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किसानों को खजूर उत्पादन के लिए मिलेगा दो बार अनुदान, 12 जिलों के अधिकारी देंगे जानकारी

किसानों को खजूर उत्पादन के लिए मिलेगा दो बार अनुदान,  12 जिलों के अधिकारी  देंगे जानकारी

जैसलमेर: जिले के किसानों के लिए राजस्थान सरकार के उद्यान आयुक्तालय द्वारा खजूर के उत्पादन के लिए अनुदान दिया जा रहा है. गौरतलब है कि खजूर के पौधे को कम पानी की आवश्यकता होती है. वहीं जैसलमेर की जमीन भी खजूर उत्पादन के लिए सर्वश्रेष्ठ है. इसका उदाहरण भोजका के पास खजूर फॉर्म है. इसमे सैकड़ों की तादाद में पौधे लगे हुए हैं. वहीं हर साल अच्छी संख्या में खजूर का उत्पादन भी होता है. जिस पर उद्यान आयुक्तालय द्वारा खजूर के पौधे के साथ ही उसकी बुवाई के लिए भी किसानों को अनुदान दिया जा रहा है, ताकि इस मरुस्थलीय क्षेत्र में खजूर की पैदावार बढ़े व किसानों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो.  

किसानों के खेतों पर खजूर पौधरोपण कार्यक्रम चलाया जाएगा: 
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत किसानों के खेतों पर खजूर पौधरोपण कार्यक्रम चलाया जाएगा. जिसमें टिश्यू कल्चर तकनीक के माध्यम से खजूर का उत्पादन किया जाएगा. इसके तहत जैसलमेर को 5 हैक्टेयर के साथ ही 15 लाख 62 हजार रुपए का लक्ष्य दिया गया है. उद्यान विभाग के जोधपुर उपनिदेशक जैसलमेर के भोजका गांव स्थित खजूर फॉर्म पर प्रदेश के जोधपुर, बीकानेर, चुरू, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, नागौर, बाड़मेर, जालोर, पाली, सिरोही, झुंझुनूं व जैसलमेर के अधिकारियों को भ्रमण करवाकर तकनीकी जानकारी उपलब्ध करवाएंगे. उद्यान विभाग द्वारा प्राप्त आवेदनों में से पहले आओ पहले पाओ के आधार पर ही प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति जारी की जाएगी. जिस पर पहले आने वाले किसान को पहले प्राथमिकता देने के साथ ही लाभ दिया जाएगा.

एक हैक्टेयर में खजूर के 156 पौधे लगाए जाएंगे:
वहीं लक्ष्य की पूर्ति होने के बाद आए आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा. उद्यान आयुक्तालय द्वारा प्राप्त दिशा निर्देशों के अनुसार एक किसान को कम से कम आधे हैक्टेयर व ज्यादा से ज्यादा 4 हैक्टेयर के लिए पौधे उपलब्ध करवाकर अनुदान दिया जाएगा. इसके साथ ही एक हैक्टेयर में खजूर के 156 पौधे लगाए जाएंगे. जिसमें 148 मादा व 8 नर पौधे उपलब्ध करवाएं जाएंगे. उद्यान आयुक्तालय द्वारा खजूर की खेती करने वाले किसान को पहले पौधों पर एकमुश्त तथा दूसरी बार पौधे के जीवित रहने पर अनुदान दिया जाएगा. किसानों को सबसे पहले खजूर पौधे के खरीद कीमत का 75 प्रतिशत या अधिकतम 1950 रुपए प्रति पौधा अनुदान दिया जाएगा. इसके बाद प्रत्येक कृषक को 8250 रुपए पौधे के रखरखाव के लिए दो किश्तों में दिए जाएंगे. पहले साल पौधरोपण के तीस दिन में भौतिक सत्यापन कर 4950 रुपए व दूसरे साल 75 प्रतिशत पौधे जीवित होने की दशा में 3300 रुपए दूसरी किश्त दी जाएगी.   

