ी: 
लॉक डॉन में शराब की दुकान खोलने को लेकर सरकार को आलोचना भी झेलनी पड़ी थी और शुरुआती 2 दिन में जिस तरह से लोग शराब खरीदने के लिए शराब के ठेकों पर टूटकर पड़े उससे भी एक बार सरकार के इस निर्णय को लेकर अलग अलग राय सामने आई थी. कोरोना संकट के चलते केंद्र और राज्य सरकार ने लॉक डाउन की घोषणा की थी इसके बाद प्रदेश में 23 अप्रैल को सभी शराब की दुकानों को तुरंत प्रभाव से बंद कर दिया गया था. लॉक डाउन की अवधि में केंद्र से अपेक्षित मदद न मिलने और राज्य के सभी आर्थिक संसाधन अवरुद्ध हो जाने से सरकार शराब की दुकान खोलने को लेकर पसोपेश में थी. इस दौरान मार्च के अंत में यानी 31 मार्च को वर्ष 2019-20 का आबकारी बंदोबस्त भी समाप्त हो चुका था. 

नए लाइसेंसी भी लाइसेंस फीस जमा कराने से कतरा रहे थे:
अचानक लॉक डाउन में शराब दुकान बंद होने से वित्त वर्ष के अंतिम 8 दिनों में पुराने अनुज्ञाधारियों को भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था. सरकार के सामने चुनौती थी कि 1 अप्रैल से शुरू हुए नए वित्त वर्ष में कैसे नए आबकारी बंदोबस्त को लागू किया जाए. इस दौरान जो सबसे बड़ी समस्या थी वह यह थी कि पुराने अनुज्ञाधारियों से वित्तीय सेटलमेंट भी करना था और नए अनुज्ञाधारियों से लाइसेंस फीस जमा कराने की भी बड़ी चुनौती थी. दरअसल लॉक डाउन के चलते नए लाइसेंसी भी लाइसेंस फीस जमा कराने से कतरा रहे थे. ऐसे में वित्त विभाग के एसीएस निरंजन आर्य, एसएसआर डॉ पृथ्वी और आबकारी आयुक्त बीसी मलिक ने अपनी पूरी टीम के साथ कड़ी मशक्कत की और अधिकतर अनुज्ञाधारियों से लाइसेंस फीस जमा करवाने में सफल रहे. हालांकि अभी भी प्रदेश की होटल, क्लब और resto-bar बंद हैं जिनकी संख्या करीब 1000 है. इनमें से चार सौ से ज्यादा होटल, क्लब और resto-bar ने अभी तक अपने लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं करवाया है. बहरहाल तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए आबकारी विभाग ने अंग्रेजी और देसी शराब के अनुज्ञाधारियों से फीस वसूल कर ली.

करीब 41 दिन बंद रखने के बाद 4 मई को खोली शराब की दुकान:
अब चुनौती इस बात की थी की लॉक डाउन के दौरान शराब दुकानों को कैसे और कब खोला जाए ? लॉक डाउन में करीब 41 दिन बंद रखने के बाद आखिर 4 मई को प्रदेश में शराब दुकानों को खोल दिया गया. इसके लिए बाकायदा गाइडलाइन जारी की गई. सीधे तौर पर अनुज्ञाधारियों को कहा गया कि वे अपनी दुकान पर बैरिकेडिंग कराएं, सोशियल डिस्पेंसिंग की सख्ती से पालना करें, मास्क, दस्ताने, सैनिटाइजर का उपयोग हो और समय सीमा को भी सुबह 10 बजे से रात्रि 8 बजे के स्थान पर सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक ही रखा गया. 4 मई को जैसे ही शराब दुकानों को खोला गया सुरा प्रेमियों का धैर्य का बांध मानो टूट गया और ऐसा महसूस हुआ जैसे उन्होंने शराब दुकानों पर धावा बोल दिया हो. पहले ही दिन आरएसबीसीएल और गंगानगर शुगर मिल के डिपो से करीब 74 करोड रूपए की शराब बेची गई. इसके अगले दिन 59 करोड़ फिर 65 करोड़ की शराब बिकी. पिछले 1 महीने में प्रदेश में करीब 1000 करोड रुपए की अंग्रेजी व देशी शराब लिखी है.

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अब करीब 20 करोड़ से 25 करोड़ रुपए औसतन रोजाना की शराब बिक रही:
इसके बाद स्थिति सामान्य हुई और अब करीब 20 करोड़ से 25 करोड़ रुपए औसतन रोजाना की शराब बिक रही है. गर्मी के चलते वैसे भी इस समय शराब की बिक्री ज्यादा होती है लेकिन पर्यटन स्थल बंद होने से और विदेशी पर्यटकों की आवक लगभग बंद होने से अपेक्षित बिक्री नहीं हो पा रही है. सरकार को शराब दुकान खोलने के 1 महीने के अंदर ही करीब 400 करोड रुपए आबकारी शुल्क के तौर पर राजस्व मिला है. 3 दिन पहले ही राज्य सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर अंग्रेजी व देशी शराब पर प्राकृतिक आपदाओं और मानव निर्मित आपदाओं से निपटने के लिए ₹5 से लेकर ₹30 तक सर चार्ज भी लगाया है. वैसे भी राज्य सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए 12500 करोड रुपए का आबकारी राजस्व का लक्ष्य रखा है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में शराब की बिक्री तो बढ़ेगी ही सरकार के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी. 

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