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ग्राम सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से ही किया जाएगा सरकारी बीज का वितरण

ग्राम सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से ही किया जाएगा सरकारी बीज का वितरण

जयपुर: किसानों को सरकारी बीज का वितरण केवल ग्राम सेवा सहकारी समितियों एवं क्रय विक्रय सहकारी समितियों के माध्यम से ही किया जाएगा. सरकारी अनुदान पर प्रमाणिकृत बीज का फायदा किसानों को मिल सकें एवं बीज की कालाबाजारी जैसी संभावाना को पूर्णतया समाप्त किया जा सके. इस निर्णय से राज्य में सहकारिता के ढ़ाचे को भी मजबूती मिलेंगी. 

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बीज की आपूर्ति सहकारी संस्थाओं को की जाएं:
आज सरकार भवन में पहली बार कृषि और सहकारिता विभाग के अधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई. बैठक में प्रमुख सचिव एवं रजिस्ट्रार नरेश पाल गंगवार ने निर्देश दिये कि राजस्थान बीज निगम के माध्यम से बीज की आपूर्ति सहकारी संस्थाओं को की जाएं. उन्होंने कहा कि बीज उत्पादन के लिए भी ग्राम सेवा सहकारी समितियों एवं क्रय विक्रय सहकारी समितियों को तैयार किया जाएगा. 

बीज निगम एवं सहकारी समितियों के मध्य एमओयू किया जाएं:
उन्होंने निर्देश दिये कि इसके लिए बीज निगम एवं सहकारी समितियों के मध्य एमओयू किया जाएं. रजिस्ट्रार ने कहा कि बदलते दौर में सहकारी समितियों के कार्यो में विविधता लाना आवश्यक है तथा नए तरीके से सोचते हुए ग्राम सेवा सहकारी समितियों एवं क्रय विक्रय सहकारी समितियों को आपस में लिंक कर नई कार्ययोजना के साथ इन्हें आगे बढ़ाया जाए. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति वर्ष 2019 में जारी की है जिसका फायदा ग्राम सेवा सहकारी समितियों एवं क्रय विक्रय सहकारी समितियों को मिलना चाहिए. सहकारी समितियों में वेयरहाउस निर्माण, प्लेज ऋण की सुविधा से जोड़ा जाए तथा ऑर्गेनिक उत्पादों को सहकारी समितियों से लिंक कर किसान को वास्तविक फायदा दिलाया जाए. 

सहकारी समितियों को खाद-बीज के व्यवसाय से ऊपर उठाना होगा: 
उन्होंने कहा कि सहकारी समितियों को खाद-बीज के व्यवसाय से ऊपर उठाना होगा तथा उन्हें व्यावसायिक खरीद के रूप में विकसित कर वेयरहाउस को मण्डी सबयार्ड के रूप में दर्जा दिलाने हेतु समितियों को आगे लाना होगा. किसान को उपज बेचान की खेत एवं गांव के पास नजदीक व्यवस्था मिल सके इसके लिए केवीएसएस को वेयरहाउस से लिंक किया जाएगा. उन्होंने कहा कि राज्य कि जीएसएस एवं केवीएसएस को बड़े कस्टम हायरिंग सेन्टर के रूप में विकसित किया जाएगा. उन्होंने निर्देश दिये कि सहकारी समितियों में प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए जिलेवार ग्राम सेवा सहकारी समितियों एवं क्रय विक्रय सहकारी समितियों का चयन किया जाए ताकि सरकार द्वारा दिये जा रहे अनुदान का लाभ मिल सके एवं कृषि निर्यात को बढ़ावा दिया जा सके.

