शिक्षा के क्षेत्र में मिसाल कायम कर रहा ये सरकारी स्कूल

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/01/15 11:57

आहोर(जालोर)। एक तरफ जहां सरकारी स्कूलों से आमजन का मोह भंग होते जा रहा है वही प्रदेश में एक ऐसा भी स्कूल है जहां प्राइवेट स्कूल के बच्चे भी अपनी टीसी लेकर इस सरकारी स्कूल में प्रवेश ले रहे हैं। हम बात कर रहे हैं जालोर जिले की आहोर तहसील के ऊण गांव की सीनियर हायर सेकेंडरी स्कूल की, जो आजकल पूरे क्षेत्र में एक मिसाल कायम कर रही है। इस स्कूल में कार्यरत अध्यापिका सैय्यद साजिदा अली ने बच्चों को पढ़ाने की अपनी कला से खासा प्रभावित किया है। बच्चों को जहाँ आजकल कम्प्यूटर और मोबाइल पर खेलने का बड़ा शौक है बस बच्चों के उसी शौक को इन अध्यापिका ने अपनी पढ़ाई करवाने का कौशल बना दिया । मोबाइल और कम्प्यूटर की इमोजी को ही इन्होंने पढ़ने की कला बना दिया जिसे बच्चे पढ़ाई में खासी रुचि ले रहे हैं। 

इमोजी के जरिये बच्चों को विलोम शब्द, पर्यावाची शब्द, जैसे महत्वपूर्ण शब्द सिखाए जा रहे हैं। आपको बता दे कि इस पूरी पद्धति को टीएमएल पद्धति कहा जाता है और इसमें बड़ी सामग्री भी लगती है लेकिन ये सामग्री खरीदने के लिए सरकार की ओर से कोई बजट जारी नही होता। लेकिन अध्यापिका का जज्बा देखिए... खुद की सैलरी से खर्च करके इन बच्चों के लिए हर महीने सामग्री खरीदकर बच्चों को पढ़ाने का बीड़ा उठा लिया है। सबसे बड़ी बात आज जहां पूरा देश हिन्दू मुस्लिम धर्म, जाति के बंधन में जकड़ा हुआ है वही ये मैडम जाति-पाँति और धर्म से ऊपर उठकर अपने कर्तव्य के प्रति निष्ठावान नज़र आ रही है। 

आपको बता दे इस स्कूल में एक भी मुसलमान बच्चा पढ़ने नही आता, जबकि अध्यापिका खुद मुसलमान होने के बावजूद इन हिन्दू बच्चों के लिए अपना तन मन और धन तक दे रही है। मैडम के इसी हौसले को देखते हुए गांव के करीब दो दर्जन से ज्यादा छात्र-छात्राएं जो निजी स्कूलों में पढ़ रहे थे... वो बच्चे अब इस सरकारी स्कूल में प्रवेश लेकर पढ़ाई कर रहे हैं।
विक्रमसिंह करणोत, 1st इंडिया न्यूज आहोर

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