जाति के नाम से चमकती सियासत, राजस्थान रहा जाति की सियासत का प्रदेश

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/03/05 09:10

जयपुर (योगेश शर्मा)। राजनीति में सबसे सफल जातीय आरक्षण आंदोलन रहा जाट समाज का। भरतपुर छोड़कर राज्य के अन्य इलाकों के जाट वर्ग को ओबीसी में आरक्षण का हक मिला। जाट वर्ग के इस जातीय आंदोलन का प्रभाव यह रहा कि ज्ञानप्रकाश पिलानिया, डॉ. हरि सिंह, सुभाष महरिया राजनीति में चमके। पिलानिया आगे चलकर राज्यसभा सांसद बने तो पुत्र नवीन पिलानिया विधायक, दूसरी ओर मील परिवार का भी राजनीतिक प्रार्दुभाव हो गया।

गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने गुर्जर समाज को व्यापक तौर पर प्रभावित किया और खुद भी बीजेपी के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ गये यह अलग बात है कि जीत नसीब नहीं हुई। अब उनके पुत्र विजय बैंसला के नाम की चर्चा। खास बात नाम उनका दोनों ही पार्टियों में चल रहा है चाहे कांग्रेस हो या बीजेपी। टोंक सवाई माधोपुर और अजमेर से उनके नाम की चर्चा है। विजय बैंसला को हाल ही में हुए गुर्जर आरक्षण आंदोलन से ख्याति मिली, इससे पहले कम लोग ही जानते थे।

गुर्जर आरक्षण आंदोलन और सियासत :
— सबसे प्रचंड आंदोलन राजस्थान में हुआ
— शुरुआती दौर में समाज के नेताओं ने मोर्चा संभाला
— आगे चलकर यहां भी सियासत हावी हुई 
— खुद कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने आगे चलकर बीजेपी के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा
— प्रहलाद गुंजल, सुखबीर सिंह जौनापुरिया, अतर सिंह भडाना, नाथू सिंह गुर्जर, राजेन्द्र विधूडी, गोपीचंद गुर्जर, बृजेन्द्र सूपा, जवाहर बेढम आंदोलनों के चेहरे रहे
— गुर्जर समाज के ये नेता आज विभिन्न दलों में स्थापित हैं
— आंदोलन का नतीजा है कि अब राजस्थान सरकार गुर्जरों को 5 फीसदी आरक्षण के लिये प्रतिबद्ध है।

जब गुर्जर समाज ने एसटी आरक्षण की मांग उठाई थी, उसी दौरान एक दूसरा आंदोलन भी सामने आ गया था वो मीना वर्ग का आंदोलन, जिसका नेतृत्व किया डॉ. किरोड़ीलाल मीना ने। यूं कहें कि मीना आदिवासी वर्ग के वो नेता इस बात को लेकर बन गये कि एसटी आरक्षण कहीं हाथ से ना छिटक जाये। डॉ. किरोड़ी ने मंत्री पद भी इसलिये त्यागा।

मीणा समाज का आंदोलन और सियासत :
— एसटी में शामिल करने की गुर्जर समाज की मांग के खिलाफ एसटी वर्ग ने आंदोलन किया 
— डॉ. किरोड़ी लाल मीना के हाथों में इस आंदोलन की कमान रही
— मीन समाज में डॉ. किरोड़ी विराट चेहरे के तौर पर उभरे
— निर्दलीय तौर पर दौसा से सांसद तक बन गये 
— नमोनारायण मीना, जसकौर मीना, वीरेन्द्र मीना, रमेश मीना, मुरालीलाल मीना, राकेश मीना सरीखे नेता भी उस दौर में चमके
— आज यह सभी अलग अलग दलों में स्थापित नेता हैं 

आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग को लेकर राजपूत, ब्राह्मण और वैश्य समाज ने भी कई आंदोलन किए। इसी का नतीजा है कि केन्द्र सरकार आज आर्थिक आधार सवर्ण पिछड़ों को आरक्षण देने के लिये कानून लाई।