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कृषि कानून के विरोध में धरने पर बैठे पंजाब के CM, राहुल गांधी ने बताया किसानों की मौत का फरमान

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नई दिल्ली: कृषि कानून के विरोध में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टम अमरिंदर सिंह शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती पर उनके जन्मस्थान खटकर कलां गांव में धरना  दे रहे हैं. उनके साथ मंत्री, विधायक और कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए हैं. धरना शुरू करने से पहले सीएम कैप्टम अमरिंदर सिंह ने भगत सिंह की प्रतिमा को श्रद्धांजलि दी.

विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी को 'दुर्भाग्यपूर्ण और निराशाजनक': 
इस दौरान उन्होंने कृषि विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी को 'दुर्भाग्यपूर्ण और निराशाजनक' बताया है. अमरिंदर सिंह ने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को संसद में अपनी चिंताएं जाहिर करने का मौका नहीं दिया गया. ऐसे में राष्ट्रपति की मंजूरी उन किसानों के लिए झटका है जो केंद्र के इन कानूनों के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं. इन कानूनों के लागू होने से पंजाब का कृषि क्षेत्र बर्बाद हो जाएगा. 

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राहुल गांधी ने बताया किसानों की मौत का फरमान: 
वहीं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कृषि कानून को किसानों के मौत का फरमान बताया है. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि नया कृषि कानून किसानों के लिए मौत का फरमान है. उनकी आवाज को संसद और संसद के बाहर दबाया जा रहा है. ये सबूत है कि देश में लोकतंत्र मर चुका है. 

कांग्रेस सांसद ने दी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: 
इससे पहले केरल से कांग्रेस सांसद टीएन प्रतापन ने कृषि अधिनियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. संसद द्वारा किसानों से जुड़े बिल को वापस लेने के लिए रिट याचिका दायर की गई है. सुप्रीम कोर्ट के समक्ष टीएन प्रतापन के वकील आशीष जॉर्ज, एडवोकेट जेम्स पी थॉमस और एडवोकेट सीआर रेखेश शर्मा पेश होंगे.

ट्रैक्टर में आग मामले में 5 लोगों को हिरासत में लिया:  
वहीं दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने इंडिया गेट के पास ट्रैक्टर में आग मामले में 5 लोगों को हिरासत में लिया है. इनकी पहचान मनजोत सिंह, रमन सिंह, राहुल, साहिब और सुमित के तौर पर हुई है. ये सभी पंजाब के हैं. उनसे पूछताछ की जा रही है एक गाड़ी भी बरामद हुई है.

कांग्रेस सांसद ने सुप्रीम कोर्ट में कृषि अधिनियम को दी चुनौती, कानून वापस लेने की मांग

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नई दिल्ली: कृषि बिल के खिलाफ सड़क पर जारी प्रदर्शन का मसला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है. केरल से कांग्रेस सांसद टीएन प्रतापन ने कृषि अधिनियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. संसद द्वारा किसानों से जुड़े बिल को वापस लेने के लिए रिट याचिका दायर की गई है. सुप्रीम कोर्ट के समक्ष टीएन प्रतापन के वकील आशीष जॉर्ज, एडवोकेट जेम्स पी थॉमस और एडवोकेट सीआर रेखेश शर्मा पेश होंगे.

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वहीं दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने इंडिया गेट के पास ट्रैक्टर में आग मामले में 5 लोगों को हिरासत में लिया है. इनकी पहचान मनजोत सिंह, रमन सिंह, राहुल, साहिब और सुमित के तौर पर हुई है. ये सभी पंजाब के हैं. उनसे पूछताछ की जा रही है एक गाड़ी भी बरामद हुई है.

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कर्नाटक में जदएस के कार्यकर्ताओं ने शिवमोगा में एक बाइक रैली निकाली:
कर्नाटक में भी आज कृषि बिल का विरोध देखने को मिल रहा है. कर्नाटक में जनता दल सेक्युलर (जदएस) के कार्यकर्ताओं ने शिवमोगा में एक बाइक रैली निकाली, उन्हें पुलिस ने लक्ष्मी थिएटर सर्कल पर रोक दिया. कृषि कानून, भूमि सुधार अध्यादेश, कृषि उपज मंडी समिति में संशोधन और श्रम कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों ने आज राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है. 

