पुलवामा हमले में राजस्थान के 5 जवान शहीद, शहीद के गांव में हृदय विदारक नजारा

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/02/15 05:58

जयपुर। जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले में अवंतिपोरा के पास कल सीआरपीएफ के काफिले पर हुए फिदायीन हमले में देश के 40 वीर जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी है। इन 40 जवानों में 5 जवान राजस्थान के भी थे, जिन्होंने अपना जीवन देश सेवा में बलिदान कर दिया है। इनमें से एक शहीद का परिवार ऐसा भी है, जिसमें सिर्फ शहीद के भाई को ही उनके भाई के शहीद होने की जानकारी है। जबकि उनका पूरा परिवार एक कार्यक्रम में मशगूल है, ऐसे में शहीद के इस भाई ने अपना भाई खोने के गम को मजबूरन मन में दबा रखा है।

पुलवामा हमले को लेकर अब पूरे देश में आक्रोश दिखाई दे रहा है, वहीं शहीदों के परिवारों में मातम पसरा हुआ है। इस हमले ने किसी से उसका बेटा छीना है, तो किसी बच्चे से उसका पिता, कहीं किसी बहिन ने अपना भाई खोया है, तो कहीं किसी सुहागिन की मांग की सिंदूर उजड़ गया है। ऐसे में अब पूरा देश यही कह रहा है कि, 'बस, अब बहुत हो गया। अब न आंसू चाहिए, न निंदा और न ही कोई संवेदना। शहीदों को इस हमले का जवाब चाहिए।'

इस हमले में शहीद होने वाले 40 जवानों में राजस्थान के भी 5 जवान शामिल थे, जो कि सभी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में तैनात थे और अपनी अपनी ड्यूटी पर लौट रहे थे। राजस्थान के इन अमर शहीदों की पहचान शाहपुरा—जयपुर के रोहिताश लांबा, सांगोद—कोटा के हेमराज मीणा, सुंदरावली—भरतपुर के जीतराम गुर्जर, राजाखेड़ा—धौलपुर के भागीरथ कसाना और बिनोल—राजसमंद के नारायण लाल गुर्जर के रूप में की गई है।

मुख्यमंत्री गहलोत और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी है। राजस्थान पुलिस ने भी शुक्रवार को शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। पुलिस महानिदेशक कपिल गर्ग के नेतृत्व में अधिकारियों व पुलिस कर्मियों ने दो मिनट का मौन रखकर शहीद जवानों के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त की।

हृदय विदारक नजारा :
शहीद रोहिताश लाम्बा के परिवार में अभी सिर्फ भाई को ही बताया गया, जबकि उनके परिवार वालों को इस हादसे के बारे में नहीं बताया गया है। दरअसल, गांव में तेजाजी के मंदिर पर भंडारा का कार्यक्रम है और उसकी तैयारी के लिए लकड़ियां मंगवाई गई, लेकिन अब भंडारा तो नहीं होगा, लेकिन ठीक उसी जगह पर शहीद रोहिताश की अंत्येष्टि होगी और जो लकड़ियां भंडारे मे खाना बनाने के लिए मंगवाई गई थी, उनसे अब राजस्थान के इस वीर जवान की अंत्येष्टि होगी।

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