राजपूत समाज के आंदोलन और सियासत :
— आर्थिक आधार पर राजपूत वर्ग ने बड़े आंदोलन किये
— दिवराला सती प्रथा मूवमेंट से निकल दीपेन्द्र सिंह शेखावत
— राजेन्द्र राठौड़ सरीखे दिग्गज बड़े सियासी क्षत्रप कहलाये
— रणवीर सिंह गुढ़ा ने लोजपा के टिकट पर चुनाव जीत लिया 
— भगवान सिंह रोलसाहेबसर ने राजपूत फाउंडेशन के जरिये सामाजिक जागृति के लिये काम किया
— राजपूतों की प्रभावी संस्था क्षत्रिय युवक संघ के वे आज प्रमुख नेता हैं
— रोलसाहेबसर ऐसे सामाजिक व्यक्ति हैं, जिन्होंने किसी सियासी दल का दामन नहीं थामा, लेकिन समय-समय पर पसंद को सार्वजनिक भी किया, इनकी राजनीति में आने की रुचि नहीं
— करणी सेना संरक्षक लोकेन्द्र सिंह कालवी हैं तो सामाजिक चेहरे, लेकिन आते हैं सियासी घराने से। उन्होंने करणी सेना बनाकर ईबीसी आरक्षण के लिये लड़ाई लड़ी, कालवी को उचित सियासी फ्लेटफार्म अभी नहीं मिला।
— सामाजिक न्याय मंच बनाकर देवी सिंह भाटी ने सियासत में नई इबारत लिखने की ठानी थी
— आनंदपाल एनकाउंटर के बाद सर्वाधिक चर्चित हुये गिरिराज सिंह लोटवाड़ा। लोटवाड़ा है राजपूत सभा भवन के प्रमुख। ईबीसी आरक्षण आंदोलन में भी सभा भवन की भूमिका रही।
— मानवेन्द्र सिंह की स्वाभिमान रैली ने राजपूत समाज में एंटी बीजेपी वर्ग को जन्म दिया है। इनके पिता जसवंत सिंह देश के रक्षा, वित्त और विदेश मंत्री जैसे ओहदों पर रहे। आज मानवेन्द्र सिंह कांग्रेस में हैं।
— सुखदेव सिंह गोगामेडी भी सामाजिक आंदोलन के लिये सक्रिय रहे चाहे फिल्मों का विरोध हो या अन्य आंदोलन, राष्ट्रीय करणी सेना के प्रमुख है

राजपूत समाज के आंदोलन और सियासत :
— आर्थिक आधार पर राजपूत वर्ग ने बड़े आंदोलन किये
— दिवराला सती प्रथा मूवमेंट से निकल दीपेन्द्र सिंह शेखावत
— राजेन्द्र राठौड़ सरीखे दिग्गज बड़े सियासी क्षत्रप कहलाये
— रणवीर सिंह गुढ़ा ने लोजपा के टिकट पर चुनाव जीत लिया 
— भगवान सिंह रोलसाहेबसर ने राजपूत फाउंडेशन के जरिये सामाजिक जागृति के लिये काम किया
— राजपूतों की प्रभावी संस्था क्षत्रिय युवक संघ के वे आज प्रमुख नेता हैं
— रोलसाहेबसर ऐसे सामाजिक व्यक्ति है जिन्होंने किसी सियासी दल का दामन नहीं थामा, लेकिन उन्होंने समय-समय पर पसंद को सार्वजनिक भी किया। इनकी राजनीति में आने की रुचि नहीं

ब्राह्मण वर्ग का आंदोलन और सियासत :
— ईबीसी के लिये ब्राह्मण संगठनों ने लंबी लड़ाई लड़ी
— ब्राह्मण समाज के नेता आंदोलन में आगे रहे 
— कांग्रेस विधायक भंवर लाल शर्मा है. ब्राह्मण महासभा के प्रमुख
— ईबीसी आरक्षण के लिये महासभा ने आंदोलन किये
— आज सरदारशहर से कांग्रेस के विधायक हैं भंवरलाल शर्मा 
— कांग्रेस नेता सुरेश मिश्रा के हाथों में है सर्व ब्राह्मण महासभा की कमान 
— इन्होंने ईबीसी आरक्षण के लिये पुलिस के डंडे खाये 
— ब्राह्मण नेता एसडी शर्मा बीजेपी में स्थापित नेता हैं 
— कद्दावर ब्राह्मण नेता घनश्याम तिवाड़ी ने भी आर्थिक पिछड़ों के लिए किया काम
— आर्थिक पिछड़ों के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण का ड्राफ्ट तैयार कराने में तिवाड़ी की भूमिका रही

वैश्य वर्ग आंदोलन और सियासत :
— रामदास अग्रवाल बड़े वैश्य चेहरे
— ईबीसी ही क्या जाट और गुर्जर समाज के आंदोलन में भी की मध्यस्थता 
— रामदास अग्रवाल वैश्य समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे 
— रामदास अग्रवाल के निधन के बाद वेक्यूम भरा नहीं गया, वे देशव्यापी नेता थे
— कालीचरण सराफ, मोहन लाल गुप्ता, विजय बंसल सरीखे नेता बीजेपी में स्थापित नेता
— कांग्रेस में प्रद्युम्न सिंह ,शांति धारीवाल वैश्य वर्ग के बड़े चेहरे रहे

जातिवादी पॉलिटिक्स को हवा देने का काम राजस्थान के राजनेता बरसों से करते आ रहे हैं। सामंती और जागिरदारी प्रथा के खिलाफ शुरु हुआ किसान मूवमेंट कब आगे चलकर जातिवादी राजनीति में बदल गया और राजनीति की भाषा बदल गई। कुछ राजनेताओं को सफलता मिल गई तो कुछ राजनेता सफलता के इंतजार में हैं। यह जरुर है कि जातीय सियासत खुद की किस्मत चमकाने का अच्छा साधन है। कितना ही इनकार क्यों न किया जाए, बिना जातिवाद के अब भी सियासत अधूरी है। फिर चाहे विधानसभा का चुनाव हो या लोकसभा का।

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