कैसा है दो दशकों तक क्रिकेट पर राज करने वाले 'युवी' का सफर?

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/06/10 07:09

मुंबई: क्रिकेट में बांए हाथ के बल्लेबाज कहलाये जाने वाले 'युवराज सिंह' ने आज इससे संन्यास ले लिया है.उन्होंने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी. क्रिकेट मैदान में अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवाने वाले युवी को दूसरे खिलाड़ियों की तरह मैदान पर अपने प्रशंसकों को अलविदा कहने का मौका नहीं मिला. युवी ने यह घोषणा आज प्रेस-कांफ्रेस के जरिए की.

क्रिकेट सफर की शुरूआत :-
क्रिकेट से ऐसी विदाई की उम्मीद खुद युवराज ने भी नहीं की थी. उनके करियर पर गौर करें तो शायद बहुत कम ऐसे खिलाड़ी होते हैं जो अंडर-19 विश्वकप खेलने के कुछ ही महीनों में सीनियर टीम में जगह पाएं...युवी उनमें से एक थे. बात उन दिनों की है जब उन्हें साल 2000 में उन्हें मोहम्मद कैफ की कप्तानी वाली

अंडर-19 टीम में जगह मिली.
हालांकि युवी ने क्रिकेट को अलविदा कह दिया है लेकिन उनकी क्रिकेट में बेहतरीन पारियों को नहीं भुलाया जा सकता. सन 1996 में पंजाब की अंडर-19 में जगह बनाने के बाद उन्होंने हिमाचल प्रदेश के खिलाफ नाबाद 137 रनों की पारी खेली . लेफ्ट हैंड के बल्लेबाज युवी ने साल 1999 में अपने करियर की सबसे बेहतरीन पारी खेली. इस सीजन के फाइनल मैच में महेंन्द्र सिंह धोनी की बिहार की टीम 357 पर ऑल आउट हो गयी थी. 

युवराज सिंह नंबर 3 पर बल्लेबाज़ी करने आये और 3 दिन तक बल्लेबाज़ी की जिसके साथ उन्होंने बिहार टीम के कुल स्कोर से एक रन ज़्यादा यानी 358 रन बनाए. इसके बाद युवराज सिंह को भारत की अंडर-19 टीम में जगह बनाने से कोई नहीं रोक सका . इस टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन ज़बरदस्त रहा. उन्होंने न्यूज़ीलैण्ड के खिलाफ 68 रनों की उपयोगी पारी खेली और गेंदबाज़ी से 36 रन देकर 4 विकेट चटकाए. इसके अलावा सेमीफइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 25 गेंदों में 58 रन बनाये थे.

अंतराष्ट्रीय क्रिकेट का सफर :-
युवी का अंतराष्ट्रीय डेब्यू सन 2000 की नॉकआउट ट्रॉफी (आई.सी.सी. चैंपियंस ट्रॉफी ) में केन्या के खिलाफ हुआ. जहां उनकी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ क्वाटर फाइनल में खेली गयी पारी... काफी यादगार रहेगी,  क्योंकि उन्होंने ग्लेन मैकग्राथ, ब्रेट ली और जेसन गिलेस्पी के खिलाफ बड़ा जिगरा दिखाया. हालांकि इतनी अच्छी शुरुआत के बाद युवराज को उनके करियर में पहला झटका लगा. नॉकआउट ट्रॉफी के बाद भारतीय टीम ने त्रिकोणीय श्रृंखला खेली, जिसमें जिम्बाब्वे और श्रीलंका की टीमें खेल रही थी. 

युवराज का बल्लेबाज़ी का औसत 15 का रहा था जिसके कारण उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया. 2001 में उन्हें श्रीलंका दौरे में टीम में वापसी की. उनके अंतराष्ट्रीय करियर की यादगार पारियों की बात करें तो 2002 में नेटवेस्ट सीरीज फाइनल में मोहम्मद कैफ के साथ उनकी साझेदारी भारत के लिए एक यादगार जीत का कारण बनी.  इसके बाद 2007  में टी 20 विश्वकप में इंग्लैंड के खिलाफ 12 गेंदों में अर्ध-शतक लगाया, जो आज भी टी 20 अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे तेज़ अर्ध-शतक है. 

इस पारी में उन्हों स्टुअर्ट ब्रॉड को एक ओवर में 6 छक्के मारे थे. इस पारी के कहानी भी ज़बरदस्त है. स्टुअर्ट ब्रॉड के ओवर शुरू होने के ठीक पहले एंड्रयू फ्लिंटॉफ ने युवराज पर छींटाकंशी की जो इंग्लैंड को भारी पड़ी थी. यह विश्वकप भारत ने जीता था . 2011 विश्वकप में भारत के आखिरी लीग मैच में वेस्टइंडीज के खिलाफ ज़बरदस्त गर्मी और आद्रता के बीच शतक ज्यादा था. इसी विश्वकप में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ क्वाटर फाइनल में अपनी बल्लेबाज़ी से टीम के लिए हार के मुँह से जीत छीन ली. यह विश्वकप भी भारत के पाले में आया.

कैंसर से सामना :-
2011 में ही युवराज को अपनी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा झटका मिला. उन्हें कैंसर जैसी बीमारी से जूझना पड़ा . बहुत कम लोगों को पता है कि युवराज सिंह ने 2011 का विश्वकप में भाग गया था. टीम के खिलाड़ियों को शायद ही इस बात की जानकारी थी.

कैंसर से जीत, वापसी उतनी दमदार नहीं :-
उन्होंने अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी ज़रूर की लेकिन वह पहले जैसे खिलाडी नहीं रहे . इसके बाद भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी ( 2013 ) और विश्वकप 2015 में भाग लिया, लेकिन युवराज सिंह के बिना. उसके बाद उन्होंने 2016 टी 20 विश्वकप में वापसी की जो बहुत अच्छा नहीं रहा था. चोट के कारण टीम से बाहर होने के बाद उन्होंने 2017 जनवरी में टीम में वापसी की. 

उस समय भारतीय टीम नंबर 4 के दावेदार की तलाश में थी क्यूंकि अगले 6 महीने में चैंपियंस ट्रॉफी खेली जानी थी. वापसी के बाद दूसरे ही मैच में उन्होंने दिखा दिया की वह किस मिट्टी के बने हैं. चैंपियंस ट्रॉफी में उन्हें सिर्फ 2 इनिंग में बल्लेबाज़ी का मौका मिला.  इस टूर्नामेंट में भारत उपविजेता रहा. इसके ठीक बाद वेस्टइंडीज के खिलाफ श्रंखला में युवराज सिंह ज़्यादा अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सके जिसके कारण वह टीम से बाहर हो गए. उनके फैंस को उम्मीद थी की वो वापसी करें और और उन्हें ज़बरदस्त विदाई दें. शायद ऐसा उनकी किस्मत में नहीं था.   

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