पुलवामा मुठभेड़ में शहीद हुए चूरू के सपूत राजेंद्र को 2 साल बेटी ने दी मुखाग्नि

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/01/02 06:46

रतनगढ़। शनिवार को देर रात श्रीनगर के पुलवामा में आंतकवादियों से हुई मुठभेड़ में शहीद हुए चूरू जिले की रतनगढ़ तहसील के ग्राम गौरीसर के सपूत राजेंद्र नैण का शव आज उसके गांव पहुंचा। वहीं राजेंद्र की सैन्य सम्मान के साथ गांव गोरीसर में अंत्येष्टि की गई। सैन्य टुकड़ी ने श्मशान घाट में राजेंद्र की पार्थिव देह को अजमेर सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट रामकुमार जाट के नेतृत्व में आई 15 जवानों की टीम ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर तोपों की सलामी दी। राजेन्द्र की पार्थिव देह को मुखाग्नि चचेरे भाई सुभाष नैण एवं शहीद राजेन्द्र की दो वर्षीय पुत्री मिष्टी ने दी।

इस दौरान जिलेभर के राजनेता, जनप्रतिनिधि एवं आसपास के गांवों के हजारों ग्रामीण मौजूद थे। राजेन्द्र की पार्थिव देह जैसे श्मशान जाने के लिये घर से रवाना हुई, तो 'राजेन्द्र जिंदाबाद', 'जब तक सूरज चांद रहेगा, राजेन्द्र तेरा नाम रहेगा' जैसे नारों से आकाश गुंजायमान हो गया। इस दौरान आक्रोश व्यक्त करते हुए युवकों ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। अंत्येष्ठि के बाद सेंकड़ों युवकों ने श्मशान के बाहर पाकिस्तान एवं हाफिज शहीद का पुतला भी फूंका।

पंचायती राज मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने शहीद परिवार को एक लाख रुपये एवं CRPF की 130बी बटालियन ने 51 हजार रुपए की नगद राशि भेंट की। इस दौरान जयपुर CRPF के डीआईजी जगदीश मीणा, दिल्ली CRPF के असिस्टेंट कमांडेंट सुनील कुमार एवं श्रीनगर CRPF के एसआई हरदयाल सिंह के नेतृत्व में सलामी दी गई।

देवस्थान विभाग मंत्री राजकुमार रिणवा, विधानसभा प्रतिपक्ष नेता रामेश्वर डूडी, जिला कलेक्टर ललितकुमार गुपता, एसपी राहुल बारहठ, जिला प्रमुख हरलाल सहारण, राज्यसभा सदस्य नरेंद्र बुडानिया, भाजपा जिलाध्यक्ष वासुदेव चावला, पूर्व सांसद रामसिंह कस्वा, कांग्रेस नेत्री कृष्णा पूनिया ने भी पुष्प चक्र अर्पित किए गये।

आपको बता दें कि 26 वर्षीय राजेंद्र पुत्र सहीराम नैण CRPF की 130वीं बटालियन में श्रीनगर में तैनात था। वह करीब 2 वर्ष पूर्व ही CRPF में भर्ती हुआ था। राजेंद्र की शादी करीब 4 वर्ष पूर्व गांव चुवास-फतेहपुर में प्रियंका के साथ हुई थी। उसके 2 साल की बेटी है। पांच भाई बहनों में राजेन्द्र चौथे नम्बर का था, एक बहन इससे छोटी है। राजेंद्र के पिता व माता गांव में ही कृषि कार्य करते हैं तथा राजेंद्र का एक भाई दुबई में मजदूरी करता है तो दूसरा भाई माता-पिता का कृषि कार्य में हाथ बंटाता है।

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