कृषि कानून के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी:
बता दें कि कृषि कानून के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी है. दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है. 

कृषि बिल पर बवाल जारी, दिल्ली में संसद भवन के पास किसानों ने लगाई ट्रैक्टर में आग

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नई दिल्ली: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तीन कृषि बिलों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, यानी अब ये कानून बन चुके हैं. ऐसे में आज भी देश के कई हिस्सों में बिल के खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है. इसके साथ ही प्रदर्शन की आग देश की राजधानी दिल्ली तक भी पहुंच गई है. आज सुबह दिल्ली में किसानों ने राजपथ के पास एक ट्रैक्टर में आग लगा दी. ये लोग ट्रैक्टर को इंडिया गेट के पास लाकर प्रदर्शन कर रहे थे. मौके पर दिल्ली पुलिस और फायर ब्रिगेड ने पहुंच कर आग पर काबू पाया.  

वीआईपी इलाकों में धारा 144 लागू: 
हालांकि दिल्ली में इंडिया गेट और आस पास के वीआईपी इलाकों में धारा 144 लागू है और कोरोना वायरस के मद्देनजर लोगों को इकट्ठा होने की इजाजत नहीं है.प्रदर्शनकारियों को इक्कठा होने नहीं दिया गया. दूसरी ओर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह आज धरने पर भी बैठेंगे. 

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पंजाब में किसानों और सियासी दलों का विरोध और तेज: 
इसके साथ ही पंजाब में किसानों और सियासी दलों का विरोध और तेज हो रहा है. किसान संगठनों ने पंजाब में रेल रोको प्रदर्शन 29 सितंबर तक बढ़ा दिया है. बिल के खिलाफ अकाली दल जगह-जगह रैली कर रहा है.

कर्नाटक में भी आज किसानों ने फिर राज्य बंद बुलाया:
वहीं कर्नाटक में भी आज किसानों ने फिर राज्य बंद बुलाया है. कृषि बिल के विरोध में राज्य के किसानों ने ये बंद बुलाया है, इस दौरान सोमवार सुबह शिवमोगा में ट्रैफिक सामान्य दिखा.

Bharat Bandh: कृषि बिलों के विरोध में आज किसानों का भारत बंद, पंजाब और हरियाणा में ज्यादा असर

Bharat Bandh: कृषि बिलों के विरोध में आज किसानों का भारत बंद, पंजाब और हरियाणा में ज्यादा असर

नई दिल्ली: किसानों को लेकर हाल ही में संसद से पास तीन कृषि विधेयकों के विरोध में आज किसान संगठनों ने देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया है. इसमें 31 संगठन शामिल हो रहे हैं. किसान संगठनों को कांग्रेस, RJD, समाजवादी पार्टी, अकाली दल, AAP, TMC समेत कई पार्टियों का साथ भी मिला है. हालांकि आंदोलन का ज्यादा असर पंजाब और हरियाणा में दिख रहा है. इससे पहले पंजाब में तीन दिवसीय रेल रोको अभियान की गुरुवार से शुरुआत हो गई है. किसान रेलवे ट्रैक पर डटे हुए हैं और बिल को वापस लेने की मांग कर रहे हैं.

शनिवार तक 20 विशेष ट्रेनें आंशिक रूप से रद्द:
रेल रोको आंदोलन को देखते हुए रेलवे ने शनिवार तक 20 विशेष ट्रेनें आंशिक रूप से रद्द और पांच को गंतव्य से पहले रोक दिया है. वहीं, हरियाणा में किसानों-आढ़तियों ने राजमार्ग जाम करने की भी चेतावनी दी है. उधर, यूपी में भी सपा ने किसान कर्फ्यू और जाम का आह्वान किया है. 

