जयपुर VIDEO: कच्चे तेल के दामों में लगी आग ने आमजन को झुलसाना किया शुरु, पांच राज्यों में चुनाव की सियासी मजबूरी से अब तेल कंपनियां निकल चुकी हैं बाहर

VIDEO: कच्चे तेल के दामों में लगी आग ने आमजन को झुलसाना किया शुरु, पांच राज्यों में चुनाव की सियासी मजबूरी से अब तेल कंपनियां निकल चुकी हैं बाहर

जयपुर: गर्मी की शुरुआत के साथ ही ही कच्चे तेल के दामों में लगी आग ने आमजन को झुलसाना शुरु कर दिया है. जी हां पांच राज्यों में चुनाव की सियासी मजबूरी से अब तेल कंपनियां बाहर निकल चुकी हैं और 141  दिन की लंबी चुप्पी को तोड़ते हुए पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस के दामों में वृद्धि की शुरुआत कर दी गई है. ये वृद्धि अभी एक पखवाड़े या एक महीने तक जारी रह सकती है. इसका असर महंगाई के चरम के तौर पर देखने को मिल सकता है. 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम यूं तो करीब दो महीने पहले बढ़ना शुरु हो गए थे लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध की ने दामों को आसमान तक पहुंचा दिया. सामान्यतः अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 70 डॉलर के आसपास रहते हैं जो दो महीने पहले 85 डॉलर तक पहुंचे और अब 128 डॉलर तक प्रति बैरल दाम पहुंच गए थे जो अब 110 डॉलर तक आकर स्थिर हैं. कीमतों में वृद्धि से भारतीय तेल कंपनियों को भी 90 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के नुकसान को मोटे तौर पर अंदाजा लगाया जा रहा है. देश में पांच राज्यों में चुनाव की शुरुआत से पहले ही तेल कंपनियों ने 4 नवंबर को वृद्धि को रोका था. अब चुनाव संपन्न हो चुके हैं ऐसे में तेल कंपनियों दो दिन पहले डीजल के बल्क यूजर्स के लिए दर में 25 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि की और अगले ही दिन राजधानी जयपुर की दरों के अनुरूप बात करें तो डीजल में 83 पैसे और पेट्रोल में 88 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की है. रसोई गैस के दाम भी 50 रुपए प्रति सिलेंडर बढ़ाए गए हैं. हालांकि कमर्शियल सिलेंडर के दाम 8 रुपए कम किए गए हैं. तेल कंपनियों द्वारा आने वाले एक पखवाड़े या एक महीने में अपना मार्जिन निकालने के लिए ये वृद्धि 20 रुपए तक की जा सकती है. हालांकि दरों में बढ़ोत्तरी एक साथ न होकर रोजाना या एक-दो दिन के अंतराल पपर की जाती रहेगी. 

रसोई गैस के दाम भी 300 रुपए प्रति सिलेंडर तक बढ़ने की आशंका बनी हुई है. दरअसल देश की जरूरत का 70 फीसदी तेल हम दूसरे देशों से आयात करते हैं. ऐसे में रूस यूक्रेन युद्ध ने मांग और आपूर्ति को गड़बउ़ा दिया है. इसलिए गर्मी बढ़ने के साथ पेट्रोल-डीजल की मांग बढेगी तो एक और समस्या का सामना करना पड़ सकता है. दरअसल आपूर्ति गड़बड़ाने से से नायरा, जिओ-एचबी और शैल जैसी कंपनियों के पंप् लगभग ड्राई चल रहे हैं. आने वाले कुछ दिनों में आईओसी, एचपीसील और बीपीसीएल की सप्लाई में भी दिक्कतें आ सकती हैं. इसका मतलब है दरें तो बढ़ेंगी ही सप्लाई भी पूरी मिलना मुश्किल होगा. दूसरी और पेट्रोल-डीजल की दरों में वृद्धि का असर महंगाई के तौर पर देखने को मिलेगा. अप्रेल के पहले सप्ताह से खाद्य तेल, दाल, अनाज, दवा, सब्जियां, निर्माण सामग्री सभी में दस से तीस फीसदी की वृद्धि हो सकती है. अब जनता उम्मीद कर रही है कि केंद्र सरकार पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क में तो राज्य सरकार वैट में कमी करके दरों को स्थिर रखने का प्रयास करें अन्यथा आमजन का गर्मी में तेल निकलना तय है.

और पढ़ें