सुप्रीम कोर्ट में पहली बार 31 जज, 4 नए जजों की सिफारिश को केन्द्र ने दी मंजूरी

Nizam Kantaliya Published Date 2019/05/22 06:13

जयपुर: देश के न्यायिक इतिहास में लंबे समय बाद सुप्रीम कोर्ट में स्वीकृत जजों के 31 पदों पर जजों की नियुक्ति हुई है. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा हाल ही में केन्द्र को भेजी गई 4 जजों की सिफारिश को केन्द्र सरकार ने मंजूरी दे दी है. केन्द्र की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी नियुक्ति वारण्ट पर हस्ताक्षर कर दिये. संभवतया गुरूवार को 4 नए जज सुप्रीम कोर्ट में शपथ ले सकते है. 

2014 के बाद सुप्रीम कोर्ट में पूरे 31 जज:
सुप्रीम कोर्ट को 4 नए जज मिल गए हैं. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अनिरुद्ध बोस, गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस ए. एस. बोपन्ना, बॉम्बे हाई कोर्ट के जज जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई और हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत को सुप्रीम कोर्ट के जज नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है. वर्ष 2014 के बाद ये पहली बार होगा कि सुप्रीम कोर्ट में स्वीकृत संख्या के मुताबिक पूरे 31 जज होंगे. इससे पहले केंद्र सरकार की आपत्ति को दरकिनार करते हुए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने अपनी उस सिफारिश को दोहराया था, जिसमें जस्टिस बोस और जस्टिस बोपन्ना को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त करने की सिफारिश की गई थी. कॉलेजियम ने अपनी सिफारिश को वापस केंद्र को भेजते हुए कहा था कि वरिष्ठता को इन मामलों में अवश्य देखा जाता है.

जस्टिस अनिरुद्ध बोस:
जस्टिस अनिरुद्ध बोस को 19 जनवरी, 2004 को कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था और 11 अगस्त 2018 को उन्हें झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था. जस्टिस बोस अखिल भारतीय आधार पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संयुक्त वरिष्ठता में 12 वें क्रम पर हैं.

जस्टिस ए. एस. बोपन्ना: 
जस्टिस ए. एस. बोपन्ना को 6 जनवरी, 2006 को कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था और 29 अक्टूबर, 2018 को उन्हें गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया. जस्टिस बोपन्ना अखिल भारतीय आधार पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संयुक्त वरिष्ठता में 36 वें क्रम पर हैं.

जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई: 
जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई को 14 नवंबर, 2003 को बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था.  उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की अखिल भारतीय आधार पर संयुक्त वरिष्ठता में वो 8 वें नंबर पर हैं. यह ध्यान देने योग्य बात है कि जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई की नियुक्ति से सुप्रीम कोर्ट के पास लगभग एक दशक के बाद अनुसूचित जाति श्रेणी का एक जज होगा. वो 2025 को देश के मुख्य न्यायाधीश भी होंगे. 

जस्टिस सूर्यकांत:  
जस्टिस सूर्यकांत को 9 जनवरी, 2004 को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था और 5 अक्टूबर, 2018 को उन्हें हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया. गौरतलब है कि जस्टिस सूर्यकांत अखिल भारतीय आधार पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संयुक्त वरिष्ठता में 11 वें क्रम पर हैं.

... संवाददाता निजाम कंटालिया की रिपोर्ट 

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