VIDEO: विधानसभा का भावी सत्र इसी माह में, स्पीकर डॉ सीपी जोशी के समक्ष रहेगी ये चुनौतियां 

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/06/16 11:55

जयपुर: विधानसभा का भावी सत्र इसी महिने के आखिर में शुरु हो रहा है. इस दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने होंगे और परिस्थितियां हंगामेदार बन सकती है. ऐसे में सदन को सुचारु चलाना किसी  चुनौती से कम नहीं होगा. संसदीय प्रणाली के गहरे जानकार और विधानसभा के अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी किस तरह सदन चलायेंगे, यह देखना अहम रहेगा. विधानसभा के पहले सत्र में भी उन्होंने नियम और परम्पराएं स्थापित करने की कोशिश की थी. पहली बार बने विधायकों को वे ट्रैनिंग भी दिलाना चाहते है. देखते है खास रिपोर्ट: 
 
रह चुके हैं साइकोलॉजी के प्रोफेसर:
प्रदेश कांग्रेस के नेताओं को तो ' स्कूल ऑफ सीपी जोशी 'का पाठ्यक्रम पता है, लेकिन राज्य के विधायकों खासतौर पर विपक्ष को इसका भली भांति अंदाजा नहीं है. पहला सत्र तो अभिवादन और नियम समझने के दौर में ही गुजर गया. अब सही मायने में डॉ सीपी जोशी की प्रोफेसर शैली सदन को नजर आने वाली है. नियम, मर्यादा और परम्परा हमें देखने को मिल सकती है. साइकोलॉजी के प्रोफेसर डॉ सीपी जोशी ने राजनीति में आने से पहले लंबा समय उदयपुर के सुखाड़िया विश्वविद्यालय में छात्रों को पढ़ाने में बिताया है. वे संसदीय प्रणाली के गहरे जानकारों में गिने जाते है. सत्ता और विपक्ष में रहते हुये विधायक बने. देश के सबसे बड़े सदन लोकसभा के भी सदस्य और केन्द्र में कैबिनेट मंत्री का पद संभाल चुके है. लोकसभा में जीत के बाद बीजेपी उत्साह से लबरेज है, जाहिर सदन में यह जोश उनकी क्षमताओं को बढाने का काम करेगा. लिहाजा सत्तापक्ष पर तीखे हमले देखने को मिलेंगे. ऐसे में हंगामे के आसार बढ़ेंगे और सदन को सुचारु चलाना स्पीकर के लिये किसी चुनौती से कम नहीं होगा. 

स्पीकर डॉ सीपी जोशी के समक्ष चुनौतियां !
—प्रश्नकाल की कार्यवाही को सुचारु चलाना, इसे बाधित होने से रोकना
—प्रश्नकाल सदन की कार्यवाही का शुरुआती और अहम भाग होता
—लोकसभा में भी यह गरिमा मय ढंग से चलता है
—इस दौरान मंत्री देते है प्रश्नों के जवाब 
—स्पीकर की कोशिश रहेगी प्रश्नकाल हंगामा रहित रहे
—सदन में संसदीय गरिमा को बनाये रखना
—नये विधायकों को संसदीय प्रणाली का ज्ञान कराना
—विपक्ष को भी उचित अवसर देना
—प्रश्नों के उत्तर के लिये शासन तंत्र पर कड़ी निगाहें रखना
—ब्यूरोक्रेसी को सदन के प्रति मर्यादित रखना
—सदन में कार्यवाही के अधिक दिवस हो यह व्यवस्था करना
—पक्ष-विपक्ष में नाहक टकराव पर अंकुश लगाना
—सदन को सार्थक चर्चा का मंच बनाना
—राजस्थान के विकास में विधानसभा के जरिये मार्ग प्रशस्त करना
—आसन पर बैठकर न्याय करना

नवीन इमारत हंगामे का अखाड़ा:
डॉ सीपी जोशी के लिये यह किसी गौरव से कम नहीं है कि वे जिस आसन पर विराजमान है. वहां बैठकर दिग्गज सियासी हस्तियों ने राजस्थान विधानसभा की गरिमा को बढ़ाने का काम किया और देशव्यापी मिसाल कायम की. विधानसभा के अध्यक्ष पद पर नरोत्तम लाल जोशी, रामनिवास मिर्धा, निरंजननाथ आचार्य, महारावल लक्ष्मण सिंह, गोपाल सिंह भाद्राजून, पूनमचंद विश्नोई, गिरिराज प्रसाद तिवाडी, परसराम मदेरणा, हीरालाल देवपुरा, हरिशंकर भाभड़ा, सुमित्रा सिंह सरीखे दक्ष नेताओं ने अपनी छाप छोड़ी. पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दीपेन्द्र सिंह शेखावत तो आज भी विधानसभा के सदस्य है. डॉ सीपी जोशी ने तो अधिकांश पूर्व अध्यक्षों की शैली को देखा और समझा है. पुरानी विधानसभा के मुकाबले विधानसभा की नवीन इमारत हंगामे का अखाड़ा बनती हुई अधिक नजर आई है, यहां सार्थक बहस की जगह बेवजह के विवाद में अमूल्य समय बर्बाद होता नजर आया है. उल्लेखनीय है कि जनता की गाढ़ी कमाई से निकला लाखों रुपया सदन की कार्यवाही पर खर्च होता है. लिहाजा सत्ता और विपक्ष का कर्तव्य रहता है कि लोकतांत्रिक ढंग से विधानसभा चले. 

... संवाददाता नरेश शर्मा के साथ योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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