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किसान पूर्णतया लाभान्वित होने से वंचित:
किसानों द्वारा उत्पादन किया जा रहा है लेकिन उत्पादन अनुरूप आय में अन्तर होने से किसानों को उनके द्वारा किये जा रहे उत्पादन का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है. कृषि प्रोसेसिंग में योगदान कम होने के कारण किसान पूर्णतया लाभान्वित होने से वंचित है उन्होंने निर्देश दिये कि सहकारी समितियों के साथ किसानों के सुदृढ़ीकरण की योजनाओं को पर कार्य किया जाए. उन्होंने  कहा कि कृषि एवं सहकारिता विभाग में बेहतर तालमेल से किसानों की आय में वृद्धि संभव है. सहकारी भर्ती बोर्ड ने सीनियर मैनेजर के 6, मैनेजर के 114, कम्प्यूटर प्रोग्रामर के 10 एवं स्टेनोग्राफर के 3 पदों पर परिणाम घोषित कर दिया है. उन्होंने निर्देश दिये कि संबंधित बैंकों को निर्देशित किया जाए कि चयनित 133 अभ्यर्थियों को शीघ्र नियुक्ति दी जाए. 

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जयपुर: कोरोना संकट के दौर में राज्य सरकार ने किसानों बड़ी राहत देते हुए दीर्घ कालीन कृषि ऋण लेने वाले काश्तकारों को 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान योजना की अवधि को 31 मार्च, 2020 से बढ़ाकर 30 जून, 2020 कर दिया गया है. अब समय पर ऋण का चुकारा करने वाले काश्तकारों को 6.65 प्रतिशत ब्याज दर से कृषि ऋण मिल पाएगा. 

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योजना की अवधि को 31 मार्च से बढ़ाकर 30 जून तक की अनुमति:
क़ोरोना महामारी के चलते देश भर में लॉकडाउन चल रहा हैं, जिसके कारण किसानों को योजना का पूरा लाभ नही मिल पा रहा था. सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने बताया कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को इस संबंध में अवगत कराया गया था, जिस पर मुख्यमंत्री  गहलोत ने तुरंत ही योजना की अवधि को 31 मार्च से बढ़ाकर 30 जून तक करने की अनुमति प्रदान कर दी हैं. उन्होंने बताया कि योजना 1 अप्रैल, 2019 से 31 मार्च, 2020 तक की अवधि में ऋण लेने वाले सभी किसानों पर लागू थीं, जिसे अब तीन माह के लिए बढ़ाया गया हैं ताकि प्रदेश के अधिक से अधिक किसानों को योजना का लाभ मिल पाये.

कृषकों को 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान देकर उन्हें राहत प्रदान की गई: 
दीर्घ कालीन कृषि ऋण 11.65 प्रतिशत की ब्याज दर पर देय होता है तथा समय पर ऋण चुकता करने वाले कृषकों को 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान देकर उन्हें राहत प्रदान की गई है. आंजना ने बताया कि यह योजना सहकारी भूमि विकास बैंकों से दीर्घ कालीन अवधि के लिए लेने वाले ऋणों पर लागू होगी. उन्होंने बताया कि यह ब्याज दर किसी भी वाणिज्यिक बैंक द्वारा ली जाने वाली ब्याज दर से सबसे कम है. रजिस्ट्रार नरेश पाल गंगवार ने बताया कि किसानों को कृषि कार्यों के लिए ऋण की सर्वाधिक आवश्यकता होती है, लेकिन ब्याज दर सर्वाधिक होने के कारण किसान को ब्याज चुकाने में परेशानी का सामना करना पड़ता था और कृषि कार्यों में रूकावट भी पैदा होती थी. सरकार के इस निर्णय से 30 जून तक सहकारी भूमि विकास बैंकों से ऋण लेने वाले सभी किसानों को योजना का लाभ मिलेगा.

