चुनावी वर्ष में सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट की राह में जेडीए बना अड़ंगा

Naresh Sharma Published Date 2018/07/26 16:25

जयपुर। एनएचएआई से अग्रिम 200 करोड़ रुपए लेने के बाद भी जेडीए ने करार शर्तों के मुताबिक जमीन मुहैया नहीं कराई है। जिससे रिंग रोड प्रोजेक्ट का औचित्य ही समाप्त होता जा रहा है। 

गौरतलब है कि राज्य सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट जयपुर रिंग रोड को लेकर समस्याएं खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। जेडीए की नाकामी के बाद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की पहल पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एनएचएआई को इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के निर्देश दिए। इसके बाद एनएचएआई और जेडीए के बीच करार हुआ और यह तय किया गया कि रिंग रोड को 18 महीने में पूर्ण कर लिया जाएगा। एनएचएआई ने 47 किलोमीटर लंबे रिंग रोड के लिए 860 करोड रुपए के टेंडर जारी किए और हरियाणा की कंपनी टावर को रिंग रोड बनाने का काम सौंपा गया। इसी बीच सीएम राजे की एनएचएआई के अधिकारियों के साथ मीटिंग हुई और मीटिंग में तय किया गया की रिंग रोड को तय समय सीमा से पहले ही पूरा कर लिया जाए।

दरअसल यह चुनावी वर्ष है और सरकार चाहती है की दिसंबर से पहले रिंग रोड का काम पूरा हो जाए तो उसको कहीं ना कहीं पॉलिटिकल माइलेज इस प्रोजेक्ट से मिलेगा। एनएचएआई ने भी सीएम राजे की बात को मानते हुए निर्माण कंपनी गावर को काम में तेजी लाने को कहा और गावर ने 47 किलो मीटर लंबी स्ट्रेच के काम को आधे से ज्यादा पूरा भी कर लिया है। जिस तेजी से काम हो रहा है उससे तय है कि नवंबर अंत तक रिंग रोड का काम पूरा हो जाएगा। लेकिन रिंग रोड के लिए अजमेर रोड, आगरा रोड और टोंक रोड को एक दूसरे से कनेक्ट करने के लिए तीन बड़े क्लोवर लीफ बनाने थे जिससे कि तीनों रोड आपस में जुड़ जाएं और निर्बाध ट्रैफिक चल सके। लेकिन कुछ पेट्रोल पंप इस अलाइनमेंट में आ रहे थे जिसके चलते जेडीए यहां जमीन नहीं दे सका। काफी दबाव के बाद जेडीए ने एनएचएआई के साथ रिवाइज्ड एमओयू किया।

इस एमओयू के तहत एनएचएआई ने 25 जून को ही जेडीए को 200 करोड़ रुपए अग्रिम दे दिए और जेडीए ने भी 30 दिन में इसके लिए जमीन मुहैया कराने का करार किया। लेकिन इस अवधि के गुजरने के बाद भी जेडीए ने एनएचएआई को जमीन नहीं दी है। इसका सीधा मतलब है कि रिंग रोड तो नवंबर में बन जाएगा लेकिन क्लोवर लीफ नहीं बनने से इसका औचित्य नहीं रहेगा। उधर जेडीए की लापरवाही को लेकर एनएचएआई ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, यूडीएच मंत्री श्रीचंद कृपलानी व संबंधित अधिकारियों को कहा है, लेकिन अभी जेडीए ने एनएचएआई को जमीन नहीं दी है। इधर एनएचएआई ने 3 क्लोवर लीफ का डिजाइन तैयार कर रखा है और 260 करोड़ रुपए के टेंडर डॉक्यूमेंट को भी फाइनल कर दिया है। लेकिन जमीन नहीं मिलने से टेंडर नहीं हो सके हैं। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि चुनावी वर्ष में सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट में जेडीए का अड़ंगा सरकार को भारी पड़ सकता है।

 

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