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बिहार के हाजीपुर में भी खास असर:
कृषि बिल के विरोध में बुलाए गए भारत बंद का सबसे खास असर बिहार के हाजीपुर में देखने को मिल रहा है. गांधी सेतु के निकट NH 19 पर जाम लगाया गया है. सुबह से ही पप्पू यादव की पार्टी जन अधिकार पार्टी के समर्थक सड़क पर डटे हैं. बंद समर्थकों ने NH 19 को बंद करा दिया है. सड़कों पर टायर जला कर नारेबाजी की जा रही है. 

दिल्ली-चंडीगढ़ बस सेवा को बंद कर दिया गया: 
वहीं भारत बंद के चलते दिल्ली-चंडीगढ़ बस सेवा को बंद कर दिया गया है. किसानों के विरोध के चलते ट्रेन के पहिये भी थमे हैं. पंजाब सरकार ने यह हिदायत भी दी है कि पंजाब बंद के दौरान किसानों के प्रति नरम रवैया अपनाया जाए और उन पर कोई सख्त जबरदस्ती न की जाए.

इन विधेयकों का हो रहा विरोध: 
केंद्र सरकार ने हाल ही में कृषि सुधारों से जुड़े तीन बिल संसद से पास कराए हैं. ये हैं कृषि उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) बिल-2020, कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता बिल-2020 और कृषि सेवा विधेयक-2020। किसानों को आशंका है कि संसद से पारित बिल के जरिये न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म करने का रास्ता खुल जाएगा और उन्हें बड़े कॉरपोरेट की दया पर रहना पड़ेगा. 


 

किसान बिल के विरोध में लंबे वक्त के बाद सियासी कार्यक्रम में दिखे नवजोत सिंह सिद्धू, सड़कों पर उतरकर किया प्रदर्शन

किसान बिल के विरोध में लंबे वक्त के बाद सियासी कार्यक्रम में दिखे नवजोत सिंह सिद्धू, सड़कों पर उतरकर किया प्रदर्शन

अमृतसर: केंद्र सरकार के द्वारा पारित किए गए कृषि बिलों के खिलाफ नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने अमृतसर में सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया. इस दौरान उनके साथ सैकड़ों की भीड़ में समर्थक भी दिखाई दिए. इस दौरान पूर्व क्रिकेटर और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि किसान बिल से जमाखोरी को बढ़ावा मिलेगा. क्या सरकार रोटी को आवश्यक वस्तु नहीं मानती है? 

सिद्धू करीब एक साल बाद मैदान में उतरे:  
इस दौरान सिद्धू ट्रैक्टर पर सवार दिखे. साथ ही किसानों के हाथ में तख्तियां थीं और कुछ ने काले झंडे भी लिए हुए थे. सिद्धू करीब एक साल बाद मैदान में उतरे हैं. नवजोत सिंह सिद्धू पिछले काफी लंबे वक्त के बाद किसी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में दिखे हैं. उनका पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर के साथ रिश्ता सही नहीं रहा है, ऐसे में यही वजह है कि पंजाब की पॉलिटिक्स में कम एक्टिव हैं.  हालांकि, कोरोना संकट के दौरान भी वो लगातार सोशल मीडिया पर अपने वीडियो डाल मुद्दों पर बात रखते रहे. 

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पंजाब में किसान बिल का मुद्दा बेहद गरमाया हुआ:
बता दें कि पंजाब में किसान बिल का मुद्दा बेहद गरमाया हुआ है. इससे पहले शिरोमणी अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को विश्वास में लेने में कामयाब नहीं हुई. हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से लगातार इस बिल को लेकर विपक्ष पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया जा रहा है. और किसानों को विपक्ष की बातों में ना आने की सलाह दी जा रही है. 


