हनुमान जयंती विशेष : इस गांव में अतिप्राचीन मंदिर में हुआ था बजरंग बली का जन्म

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/03/31 12:45

नई दिल्ली। देशभर में आज हनुमान जयंती की धूम है और हर मंदिर में विशेष श्रंगार-झांकी के साथ पूजा-अर्चना का दौर जारी है। हनुमान जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह समेत कई लोगों ने सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दी है। पीएम मोदी ने माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर ट्वीट कर कहा है कि, 'आप सभी को हनुमान जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं। Greetings to everyone on the auspicious occasion of Hanuman Jayanti.' वहीं अमित शाह ने भी अपने ट्वीट में सभी को हनुमान जयंती की शुभकामनाएं दी है।

हनुमान जयंती के अवसर पर आज देशभर के मंदिरों में विशेष श्रंगार के साथ ही पूजा—अर्चना का क्रम जारी है। श्रद्धालुगण अलसुबह से ही अपने ईष्ठदेव हनुमान के दर्शनों के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं कई स्थानों पर हनुमानजी की झांकियां भी निकाली जा रही है। देशवासियों को दी गई शुभकामना में पीएम मोदी ने जो तस्वीर शेयर की है, वह अहमदाबाद के कैंप हनुमान मंदिर की है।

2010 में गुजरात के सीएम रहते हुए वह हनुमान जयंती पर बजरंगबली के दर्शन करने पहुंचे थे। श्रीकैंप हनुमान मंदिर भारत के बड़े हनुमान मंदिरों में से एक है। यह हनुमान मंदिर अहमदाबाद के शाहीबाग कैंटोनमेंट एरिया में स्थित है। इस मंदिर में देश के पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी भी दर्शन कर चुके हैं। इसी प्रकार से भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी हनुमानजी की एक तस्वीर के साथ सभी की हनुमान जयंती की शुभकामनाएं दी है।

हनुमान जयंती के विशेष अवसर पर आज यह जानना भी जरूरी हो जाता है कि हनुमानजी का जन्म स्थान कहां है। जहां हम दर्शन कर पुण्य की प्राप्ति कर सकते हैं। जी हां, हम आज बात कर रहे हैं, मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में स्थित टिहरका गांव की। यहां की पौराणिक मान्यता और त्रेता युग के किस्सों में हनुमानजी के जन्म से जुड़ी बातें बताई जाती हैं। वहीं इस गांव में स्थित मंदिरों में पूजा करने के लिए भक्त सिर्फ इसलिए आते हैं कि यहां हनुमानजी ने जन्म लिया था। 

दरअसल, टिहरका गांव में हनुमानजी का अतिप्राचीन मंदिर है, इस मंदिर के बारे में पौराणिक मान्यता है कि भगवान हनुमानजी ने इसी गांव में जन्म लिया था। इसी पावन पवित्र धरा पर चैत्र शुक्ल पक्ष दिन मंगलवार को मारुतिनंदन का जन्म हुआ। अंजनी माता अपने पति केशरी के साथ सुमेरु पर्वत पर निवास करती थीं। जब कई सालों तक माता अंजनी को संतान प्राप्त नहीं हुई तो मतंग ऋषि के कहने पर टिहरका गांव के पर्वत पर करीब 7 हजार सालों तक निर्जल तप किया, तबसे बिल्व की आकृति का पर्वत अडिग खड़ा है।

इसी पर्वत के नीचे भगवान महादेव का धाम भी है। यहां माता अंजनी तपस्या करके पूर्व दिशा में स्थित आकाश गंगा में स्नान करती थीं। वे दोनों कुंड इस गांव में आज भी मौजूद हैं, जिनका पानी कभी नहीं सूखता है। हनुमानजी के जन्म को लेकर इस गांव में एक और किवंदति है कि जिस यज्ञ से भगवान राम का जन्म हुआ था, उसी यज्ञ के प्रसाद से हनुमान जी का भी जन्म हुआ था। जब राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिये यज्ञ कराया तब यज्ञ के बाद ऋषि वशिष्ठ ने चारों रानियों को खीर का प्रसाद दिया था।

इसी दौरान कैकई के हाथ से प्रसाद का कुछ भाग छीनकर एक चील ले भागा। रास्ते में तूफान से उस चील के हाथ से प्रसाद गिर गया। उसी समय पवन देव ने पर्वत पर तपस्या कर रही अंजनी माता के हाथ पर वह प्रसाद डाल दिया, जैसे ही माता ने वह प्रसाद ग्रहण किया, हनुमानजी गर्भ में आ गए और इस तरह हनुमानजी ने टिहरका गांव में जन्म लिया।
 
टिहरका गांव के इस सिद्ध धाम में बाल हनुमान के साथ माता की पांच मूर्तियां विरजित हैं। कहते हैं कि हनुमानजी के जन्म के बाद शेष नाग दर्शन के लिए आए थे। यहां बाल हनुमान और शेष नाग की मूर्ति भी दर्शन देती है। कहते हैं संकटों के बादल जब छाने लगें और दु:ख जब पहरा देने लगे तो इस धाम पर सच्चे मन से प्रार्थना करें। सारे कष्ट हर जाएंगे।

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