कंप्यूटर के युग में इस काम के लिए आज भी कायम है कलम-दवात का दबदबा

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/11/06 11:14

झालावाड़। दिन बदले, जमाने बदले, बदल गया इंसान, नहीं बदली तो पुरानी परंपराएं, जो आज भी जारी है। दीपावली की पूजा के बाद आज भी कई व्यापारी बही—खाता हिसाब—किताब  कलम पेरू से करते हैं। भले ही देश 21वीं सदी में जी रहा है और टेक्नोलॉजी व कंप्यूटर का युग है, जिसमें हर कार्य चंद मिनटों में हो जाता है। फिर भी कई लोग हैं, जो आज भी अपनी पुरानी परम्पराओं का निर्वाह कर रहे हैं।

कई बुजुर्गों का मानना है कि जितने भी ऋषि-मुनियों ने जितने भी ग्रंथ लिखे, वो सभी कलम—दवात से लिखे गए, जो अमिट है और उनकी लिखावट आज भी वैसी ही है। जिन्हें आज की पीढ़ी देखकर चौक जाती है कि कितना बदल गया जमाना। आज से 20 से 25 वर्ष पहले जब बच्चे स्कूल में जाते थे, उनके गुरुजी हैंड राइटिंग सुधारने के लिए छात्र-छात्राओं से कलम—दवात का प्रयोग करने के लिए कहते थे, जिससे राइटिंग सही क्रमबद्ध हो, लेकिन अब जमाना बदल गया है।

कंप्यूटर युग में हर आदमी जल्दी में और जल्द से जल्द अपना कार्य करना चाहता है। ऐसे में आज के युवा पुरानी परम्परा को भूल से गये हैं। इस खबर से हमारा उद्देश्य भी यही है कि जो आजकल की पीढी है, वो देखे जाने की पुराने समय में किस तरह कलम—दवात का उपयोग होता था।

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in

मौसम का मिजाज फिर बदलेगा 21 को मावठ की संभावना

बीकानेर : ट्रेलर से टकराई कार, 4 लोगों की मौत
2025 में RSS बनाएगा राम मंदिर !
जनरल के बाद अब मोदी का OBC पर \'फोकस\'
अब \'झाँसी की रानी\' का विरोध !
लोकसभा चुनाव का ऐलान मार्च के पहले हफ्ते में !
Big Fight Live हाज़िरजवाब \'सरकार\'... आज की बड़ी बहस |18 JAN, 2018
कंगना को करनी सेना का खुला चैलेंज
loading...
">
loading...