किसान कर्जमाफी से मध्यप्रदेश के बाद राजस्थान पर होगा दूसरा सबसे बड़ा अतिरिक्त भार

Pawan Tailor Published Date 2018/12/19 09:23

जयपुर। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा की गई किसानों की कर्जमाफी की घोषणा पर अमल करते हुए मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार के शपथ ग्रहण के तुरंत बाद किेसानों की कर्जमाफी का ऐलान किया जा चुका है। इसी कड़ी में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बाद आज राजस्थान में भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने किसानों की कर्जमाफी की घोषणा कर दी है। राजस्थान में भी किसानों का 2 लाख रुपए तक का कर्जा माफ होगा, जिससे राज्य सरकार पर 18 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार होगा। खास बात यह है कि किसान ​कर्जमाफी से मध्यप्रदेश के बाद राजस्थान पर दूसरा सबसे बड़ा अतिरिक्त वित्तीय भार होगा।

राजस्थान में कांग्रेस की नई सरकार में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज सीएमओ में किसानों की कर्जमाफी समेत कई मामलों को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा की और इसके बाद देर शाम को प्रदेश के किसानों की कर्ज माफी का ऐलान कर दिया है। इसके तहत प्रदेश के किसानों का 2 लाख तक का कर्जा माफ किया जाएगा। इसमें कॉपरेटिव बैंक, राष्ट्रीयकृत, कॉमर्शियल और ग्रामीण बैंकों में 30 नवंबर तक के डिफॉल्टर का कर्जा माफ होगा। ऐसे में कर्जमाफी से राज्य सरकार पर 18 हजार करोड़ का अतिरिक्त भार आएगा।

सबसे बड़ा अतिरिक्त भार मध्यप्रदेश पर :
कांग्रेस अध्यक्ष की घोषणा के बाद सबसे पहले किसानों की कर्जमाफी की घोषणा मध्यप्रदेश में की गई, जहां शपथ ग्रहण के बाद ही मुख्‍यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश के किसानों का 2 लाख रुपए तक का कर्जा माफ करने का ऐलान किया। मुख्‍यमंत्री कमलनाथ की इस घोषणा से 33 लाख किसानों को फायदा होगा, वहीं सरकार पर 20 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार आएगा। ऐसे में किसान कर्जमाफी से पड़ने वाला सबसे बड़ा अतिरिक्त वित्तीय भार मध्यप्रदेश सरकार पर ही होगा।

और राजस्थान के ये हैं आंकड़े :
सहकारिता विभाग की मानें तो 50 हजार रुपए तक के ऋणधारी किसानों की संख्या 16 लाख, 50 हजार से 1.50 लाख तक के ऋणधारी किसानों की संख्या 8 लाख और इससे ऊपर 3 लाख के ऋणधारी किसानों की संख्या 1 लाख से ज्यादा है। कुल ऋणधारी किसानों की संख्या करीब 23 लाख है। बीजेपी सरकार में जिन 30 लाख किसानों के 50 हजार रुपए तक के ऋण माफ किए थे, उनकी संख्या इसमें शामिल नहीं है। मार्च 2018 में आई बैंक कमेटी की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि राजस्थान के 59 लाख किसानों ने बैंकों से कर्ज लिया हुआ है। इनमें से करीब 26 लाख किसानों ने को-ऑपरेटिव और क्षेत्रीय बैंकों से और 24 लाख किसानों ने राष्ट्रीय बैंकों से और बचे हुए किसानों ने विभिन्न कमर्शियल बैंकों से कर्ज लिया हुआ है। एक अनुमान के मुताबिक राजस्थान सरकार को शुरुआती तौर पर फिलहाल किसानों का कर्ज माफ करने के लिए 18 हजार करोड़ रुपए की जरुरत है।

छत्तीसगढ़ में किेसानों की कर्जमाफी से अतिरिक्त भार :
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पत्रकारों को बताया कि 30 नवंबर 2018 की स्थिति के अनुसार सहकारी बैंक व छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक में कृषकों के अल्पकालीन ऋण को माफ किया जाएगा। इससे 16 लाख 65 हजार से ज्यादा किसानों का 6100 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज माफ होगा। ऐसे में राज्य सरकार पर 6 हजार 100 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय भार होगा।

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