60 दिन से रामदेवरा में फंसे श्रद्धालुओं का दल कर रहा गुजरात जाने की गुहार

60 दिन से रामदेवरा में फंसे श्रद्धालुओं का दल कर रहा गुजरात जाने की गुहार

रामदेवरा(जैसलमेर): बाबा रामदेव की समाधि के दर्शन व 21 दिन के अनुष्ठान करने के लिए आए गुजरात के श्रद्धालुओं का एक दल लॉक डाउन लगने से पहले ही यहां पर फंस गया था जो अभी तक 60 दिनों के पश्चात भी यहीं पर है. ऐसे में 20 दिन इन्होंने अपनी जमा पूंजी खर्च डाली शेष 40 दिन बमुश्किल किसी तरह इधर-उधर से मांग कर खाने-पीने का जुगाड़ किया. अब प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाकर अपने गृह नगर जाने की मांग कर रहे हैं. लेकिन प्रशासन से तीन बार इन श्रद्धालुओं के द्वारा गुहार लगाये जाने के बावजूद अभी तक इनको इनके गृह राज्य में जाने की अनुमति नहीं मिली है. 

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धर्मशाला में गुजराती श्रद्धालुओं का दल शरण लिए हुए: 
गुजरात के हिम्मतनगर जिले के बनासकांठा के रहने वाले गौतम दास बापू उनके साथ चार अन्य जने बाबा रामदेव की समाधि के दर्शन व अपने अनुष्ठान करने के लिए 3 मार्च को रामदेवरा आये थे. इनका 21 दिन का अनुष्ठान 25 मार्च को पूरा हुआ था. तब उन्हें इस बात का पता नहीं था कि ऐसा कुछ लॉक डाउन लगने वाला है. अचानक कोरोना वायरस के सक्रमण के चलते पूरे देश में लॉक डाउन लगा दिया गया तब से रामदेवरा स्थित कुमावत धर्मशाला में ये गुजराती श्रद्धालुओं का दल शरण लिए हुए हैं. उनके पास खाने-पीने का भी सामान नहीं है ना ही कभी सरकार की तरफ से पिछले 60 दिन में इनको कोई सरकारी सहायता मिली. शुरुआत के 20 दिन इनके पास रुपये थे. उससे इन्होने अपना खर्च चलाया था. गत 40 दिनों से ये लोगों के सामने हाथ फैलाने को मजबूर हो रहे हैं. ऐसे में रामदेवरा की बाबो भली करे स्वयंसेवी संस्था की तरफ से प्रतिदिन गरीबों को वितरित किए जाने वाले खाने को मांग कर ये दल अपना जीवन जीने को मजबूर है.  श्रद्धालुओं का दल सुबह शाम के समय खाना मांग कर खा रहे हैं. किसी तरह पिछले 40 दिनों से अपना गुजर-बसर कर विपरीत हालात में अपने आप को जीवित रखे हुए हैं.

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सभी श्रद्धालुओं की उम्र 60 वर्ष के करीब:
गुजरात के हिम्मतनगर में आश्रम के मठाधीश संत गौतम दास ने बताया कि वे तीन चार बार उपखंड अधिकारी के कार्यालय में जाकर अरदास लगा चुके हैं कि उन्हें यहां से जाने की अनुमति दी जाए लेकिन प्रशासन की तरफ से उनकी अरदास को अनसुनी कर दिया गया. दूसरे परदेश में जान पहचान का कोई भी व्यक्ति नहीं है ऐसे में पिछले 60 दिनों से धर्मशाला के बंद कमरे में रहते रहते सभी की तबीयत भी खराब होने लगी है. उनके पास पर्याप्त रुपये भी नही है. प्रशासन की तरफ से आज दिन तक उन लोगों की कोई सुध भी नहीं ली जा रही है. ऐसे में सभी गुजराती श्रद्धालुओं ने पब्लिक एप के माध्यम से जिला प्रशासन तक अपनी आवाज पहुंचा कर शीघ्र से शीघ्र यहां से उन्हें गुजरात जाने की अनुमति देने की मांग की है. पब्लिक एप से बात करते हुए सभी गुजराती श्रद्धालुओं की आंखों से अश्रु धारा बह निकली. किस तरह विपरीत हालात में उन्होंने ये दिन निकाले है. हजारों श्रमिक लोग सहित अन्य सभी यहां से जा चुके हैं वे लोग अभी भी 60 दिनों से यहां पर फंसे हुए मांग मांग कर खाने को मजबूर है. सभी श्रद्धालुओं की उम्र 60 वर्ष के करीब है. ऐसे में प्रदेश में बैठे श्रद्धालुओं के परिजन भी इनकी घर वापसी को लेकर बैचेन हैं. 

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