हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद धडल्ले से हो रहा अवैध बजरी खनन

FirstIndia Correspondent Published Date 2016/07/01 16:52

चित्तौड़गढ़। एक दौर था, जब राजस्थान में पीले सोने की खेती यानि 'सरसों की खेती' की जाती थी। लेकिन आज बिना मेहनत के नदियों के पेटे से नौंच-नौंचकर दूसरा पीला सोना निकाला जा रहा है। जी हां, हम बात कर रहे हैं बजरी की, जो सरकार के राजस्व आय का एक बहुत बड़ा माध्यम हो सकता है। लेकिन इस बजरी को नदी के पेटे से अवैध रूप से भारी—भकरम मशीनों की सहायता से निकाला जा रहा है। इसके बावजूद अवैध बजरी खनन को रोकने की बजाय प्रशासन मूकदर्शक बनकर तमाशा देख रहा है।

 
एक पूरा माफिया इस अवैध बजरी दौहन में अपनी दमदार भूमिका निभा रहा है। अवैध बजरी दौहन का यह खुला खेल चित्तौड़गढ़ जिले कि राशमी क्षेत्र में खेला जा रहा है, जहां 24 घंटे लगातार बनास नदी के पेटे से बजरी का अवैध खनन किया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी एक दूसरे विभागों पर अपनी जिम्मेदारी डालकर कार्यवाही करने से बचते नजर आ रहे हैं।

 
जिले के राशमी क्षेत्र से होकर भीलवाड़ा जिले की सीमा में प्रवेश करने वाली बनास नदी अवैध खनिज बजरी माफिया का अड्डा बनी हुई है। इस बनास नदी से लेकर राशमी से लेकर उनरेड़ा, मरमी, सांखली पहुंना, सौमी सहित दर्जनभर गांव के बीच होकर गुजर रहे पेटे से भारी भरकम अर्थमूविंग मशीनों से लेकर ट्रेक्टर डम्पर की मदद से बजरी दौहन का खुला खेल 24 घंटे खेला जा रहा है। सराकार ने जहां अवैध खनन रोकने के आदेश दे रखे हैं, वही इस खनिज माफिया के साथ मिलीभगत के चलते पुलिस के अधिकारी संयुक्त कार्यवाही का आदेश दिखाकर इस अवैध खनन को स्वीकृति देते नजर आते हैं।

 
जिले के किसानों की इस प्राणदायिनी गंगा में बीस फीट से गहरे गढ्ढे खोदकर नदी के बहाव को रोकने की इस साजिश को स्थानीय प्रशासन शह देता नजर आ रहा है। गौरतलब है कि बनास नदी के पेटे में जहां पहले खनिज अधिकारी आसिफ अंसारी के डर से खनिज माफिया रात के अंधेरे में खनन करता था। उसी आसिफ अंसार को एपीओ किये जाने के बाद इस खनिज माफिया के हौसले इतने बुलंद हें कि दिनदहाड़े इस बनास के पेटे भारी भरकम मशीन की सहायता से दौहन किया जा रहा है।


बजरी माफिया के हौसले इतने बुलन्द है कि माननीय उच्च न्यायालय की निगरानी कमेटी के कमीश्नर ने जब इस क्षेत्र में दौरा किया था, तो उसी समय नदी के पेटे खनन करती एक जेसीबी को टीम ने खुद पकड़ लिया था। इसका खामियाजा तत्तकालीन थानाधिकारी भूपसिंह को भुगतना पड़ा था, जिन्हें इस दौरे के बाद नाॅन फिल्ड पोस्टिंग के लिए रवाना कर दिया था। हालांकि जिला पुलिस अधीक्षक ने इस मामले में कोई खुलासा नही किया था और न ही नाॅन फिल्ड पोसटींग का कोई कारण बताया गया था। लेकिन सूत्रों का कहना हें कि भूपसिंह की इस नाॅन फिल्ड पोस्टिंग के पीछे बजरी ही कारण रही है।

 
अपने समय के दौरान हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त कमीश्नर ने जमकर अधिकारियों को लताड़ लगाई थी और इस अवैध खनन को रोकन के लिए सख्त निर्देश दिये थे, लेकिन उच्च न्यायाल के सीधे हस्तक्षेप के बाद भी यह अवैध बजरी खनन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। बल्कि कमीशनर के दौर के बाद और मानसून की दस्तक के चलते चार गुना गति से यह बजरी खनन धडल्ले से चल रहा है। 

 

Rajasthan High Court, Illegal Mining, Gravel, Chittorgarh

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