Gudi Padwa 2019: जानिए शुभ मुहुर्त और गुड़ी पड़वा का महत्व

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/04/06 11:54

आज 6 अप्रैल, शनिवार से नया हिन्दी वर्ष यानी नया संवत्सर 2076 शुरू हो रहा है। इस संवत्सर का नाम परिधावी है। हिन्दी नववर्ष के राजा शनि हैं और मंत्री सूर्य हैं। हिन्‍दू कैलेंडर के अनुसार गुड़ी पड़वा हर साल चैत्र (Chaitra) महीने के पहले दिन मनाया जाता है। चैत्र महीने की शुरुआत होते ही नौ दिनों तक चैत्र नवरात्रि की धूम रहती है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक यह त्‍योहार हर साल मार्च या अप्रैल महीने में आता है। इस बार गुड़ी पड़वा 6 अप्रैल को है। 

मराठी और कोंकणी हिन्‍दुओं के लिए गुड़ी पड़वा का विशेष महत्‍व है। इस दिन को वे नए साल का पहला दिन मानते हैं। गुड़ी का अर्थ होता है 'विजय पताका' और पड़वो यानी कि 'पर्व'। इस पर्व को 'संवत्‍सर पड़वो' के नाम से भी जाना जाता है। 

तिपदा तिथि प्रारंभ: 05 अप्रैल 2019 को दोपहर 02 बजकर 20 मिनट से 
प्रतिपदा तिथि समाप्‍त: 06 अप्रैल 2019 को दोपहर 03 बजकर 23 मिनट तक 

धार्मिक महत्व

एक धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन ब्रह्माजी ने सृष्टि का निर्माण किया था इस‍ीलिए गुड़ी पड़वा ‘नवसंवत्‍सर’ भी कहलाता ह इसके अलावा महान गणितज्ञ भास्कराचार्य ने इसी तिथि पर सूर्योदय इसके अलावा महान गणितज्ञ भास्कराचार्य ने इसी तिथि पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक दिन, महीने और वर्ष की गणना करते हुए ‘पंचांग’ भी रचा था। ‘गुड़ी पड़वा’ के अवसर पर आंध्रप्रदेश में एक विशेष प्रकार का प्रसाद वितरित किया जाता है।

मान्यता है कि बिना कुछ खाए-पीए यह प्रसाद जो भी व्‍यक्ति ग्रहण करता है, वह सदैव निरोगी रहता है, उससे बीमारियां दूर रहती हैं साथ ही यह प्रसाद चर्मरोग से भी मुक्ति दिलाने वाला होता है। भारत के महाराष्‍ट्र, आंध्रप्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में यह पर्व 9 दिनों तक विशेष विधि विधान और पूजा से मनाने का चलन है इस उत्सव का समापन रामनवमी के दिन किया जाता है। 

गुड़ी पड़वा के मौके पर दिन की शुरुआत पारंपरिक तेल स्‍नान से की जाती है। इसके बाद घर के मंदिर में पूजा की जाती है और फिर नीम के पत्तों का सेवन किया जाता है। नीम के पत्तों को खाना विशेष रूप से लाभकारी और पुण्‍यकारी माना जाता है। महाराष्‍ट्र में इस दिन हिन्‍दू अपने घरों पर तोरण द्वार बनाते हैं।

साथ ही घर के आगे एक गुड़ी यानी कि झंडा रखा जाता है। एक बर्तन पर स्वास्तिक बनाकर उस पर रेशम का कपड़ा लपेट कर रखा जाता है। घरों को फूलों से सजाया जाता है और सुंदर रंगोली बनाई जाती है। इस दिन मराठी महिलाएं नौ गज लंबी नौवारी साड़ी (Nauvari Saree) पहनकर पूजा-अर्चना करती हैं। गुड़ी पड़वा पर घर-घर में श्रीखंड, पूरन पोली और खीर जैसे कई मीठे पकवान बनाए जाने की परंपरा है। 


 

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