बरसात की प्रार्थना के लिए किसान गाते है तेजा गायन 

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/07/18 01:05

डीडवाना (नागौर)। प्रदेश में लोक देवता वीर तेजाजी महाराज की वीर गाथाओं को आज भी ग्रामीण अंचल में बड़े ही दिलचस्प अंदाज में गाया जाता है, जिसे तेजा गायन कहलाता है। 10वीं शताब्दी से गाई जा रही तेजाजी महाराज की इस वीर गाथा को प्रदेश के हर हिस्से में अलग-अलग अंदाज से गाया जाता है । तेजा गायन से जुड़े लोगों के मानना है की जिस तरह विदेशों में संगीत की ओपेरा शैली अपने अलग अंदाज से विशिष्ट स्थान रखती वैसे ही राजस्थान का तेजा गायन भी एक अलग ही तरह का गायन है।

तेजा गायन को किसान गीत के रूप में माना गया है, किसानों का इससे प्यार और खेती से जुड़ा कोई दूसरा गीत नहीं है। तेजाजी महाराज को लोक देवता के रूप में जाना जाता है जिन्होंने दूसरों की भलाई और सत्यवादिता के लिए अपने आपको कुर्बान कर दिया । गांव-गांव में लोक देवता तेजाजी महाराज की मूर्तियां और देवळीया लगी हुई है। तेजा गायन तेजाजी महाराज की वीर गाथा ही है जिसकों तेजा गायक अलग अलग संवाद के माध्यम से गाते है। 

तेजाजी किसानों के लोक देवता है और जब बारिश नहीं होती तो किसान खेतों में तेजा गायन गाकर तेजाजी से बरसात के लिए आह्वान करते है। डीडवाना के पालोट गांव में किसान इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए तेजा गायन गाते है। यहां तेजाजी महाराज के मंदिर में हर साल तेजा गायन का आयोजन होता है और गांव में अच्छी बरसात की कामना किसानों द्वारा की जाती है। प्रदेश भर में गाया जाने वाला तेजा गायन भी राग मेघ मल्हार से ताल्लुक रखता है । क्योंकि राग मेघ मल्हार में भी कवि और गीतकार भगवान इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए गाते है। वहीं किसान भी तेजाजी का आह्वान कर भगवान इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए समूह में तेजा गायन गाते है। 

हालांकि लोक कलाओं की तरह तेजा गायन की भी सरकार की ओर से कभी कोई कद्र नहीं की गई है लेकिन कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने जरूर तेजा गायन की लोकप्रियता को सराहा है और उसे अपने सिलेबस में तेजा गायन के नाम से एक चैप्टर भी रखा है।  900 साल से प्रदेश के किसान वर्ग में जोश और ऊर्जा का संचार करने वाले तेजा गायन को बरसात के लिए भगवान को खुश करने वाला गायन भी माना जाता है । इस नायाब और अनोखी कला की आने वाली पीढियां कितनी कद्र करेगी ये तो भविष्य की बात है मगर इस दौर में तो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी तेजा के रंग में रंगे है।

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