 

सदन की कार्यवाही से विपक्ष के बहिष्कार के बीच कृषि से जुड़ा तीसरा बिल भी राज्यसभा से पास

सदन की कार्यवाही से विपक्ष के बहिष्कार के बीच कृषि से जुड़ा तीसरा बिल भी राज्यसभा से पास

नई दिल्ली: विपक्ष के बहिष्कार के बीच कृषि से जुड़ा तीसरा बिल आवश्यक वस्तु विधेयक, 2020 भी राज्यसभा से पास हो गया है. कृषि से जुड़े दो बिल पहले ही राज्यसभा से पास हो चुके हैं. लोकसभा ने 15 सितंबर को आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 को मंजूरी दे दी थी.

इस बिल में खाद्य पदार्थों को नियंत्रण मुक्त करने का प्रावधान:
इस बिल में खाद्य पदार्थों जैसे अनाज, दालें और प्याज को नियंत्रण मुक्त करने का प्रावधान है. बिल पास होने के बाद अब अनाज, दलहन, खाद्य तेल, आलू-प्याज आवश्यक वस्तु नहीं होंगे. उत्पादन, स्टोरेज, डिस्ट्रीब्यूशन पर सरकारी नियंत्रण खत्म होगा. फूड सप्लाई चेन के आधुनिकीकरण में मदद मिलेगी. उपभोक्ताओं के लिए भी कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी. सब्जियों की कीमतें दोगुनी होने पर स्टॉक लिमिट लागू होगी.

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सरकार बता रही कृषि क्षेत्र की दिशा में महत्वपूर्ण कदम: 
इससे पहले 20 सितंबर को कृषि से जुड़े दो महत्वपूर्ण विधेयकों को राज्यसभा ने विपक्षी सदस्यों के भारी हंगामे के बीच ध्वनिमत से अपनी मंजूरी दे दी थी. सरकार द्वारा इन दोनों विधेयकों को देश में कृषि क्षेत्र से जुड़े अबतक के सबसे बड़े सुधार की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है.

राज्यसभा की कार्यवाही का बहिष्कार करने का फैसला:  
वहीं इससे पहले मौजूदा मानसून सत्र में कांग्रेस और विपक्षी दलों द्वारा राज्यसभा की कार्यवाही का बहिष्कार करने का फैसला किए जाने के बाद सभी आठ निलंबित सांसदों ने अपना धरना प्रदर्शन खत्म कर दिया है. विपक्षी दलों के राज्यसभा सांसदों ने राज्यसभा का वॉकआउट किया है. इसमें कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), डीएमके, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), आम आदमी पार्टी (आप), वामदल, आरजेडी, टीआरएस और बीएसपी ने भी कार्यवाही का बहिष्कार किया है.

राज्यसभा में किसान बिल पर जोरदार हंगामा, 8 सांसद एक हफ्ते के लिए हुए निलंबित

राज्यसभा में किसान बिल पर जोरदार हंगामा, 8 सांसद एक हफ्ते के लिए हुए निलंबित

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र का आज आठवां दिन है. राज्यसभा में आज विपक्षी सांसदों के हंगामे का मुद्दा उठा. सभापति ने हंगामा करने वाले सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की है. उन्होंने हंगामा करने वाले आठ विपक्षी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें एक हफ्ते के लिए निलंबित कर दिया है. यानी वे एक हफ्ते तक सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले पाएंगे. निलंबित होने वाले सांसदों में डेरेक ओ ब्रायन, संजय सिंह, रिपुन बोरा, नजीर हुसैन, केके रागेश, ए करीम, राजीव साटव, डोला सेन हैं. 

अविश्‍वास प्रस्‍ताव नियमों के हिसाब से सही नहीं: 
सभापति ने कहा कि कहा कि उपसभापति के खिलाफ विपक्षी सांसदों की तरफ से लाया गया अविश्‍वास प्रस्‍ताव नियमों के हिसाब से सही नहीं है. सभापति की कार्रवाई के बाद भी सदन में हंगामा जारी रहा.

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कल राज्यसभा के लिए सबसे खराब दिन था:
राज्यसभा के सभापति ने कल की घटना पर कहा कि राज्यसभा के लिए सबसे खराब दिन था. कुछ सांसदों ने पेपर को फेंका. माइक को तोड़ दिया. रूल बुक को फेंका गया. इस घटना से मैं बेहद दुखी हूं. उपसभापति को धमकी दी गई. उनपर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई.

