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VIDEO: 4 घंटे में 'देवदूत' का दिल हुआ 8 साल 'जवान', SMS अस्पताल ने रचा बड़ा इतिहास

जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सरकारी क्षेत्र में हार्ट ट्रांसप्लांट के सपने को प्रदेश के सबसे बड़े एसएमएस अस्पताल प्रशासन ने आज पूरा कर दिया. 25 वर्षीय 'देवदूत' खुद जिन्दगी छोड़ने से पहले चार लोगों को नया जीवन दे गया. 'देवदूत' का दिल महज 17 साल के रिसिपिएंट विशाल को लगाया गया. पूरी हार्ट ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया में 4 घंटे का समय लगा, और इस प्रकार देखते ही देखते 25 साल का हार्ट 8 साल जवान होते हुए 17 साल का हो गया. इस कवायद में सबसे खास बात ये रही कि एसएमएस अस्पताल ने बहुप्रतिक्षित पहला हार्ट ट्रांसप्लांट कर कीर्तिमान रचा. सूबे के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा ने इस उपलब्धि के लिए एसएमएस के चिकित्सकों को बधाई दी, साथ ही ईश्वर से प्रार्थना भी की कि जिस मरीज को हार्ट लगा है, वह जल्द से जल्द रिकवर हो.

चिकित्सकों ने हार्ट ट्रांसप्लांट का नया कीर्तिमान रचा: 
आखिर वो दिन आ गया, जिसका पिछले चार सालों से इंतजार था. दर्जनों कीर्तिमान अपने नाम कर चुके एसएमएस अस्पताल के चिकित्सकों ने हार्ट ट्रांसप्लांट का नया कीर्तिमान रचा. दरअसल, 10 जनवरी को सड़क हादसे में घायल राजसमन्द का 'देवदूत' ब्रेनडेड अवस्था में चला गया था. ऐसे में एसएमएस के ट्रोमा सेन्टर में भर्ती मरीज के परिजनों को जब अंगदान का महत्व समझाया गया तो वे चार लोगों को नई जिन्दगी देने के लिए तैयार हो गए. इसके बाद शुरू हुआ टीम एसएमएस का मिशन 'देवदूत'. अस्पताल में सरकारी क्षेत्र के पहले हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए सीक्रेट तैयारी शुरू हुई, लेकिन इस प्रक्रिया में फर्स्ट इंडिया ने निभाई सामाजिक सरोकारता. ट्रोमा सेन्टर से ब्रेनडेड पेंशेट की ओटी में शिफ्टिंग और फिर ओटी से हार्ट की दूसरे ओटी में शिफ्टिंग तक पल-पल का गवाह बना फर्स्ट इंडिया और जब मिशन 'देवदूत' हुआ पूरा तो दर्शकों को सबसे पहले दी इस कीर्तिमान की जानकारी. 

शाबास टीम एसएमएस !
- चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा के निर्देश में एसएमएस के चिकित्सकों का कमाल
- पांच दिन, 100 से अधिक घंटे तक का सतत प्रयास और फिर रचा कीर्तिमान
- कल रात 1 बजे ट्रोमा सेन्टर से मरीज को किया गया धनवंतरी ओटी में शिफ्ट
- करीब सात घंटे की प्रक्रिया में एक हार्ट, एक लीवर और दो किडनी प्रत्यारोपित
- हार्ट को एसएमएस में ही किया गया प्रत्यारोपित, जबकि लीवर भेजा गया निजी अस्पताल
- जबकि लीवर को ग्रीन कॉरिडोर के जरिए भेजा गया निम्स हॉस्पिटल
- इसके अलावा दोनों किडनी का भी अस्पताल में ही हुआ प्रत्यारोपण

ये रही डॉ रघु की 'टीम':
डॉ सुधीर भण्डारी, एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्राचार्य
डॉ डी एस मीणा, अधीक्षक एसएमएस अस्पताल
डॉ अनिल शर्मा, एचओडी,सीटीवीएस सर्जरी और उनके सहयोगी
डॉ विनय तोमर, सीनियर प्रोफेसर, यूरोलॉजी
डॉ एसएस यादव, एचओडी, यूरोलॉजी
डॉ.अमरजीत मेहता,  ज्वाइंट  डायरेक्टर, सोटो
डॉ मनीष शर्मा, आईईसी(मीडिया), सोटो
ट्रांसप्लांट कॉर्डिनेटर डॉ. अजीत सिंह शक्तावत, रोशन
रामप्रसाद मीणा, रामरतन खनगवाल, उर्वशी सिंह, ताराचंद
अबरार अहमद, हमीरा राम चौधरी, लीलम सिंह मीणा,

सरकारी क्षेत्र में हार्ट ट्रांसप्लांट का ये होगा फायदा:
- राजस्थान में अब तक 16 दिल धडक रहे जरूरतमंद मरीजों को
- 16 कैडेबर हार्ट ट्रांसप्लांट में से पांच हार्ट ट्रांसप्लांट जयपुर के निजी अस्पताल में हुए, जबकि 11 हार्ट राजस्थान के बाहर दूसरे राज्य में भेजने पडे़...
- कारण सिर्फ एक है कि निजी अस्पताल का 25 से 30 लाख रुपए बड़ा खर्च जरूरतमंद परिवार नहीं उठा सकते....
- सरकार ने एसएमएस में करीब 15 करोड़ की लागत से हार्ट ट्रांसप्लांट सेन्टर व अन्य जरूरी उपकरण लगाए, जहां आज पहला निशुल्क हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया है।
- पहले हार्ट ट्रांसप्लांट से उन परिवारों के लिए बड़ी उम्मीद जगी है, जो पिछले कई सालों से पैसों की कमी के चलते सरकारी तंत्र में हार्ट ट्रांसप्लांट की शुरूआत का इंतजार कर रहे थे

एसएमएस अस्पताल में पहले हार्ट ट्रांसप्लांट से चिकित्सकों में खुशी की लहर है, लेकिन लीवर को एकबार फिर निजी अस्पताल भेजने को लेकर सवाल भी खड़े हो रहे हैं. इसके पीछे का कारण ये है कि एसएमएस में लीवर ट्रांसप्लांट हो चुका है, अब फिलहाल चिकित्सकों की आपसी खिंचतान के चलते इस पर ब्रेक लगा हुआ है. हालांकि, चिकित्सा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि जल्द ही लीवर ट्रांसप्लांट के पेंच को भी दूर किया जाएगा.

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