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दीर्घ कालीन ऋण भी इस योजना में कवर होंगे:
किसान लघु सिंचाई के कार्य जैसे नवकूप/नलकूप, कूप गहरा करने, पम्पसैट, फव्वारा/ड्रिप सिंचाई, विद्युतीकरण, नाली निर्माण, डिग्गी/हौज निर्माण तथा कृषि यंत्रीकरण के कार्य जैसे ट्रेक्टर, कृषि यंत्रादि, थे्रसर, कम्बाईन हार्वेस्टर आदि को क्रय करने के लिए दीर्घ कालीन अवधि के लिए ऋण ले सकते हैं. डेयरी, भूमि सुधार, भूमि समतलीकरण, कृषि भूमि क्रय, अनाज/प्याज गोदाम निर्माण, ग्रीन हाउस, कृषि कार्य हेतु सोलर प्लांट, कृषि योग्य भूमि की तारबंदी/बाउण्ड्रीवाल, पशुपालन, वर्मी कम्पोस्ट, भेड़/बकरी/सुअर/मुर्गी पालन, उद्यानीकरण, ऊंट/बैल गाड़ी क्रय जैसी कृषि संबद्ध गतिविधियों हेतु लिए गए दीर्घ कालीन ऋण भी इस योजना में कवर होंगे. 

हरियाणा में खरीफ की फसलों के लिए नहीं होगी खाद की किल्लत, किसानों तक रेल, सड़क मार्ग से होगी आपूर्ति

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चंडीगढ़: कोरोना की जारी जंग के बीच हरियाणा में किसान सरकार की पहली प्राथमिकता में शामिल हैं. खरीफ फसलों की बुआई के लिए किसानों को खाद की कमी नहीं होने दी जाएगी. लॉकडाउन के दौरान सरकार ने रेल व सड़क मार्ग के जरिये पूरे प्रदेश में किसानों को खाद की आपूर्ति करने का निर्णय लिया है. इसके साथ ही सरकार किसानों को कीटनशानक भी मुहैया कराएगी. 

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सरकार की ओर से निर्देश जारी:
नेशल लिमिटेड पानीपत खाद का पर्याप्त मात्रा में उत्पादन करेगी. इस संबंध में सरकारी की ओर से निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं. खाद की कमी ना हो इसके लिए सरकारी, सहकारी व अन्य बिक्री केंद्रों को सुबह 10 बजे से एक बजे तक खोला जाएगा. किसानों की मांग अधिक होने पर जरूरत के हिसाब से रोस्टर तैयार कर निजी दुकानें भी खाद बिक्री के लिए अधिक्रत की जाएंगी.

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खाद को आवश्यक सेवाओं में किया शामिल:
इससे पहले केंद्र सरकार ने बीज व कीटनाशकों को लॉकडाउन में छूट दी थी, लेकिन उसमें खाद को शामिल नहीं किया था. अब हरियाणा सरकार ने इसे आवश्यक सेवाओं में शामिल करते हुए उत्पादन व आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है. बता दें कि हरियाणा में खाद की मांग लाखों टन में रहती है. कई बार स्टॉक कम रहने के चलते यहां मारपीट के मामले भी सामने आए हैं. ऐसे में सरकार नहीं चाहती कि कोरोना महामारी के बीच एक बार पुराना इतिहास दोहराया जाए.
 

सीएम गहलोत ने दी किसानों को बड़ी सौगात, मिलेगी बड़ी राहत

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जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने किसानों के हित में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के राज्यांश प्रीमियम के लिए किसान कल्याण कोष से 500 करोड़ रुपए देने की स्वीकृति प्रदान की है. इससे टिड्डी दल के हमले, बेमौसम बरसात एवं ओलावृष्टि से प्रभावित काश्तकारों को शीघ्र बीमे का मुआवजा मिलने से बड़ी राहत मिलेगी. 

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फसल बीमा राज्यांश प्रीमियम का भुगतान किया जा सकेगा:
कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने बताया कि किसानों के प्रति संवेदनशील मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के इस निर्णय से प्रदेश के 16 जिलों के लिए खरीफ-2019 तथा बेमौसम बारिश एवं ओलावृष्टि से प्रभावित 10 जिलों के लिए रबी-2019-20 का फसल बीमा राज्यांश प्रीमियम का भुगतान किया जा सकेगा. 