किसानों को उनकी फसल का पूरा समर्थन मूल्य मिलेगा:
कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा कि सरकारी खरीद जारी रहेगी और किसानों को उनकी फसल का पूरा समर्थन मूल्य मिलेगा. ये बिल पूरी तरह किसानों के हित में है और किसी को कोई आशंका नहीं होनी चाहिए. किसान वैश्विक मानदंडों के तहत कार्य कर पाएगा और उनकी पहुंच पूरी तरह से बाजार पर अपनी आजादी के तहत होगी.


 

केन्द्र द्वारा लाए गए तीनों नये कृषि कानून किसान विरोधी - पायलट

केन्द्र द्वारा लाए गए तीनों नये कृषि कानून किसान विरोधी - पायलट

जयपुर: प्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कई मुद्दों पत्रकारों से बात की.  केन्द्र सरकार द्वारा कृषि और कृषि व्यापार से संबंधित लाये गये तीन कानूनों पर प्रतिक्रिया देते हुए इन्हें कृषि एवं किसान विरोधी बताया, पायलट ने कहा कि कोरोना काल में अध्यादेशों के माध्यम से उक्त कानून लागू किये है, जबकि ऐसी कोई आपात स्थिति नहीं थी. उन्होंने कहा कि कृषि राज्य का विषय है जबकि केन्द्र सरकार ने इस संबंध में राज्यों से किसी प्रकार की सलाह नहीं ली. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा किसान संगठनों एवं राजनैतिक दलों से भी इस सम्बन्ध में कोई राय-मशविरा नहीं किया गया.

मोदी सरकार प्रारम्भ से ही किसान विरोधी रही:  
पायलट ने कहा कि मोदी सरकार प्रारम्भ से ही किसान विरोधी रही हैं. उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही किसानों के लिए भूमि मुआवजा कानून रद्द करने के लिए एक अध्यादेश प्रस्तुत किया. परन्तु राहुल गांधी जी के नेतृत्व में कांग्रेस एवं किसानों के विरोध के कारण मोदी सरकार को पीछे हटना पड़ा. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने इन तीन नए कानूनों से किसान, खेत-मजदूर, कमीशन एजेंट, मण्डी व्यापारी सभी पूरी तरह से समाप्त हो जायेंगे. उन्होंने कहा कि एपीएमसी प्रणाली के समाप्त होने से कृषि उपज खरीद प्रणाली समाप्त हो जायेंगी. किसानों को बाजार मूल्य के अनुसार न तो न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलेगा और न ही उनकी फसल का मूल्य.  

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मण्डी सिस्टम खत्म होना किसानों के लिए बेहद घातक सिद्ध होगा:
सचिन पायलट ने मीडिया से कहा कि यह दावा सरासर गलत है कि अब किसान देश में कहीं भी अपनी उपज बेच सकता हैं. पायलट ने कहा कि जनगणना के अनुसार देश में 86 प्रतिशत किसान 5 एकड से कम भूमि के मालिक है. ऐसी स्थिति में 86 प्रतिशत अपने खेत की उपज को अन्य स्थान पर परिवहन या फेरी नहीं कर सकते हैं. इसलिए उन्हें अपनी फसल निकट बाजार में ही बेचनी पड़ती है. मण्डी सिस्टम खत्म होना किसानों के लिए बेहद घातक सिद्ध होगा. उन्होंने कहा कि अनाज-सब्जी बाजार प्रणाली की छंटाई के साथ राज्यों की आय का स्त्रोत भी समाप्त हो जाएगा. पायलट ने कहा कि केन्द्र सरकार से मांग की है कि राजनैतिक दलों, किसान संगठनों, मण्डी व्यापारियों और कृषि विशेषज्ञों से विस्तृत चर्चा कर इन कानूनों में संशोधन पर विचार करें जिससे देश के किसान की वास्तविक दशा में बदलाव आ सकें. 

...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट