सिंचाई-पानी के लिए जूझते किसान, हर बार टूटती उम्मीदें, किस पर करें विश्वास

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/10/20 11:51

सादुलशहर। चुनावों के वक्त जगी लोगों की उम्मीदें बाद में अक्सर टूट जाती हैं। राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले की जनता की भी यही कहानी है। खास बात यह है कि वे अपने नेताओं से कोई आसमान के सितारे नहीं मांगते, बल्कि उनकी चाह बस इतनी है कि उनकी और उनके खेतों की प्यास बुझ जाए। लेकिन अफसोस की बात है कि सरकारें उनकी इस बुनियादी जरूरत को भी पूरा नहीं कर पाई हैं।

श्रीगंगानगर जिले की जीवन-रेखा मानी जाने वाली यह नहर अब यहां के खेतों की प्यास नहीं बुझा पा रही है। सिंचाई तो अलग, दरअसल यहां के लोगों को अब लगातार पीने के पानी की भी किल्लत झेलनी पड़ रही है। यहां के लोगों की शिकायत है कि राजस्थान में सरकारें बदलती हैं, लेकिन उनकी ये बुनियादी दिक्कत दूर नहीं होती। गुजरे सालों में पानी के मुद्दे पर कई आंदोलन हुए, जिनमें कुछ किसानों की जान भी गई, मगर पानी के लिए उनकी जद्दोजहद आज भी जारी है।

अब जबकि खेतों में कपास, गन्ने और मूंग की फसलें अपने हिस्से के पानी के इंतजार में खड़ी हैं, राज्य में चुनावी माहौल गरमा गया है। कांग्रेस पानी की कमी को मुद्दा बनाकर सत्ताधारी बीजेपी को घेरने की कोशिश में है, जबकि बीजेपी इस इलाके की मुसीबत का ठीकरा पंजाब की कांग्रेस सरकार पर फोड़ रही है। बता दें कि श्रीगंगानगर जिले की उत्तरी सरहद पंजाब से लगी हुई है और इंदिरा गांधी नहर भी पंजाब से राजस्थान पहुंचती है। ऐसे में पंजाब इसमें कितना पानी छोड़ता है, इसको लेकर विवाद चलता रहा है।
 
पानी का मुद्दा यहां के लोगों से किस हद तक जुड़ा हुआ है, इसकी एक मिसाल यह है कि पहले यहां कोई आधार न रखने वाली सीपीएम ने पानी के सवाल पर संघर्ष कर 2008 में अनूपगढ़ की सीट जीती थी। 2013 में बीजेपी उम्मीदवारों ने नहर तंत्र को मजबूत करने और इंदिरा गांधी नहर का पुनरुद्धार करने का वादा किया, तब भी लोगों ने उस पर यकीन किया। ऐसे में साफ है कि पानी के मुद्दे को लेकर प्रतिक्रिया मतदाताओं पर असर डालती नजर आती है।

ये हैंं जिले के हालात :
— श्रीगंगानगर जिले में तकरीबन साढ़े तेरह लाख मतदाता।
— इनमें से एक तिहाई खेती-किसानी से जुड़े हैं।
— उन्हें पानी की कमी की दोहरी मार झेलनी पड़ती है।
— वैसे बाकी आबादी के सामने भी पीने के पानी की समस्या है।
— इस जिले में विधानसभा की कुल छह सीटें हैं।

बहरहाल, ऐसे में यह तो साफ है कि इस चुनाव में श्रीगंगानगर जिले में एक बड़ा मुद्दा पानी की कमी है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या इस बार यहां के लोगों के मतदान से इस मसले का कोई हल निकल पाएगा।

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