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पूर्व में भी किया था प्रावधान:
उन्होंने बताया कि इससे पूर्व में भी किसान कल्याण कोष से 500 करोड़ रुपए का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के राज्यांश प्रीमियम के रूप में भुगतान करने की स्वीकृति जारी की थी, जिससे गत वर्षों की देनदारियां एवं खरीफ-2019 के बीमा प्रीमियम का भुगतान किया गया था. कटारिया ने यह भी बताया कि राज्य सरकार किसानों के प्रति संवेदनशील है और उन्हें होने वाली हर कठिनाई के निराकरण के लिए सदैव तत्पर है.

कृषि विभाग ने कोरोना वायरस के चलते किसानों के लिए जारी किए दिशा-निर्देश, गंभीरता से करें पालन

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जयपुर: कृषि विभाग ने रबी फसलों की कटाई एवं थ्रेसिंग कार्य के दौरान कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन करने, मुंह पर मास्क लगाने और फसल कटाई उपकरणों एवं खाने-पीने के बर्तनों के उपयोग में पूरी सावधानी बरतने सहित विभिन्न दिशा-निर्देश जारी किए हैं.  

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फसल कटाई यथा सम्भव मशीन चलित उपकरणों से करें:                                    
कृषि मंत्री लालचन्द कटारिया ने काश्तकारों से फसल कटाई के दौरान कोविड-19 के खतरे को दूर करने के लिए विभागीय दिशा-निर्देशों की पूरी पालना करने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा कि विभागीय दिशा-निर्देशों के मुताबिक फसल कटाई यथा सम्भव मशीन चलित उपकरणों से करें. हाथ से चलने वाले उपकरण काम में लेने पर उपकरणों को दिन में कम से कम तीन बार साबुन के पानी से कीटाणु रहित करें. उन्होंने कहा कि किसान फसल कटाई में सामाजिक दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) की सख्ती से पालना करें. खेत में फसल काटने एवं खाना खाते समय एक व्यक्ति से दूसरे के बीच कम से कम 5 मीटर की दूरी रखें. खाने के बर्तन अलग-अलग रखें तथा प्रयोग के बाद साबुन के पानी से अच्छी तरह साफ करें.

काम में लिए जाने वाले उपकरण अलग रखें:
उन्होंने बताया कि कटाई के दौरान सभी व्यक्ति अपनी अलग-अलग पानी की बोतल रखें और मुंह पर मास्क का प्रयोग करें. खेत में पर्याप्त मात्रा में पानी एवं साबुन की व्यवस्था रखें. कृषि एवं सहकारिता विभाग के प्रमुख शासन सचिव श्री नरेशपाल गंगवार ने बताया कि फसल कटाई के दौरान एक व्यक्ति की ओर से काम में लिए जाने वाले उपकरणों को दूसरा व्यक्ति कतई काम में नहीं लें. कटाई करने वाले सभी व्यक्ति अपने-अपने उपकरण ही काम में लेवें. साथ ही कटाई के दौरान बीच-बीच में अपने हाथों को साबुन के पानी से अच्छी तरह साफ करते रहें. उन्होंने बताया कि फसल कटाई कार्य अवधि में पहले दिन पहने कपड़े दूसरे दिन काम में न लें. काम में लिए कपड़ों को अच्छी तरह धोकर धूप में सुखाने के पश्चात ही पुनः काम में लें. 

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सभी सावधानियों का गंभीरता से करें पालन:
कृषि आयुक्त डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि अगर किसी व्यक्ति को खांसी, जुकाम, बुखार, सिर दर्द, बदन दर्द आदि के लक्षण हो तो उसे फसल कटाई कार्य से अलग रखें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य कर्मी को सूचित करें. उन्होंने कहा कि थ्रेसिंग कार्य के दौरान भी इसी प्रकार सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क एवं खाने-पीने के बर्तनों के प्रयोग आदि में सभी सावधानियों का पूर्ण गंभीरता से पालन करें.
 

धनिये की फसल की धाक देश के कोने कोने में, झालावाड़ के धनिये की जबरदस्त डिमांड

धनिये की फसल की धाक देश के कोने कोने में,  झालावाड़ के धनिये की जबरदस्त डिमांड

झालावाड़: जिले में रबी की प्रमुख फसल धनिया बाजार में आने लग गया है और देश में  सबसे ज्यादा धनिये का उत्पादन राजस्थान में होता है. वहीं राजस्थान में सबसे ज्यादा उत्पादन झालावाड़ जिले में होता है. यह सरकारी आकड़े बताते है पूरे कोटा सम्भाग में सबसे ज्यादा धनिये की बुवाई भी झालावाड़ जिले में होती है. इस बार 53806 हेक्टेयर में धनिया की बुवाई हुई जो पर 1 हेक्टेयर पर 10 क्विंटल धनिया होने की संभावना है. 

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अच्छा भाव मिलने से किसान खुश:
इस बार धनिया अच्छा और बेहतरीन क्वालिटी का आ रहा है इससे किसान भी खुश है अच्छा भाव मिल रहा है. धनिये उत्पादन में हमेशा राजस्थान अग्रणी रहा है और झालावाड़ जिला धनिये की पैदावार उत्पादन और उच्च क्वालिटी चमक और सोंधी खुशबू में देश के कोने कोने में चमक बिखेर रहा है.  

धनिए को धूप में भी सुखाया जा रहा: 
झालरापाटन की कर्षि उपज मंडी महाराजा हरीश चंद्र कर्षि उपज मंडी में धनिये की जमकर आवक हो रही है और यहां हजारों की संख्या में धनिये की बोरियों की खरीद की जा रहा है साथ ही धनिए को धूप में भी सुखाया जा रहा है जिससे धनिया सुख जाए और स्टोर किया जा सके साथ ही यहां सभी कर्षि उपज मंडियों के धनिये की बम्फर आवक है यही नही देश के कोने कोने से व्यापारी व बड़ी बड़ी कम्पनियां यहा से धनिये की खरीद मंडी व्यापारीयो से खरीद रही है.  

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धनिये का भाव 5 से 8 हजार का चल रहा: 
धनिये का भाव 5 से 8 हजार का चल रहा है जो बहुत अच्छा दाम है जिससे जहा किसान भी खुश है व्यापारी भी खुश है की झालावाड़ का धनिया न केवल देश मे बल्कि खाड़ी देशों में भी अपनी चमक व खुशबू बिखेरता है.  

मंत्री 15 जिलों में ओलावृष्टि से खराबे की स्थिति का करेंगे आकलन, सीएम गहलोत ने दिए निर्देश

मंत्री 15 जिलों में ओलावृष्टि से खराबे की स्थिति का करेंगे आकलन, सीएम गहलोत ने दिए निर्देश

जयपुर: मुख्यमंत्री गहलोत ने राज्य में ओलावृष्टि से किसानों को हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए जिलों के प्रभारी मंत्रियों को निर्देश जारी किए हैं. 15 जिलों के प्रभारी मंत्री किसानों से मुलाकात तक ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का जायजा लेंगे. इसके बाद फसल खराब से पीड़ित किसानों को आपदा राहत नियमों के तहत जल्द से जल्द सहायता प्रदान की जाएगी. प्रभावित जिलों के प्रभारी मंत्री ओलावृष्टि से पीड़ित किसानों से मुलाकात के साथ ही जिला कलेक्टर और अन्य अधिकारियों के साथ भी बैठक कर नुकसान का आकलन करेंगे.  

15 जिलों के प्रभारी मंत्री करेंगे किसानों से मुलाकात:
अलवर में ममता भूपेश, बाड़मेर में बीडी कल्ला, भरतपुर में अशोक चांदना, दौसा में हरीश चौधरी, गंगानगर व हनुमानगढ़ में गोविंद सिंह डोटासरा, जयपुर में शांति धारीवाल,जोधपुर में लालचंद कटारिया,करौली में विश्वेंद्र सिंह, सवाई माधोपुर में टीकाराम जूली, बूंदी में प्रतापसिंह खाचरियावास, बीकानेर में सालेह मोहम्मद,चूरू में सुभाष गर्ग, झुंझुनूं में परसादीलाल मीणा और नागौर में सुखराम बिश्नोई फसल खराबे का आकलन करेंगे. 

बेमौसम की बारिश ने फेरा किसानों के अरमानों पर पानी, फसलें हुईं चौपट

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सिरोही: प्रदेश के सिरोही जिले में गुरुवार शाम हुई बेमौसम की बारिश ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया हैं. तीन चार माह से पाल पोष कर बड़ी की फसलें जब पकने के समय आया तो कुदरत के कहर ने किसानों को कहीं का नही छोड़ा. खेत में लहलहाती फसलें एक झटके में चौपट हो गई. किसानों के पास इस कुदरत के इस कहर का कोई उपाय नहीं बचा. कुछ बचा हैं तो बस इन किसानों के आंखों में आंसू और मन में सरकार से कुछ मदद की आश..

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जल्द गिरदावरी कर किसानों को दी जाएगी राहत: 
हालांकि प्रदेश सरकार के मुखिया ने गुरुवार को ही ट्वीट कर किसानों के इस दुःख की घड़ी में साथ देने और जल्द से जल्द गिरदावरी कर किसानों को राहत पहुंचाने की बात तो जरूर की हैं, पर ये राहत इन किसानों तक कब पहुंचेगी ये भविष्य के गर्भ में हैं. बैंक, सेठ, साहूकार और ना जाने किन किन से ऋण लेकर इन किसानों ने अपनी फसलों की बुवाई की थी. जिस बड़ा करने और पकने लायक बनाने में इन किसान परिवारों ने दिन रात एक कर दिया था. इन चार महीनों में ये किसान अपनी नींद तक भूल गए थे. 

ऊपर वाले के आगे किसी की नहीं चलती:
परिवार के हर सदस्य ने अपनी मेहनत कर इन फसलों को पकाने में अपनी अपनी भागीदारी निभाई थी, पर ऊपर वाले के आगे किसी की नहीं चलती. शायद ऊपर वाले को भी इन किसानों की खुशी देखी नही जा रही थी. और बरसात के महीनों में तरसाने वाले इंद्रदेव ने सर्दी के मौसम में ही बरसना शुरू कर दिया. और बरसात भी ऐसी की खेतों में पानी के नाले बहने शुरू हो गए. तेज़ हवा और बारिश के गठजोड़ ने किसानों को इस कदर दोहरी मार दी कि किसान न घर का रहा ना घाट का. 

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किसान धरती का अन्नदाता:
जिस किसान को धरती का अन्नदाता कहा जाता हैं, आज उसी अन्नदाता के घर खाना नही बन रहा हैं. इंद्रदेव के इस प्रकोप ने सिरोही जिले के किसानों के सारे सपने एक साथ मिट्टी पलित कर दिए हैं.गुरुवार तक जो किसान ठहाके लगाकर बात कर रहा था, आज उस किसान की हलक से एक शब्द तक नही निकल रहा हैं. हर चुनाव में किसानों के लिए बड़े बड़े वादे कर सरकार बनाने वाली पार्टियां कुदरत के कहर से टूटे इन किसानों को कब और कितनी राहत पहुंचती हैं ये देखने वाली बात होगी.
 

...विक्रम सिंह करणोत फर्स्ट इंडिया न्यूज सिरोही

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़े सवाल पर विधानसभा में हुआ जोरदार हंगामा

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जयपुर: प्रदेश के किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से मिलने वाले लाभ से जुड़े पहले ही सवाल पर आज प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष का इतना जमकर हंगामा हुआ कि कार्यवाही शुरू होने के 17 मिनट बाद ही उसे 1 घंटे के लिए स्थगित करना पड़ा. फसल बीमा योजना में राज्य का हिस्सा जमा नहीं होने और इसके चलते केंद्र   का भी अंशदान नहीं होने से किसानों को क्लेम का भुगतान नहीं हो पाएगा इससे जुड़े  भाजपा विधायक वासुदेव देवनानी के मूल सवाल और नेता प्रतिपक्ष के पूरक सवाल पर जब कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने राज्य का हिस्सा जमा नहीं कराने की बात मानी तो हंगामा हो गया और पूरा प्रश्नकाल  इस हंगामे की भेंट चढ़ गया क्योंकि 17 मिनट बाद ही विधानसभा अध्यक्ष ने  1 घंटे के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी.  

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प्रदेश में 2016 से फसल बीमा योजना लागू: 
विधानसभा में प्रश्नकाल के पहले सवाल पर ही जोरदार हंगामा हुआ. जब विधायक वासुदेव देवनानी ने पूछा कि प्रदेश के किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा से मिलने वाले लाभ की क्या स्थिति है इसके जवाब में कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने बताया कि प्रदेश में 2016 से फसल बीमा योजना लागू है. मंत्री ने बताया कि इस योजना में ऋण लेने वाले किसानों का अनिवार्य रूप से बीमा किया जाता है. ऋणी किसानों का बीमा स्वैच्छिक खरीद में 2 फ़ीसदी, रबी में डेढ़ फीसदी और बागवानी फसलों में 5 फीसदी प्रीमियम किसान देता है. शेष प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार देती है. मंत्री कटारिया ने बताया कि पिछली सरकार का 1135 करोड़ की राशि बकाया थी जिसे हमारी सरकार ने चुकाई. साथ ही अभी 399 करोड़ की देनदारियां बकाया है. 

कृषक कोष में 500 करोड़ का लोन लिया गया:
उन्होंने कहा कि कृषक कोष में 500 करोड़ का लोन लिया गया है. देनदारियां लगातार चुका रहे हैं. इस पर नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने पूरक प्रश्न किया कि क्या राज्यांश जमा नहीं होने पर बीमा कंपनी क्लेम देगी. जवाब में कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने कहा कि जब तक हम पूरा पैसा जमा नहीं कराते तब तक भारत सरकार से पैसा नहीं मिलता है. मंत्री ने कहा कि हमने नए बजट में 1000 करोड़ का प्रावधान रखा है. मंत्री के इसी जवाब से असंतुष्ट विपक्षी विधायकों ने सदन में हंगामा कर दिया और कहा कि राज्य सरकार किसानों के साथ धोखा कर रही है. 

विपक्षी विधायक इस बात पर वेल में आकर नारेबाजी करने लगे:
विपक्षी विधायक इस बात पर वेल में आकर नारेबाजी करने लगे. हालांकि एक बार स्पीकर के इस मुद्दे पर चर्चा के आश्वासन के बाद विधायक सीट पर पहुंचे. इस पर नेता प्रतिपक्ष कटारिया ने कहा कि यह गलत है राज्यांश जमा नहीं होने से किसानों को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा. दूसरी ओर लगातार जारी नारेबाजी के बीच विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने सदन को 1 घंटे के स्थगित करने के निर्देश दिए. 

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पहले सवाल पर ही कार्यवाही स्थगित करने के भी उदाहरण बेहद कम:
मौजूदा सत्र में यह पहला मौका है कि विधानसभा की कार्यवाही को 1 घंटे स्थगित करना पड़ा है वहीं पहले सवाल पर ही कार्यवाही स्थगित करने के भी उदाहरण बेहद कम हैं. हंगामा इतना ज्यादा था कि जब स्पीकर ने दूसरे सवाल के लिए नाम पुकारा और उसका जवाब सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने दिया तब शोर-शराबे में कुछ सुनाई नहीं दिया. इस दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सदन में मौजूद रहे.

...योगेश शर्मा नरेश शर्मा के साथ ऋतुराज शर्मा फर्स्ट इंडिया न्यूज़ जयपुर

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