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राजधानी में पेंट की दुकान में लगी भीषण आग, दमकल की कई गाड़ियां मौके पर मौजूद 

राजधानी में पेंट की दुकान में लगी भीषण आग, दमकल की कई गाड़ियां मौके पर मौजूद 

जयपुर: राजधानी के गोपाल बाड़ी स्थित पेंट की दुकान में आज भीषण आग लग गई. रेलवे स्टेशन के पास इस आग ने धीरे धीरे विकराल रूप धारण कर लिया और कई घरों को अपनी चपेट में ले लिया. हालांकि मौके पर पहुंची दमकल की कई गाड़ियों ने आग पर काबू पा लिया. इस घटना में किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है. 

घटना शाम करीब 5 बजे की बताई जा रही. फ़िलहाल आग लगने के कारणों  का पता नहीं चल पाया है. आग इतनी भीषण थी कि पुरे इलाके में धुंआ ही धुंआ हो गया. आग की सूचना मिलते ही दमकल की कई गाड़ियां और पुलिस मौके पर पहुंची और बचाव कार्य अभियान चलाया गया. हालांकि आग से आसपास की कई दुकानों को नुकसान पहुंचा है. 

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जयपुर: राजस्थान में सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते मामलों से चिंतित मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दुर्घटनाओं में 50 प्रतिशत कमी लाने के निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम में गहलोत ने कहा की जिस तरह से पायलट कड़ी ट्रेनिंग और गाइडलाइन को फॉलो करते हैं प्रदेश में भी इसी तरह के नियम कायदों की पालना होनी चाहिए. भीलवाड़ा डेयरी संघ ने अभिनव पहल करते हुए प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के मकसद से 15000 पशुपालकों को हेलमेट वितरित किये है.

वीसी के जरिए हुआ कार्यक्रम का उद्घाटन:
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए CMR से इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया. मुख्यमंत्री आवास पर भीलवाड़ा से आए दो पशुपालकों को हेलमेट भी दिए गए. इस मौके पर CM  गहलोत ने पहल की सराहना करते हुए कहा कि जैसे दो पशुपालकों को अच्छी क्वालिटी के हेलमेट दिए गए हैं बाकी हेलमेट भी उसी क्वालिटी के होने चाहिए. इस पर डेयरी संघ के अध्यक्ष रामलाल जाट ने आश्वस्त किया कि सभी पशुपालकों को अच्छी क्वालिटी के ही हेलमेट वितरित किए जा रहे हैं.

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रोड सेफ्टी पाठ्यक्रम में भी करवाया जाएगा शामिल:
रॉड शेफटी पर बल देते हुए गहलोत ने कहा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने जुर्माना राशि में बढ़ोतरी के साथ साहस का काम किया है. हालांकि जुर्माना राशि अधिक होने की वजह से प्रदेश में इसमें संशोधन किया गया है लेकिन इस संशोधन की पालना पुलिस विभाग को सख्ती से करवानी होगी. मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये है कि रॉड सेफ्टी के बारे में पाठ्यक्रम में भी उल्लेख होना चाहिए. सीएम ने कहा पहले राजस्थान की सड़कों की हालत अच्छी नहीं थी लेकिन अब पड़ोसी राज्यों के मुकाबले राजस्थान की सड़कें बेहतर हो गई हैं. मुख्यमंत्री ने कहा जिस तरह से कोरोना के समय भीलवाड़ा मॉडल की तारीफ देशभर में हुई है उसी तरह से भीलवाड़ा के इस प्रयोग वह भी अन्य जिलों में नागरिक फॉलो करेंगे. 

जल्द जयपुर में एक बड़े सम्मेलन का होगा आयोजन:
कार्यक्रम में परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहां कि प्रदेश में सड़क दुर्घटना में जागरूकता के लिए जल्दी जयपुर में एक बड़े सम्मेलन का आयोजन करवाया जाएगा. गोपाल मंत्री प्रमोद भाया जैन ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व और भीलवाड़ा डेयरी संघ के प्रयासों की सराहना की. वहीं कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने कहा यह कार्यक्रम अनुकरणीय है ऐसे कार्यक्रम और अधिक होने चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों और पशुपालकों के कई अहम घोषणा कर चुकी है और भविष्य में भी इनके हित को देखते हुए ही फैसले किये जायेंगे. 

प्रदेशवासियों के जीवन की रक्षा सर्वोपरि:
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के लिए प्रदेशवासियों के जीवन की रक्षा सर्वोपरि है. इसलिए सड़क सुरक्षा नियमों की पालना सुनिश्चित करवाने और दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से वाहन चालन से जुड़े अपराधों के प्रति कड़ा रूख अपनाया जा रहा है. उन्होंने आमजन से अपील की है कि वे वाहन चलाते समय सड़क सुरक्षा संबंधी सभी नियमों की आवश्यक रूप से पालना करें. यह उनके जीवन की रक्षा के लिए बेहद जरूरी है. 

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जयपुर: सालों पहले लगे पेसमेकर में संक्रमण होने के कारण उसे तार समेत हार्ट से निकालने के जटिल केस को शहर के डॉक्टर्स ने सफलतापूर्वक कर दिखाया. प्रदेश में पहली बार इस तरह का केस हुआ है जब मरीज को 27 साल पहले लगे पेसमेकर और तार को इंफेक्शन होने पर बिना ओपन हार्ट सर्जरी के हृदय में से निकाला गया. लीड एक्सट्रैक्शन नामक यह प्रक्रिया इतनी जटिल थी कि तार निकालने में जरा भी चूक होती तो मरीज की उसी समय मृत्यु हो सकती थी. शहर के इटरनल हॉस्पिटल में डॉक्टर्स ने नई तकनीक लीड लॉकिंग डिवाइस और टाइट रेल डिवाइस की सहायता से इसे सफल बनाया.

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मात्र 14 वर्ष की उम्र में पेसमेकर लगाया गया था: 
इटरनल हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल व इलेक्ट्रोफिजीयोलॉजी डायेक्टर डॉ. जितेंद्र सिंह मक्कड़ ने बताया कि जयपुर से ही 41 वर्षीय मरीज को कम धड़कन के चलते मात्र 14 वर्ष की उम्र में पेसमेकर लगाया गया था. अब तक दो बार उनके पेसमेकर की बैटरी बदली गई. कुछ माह पहले पेसमेकर की जगह में सूजन व मवाद निकलने की स्थिति मे उन्हें इटरनल हॉस्पिटल दिखाया गया जहां कुछ टेस्ट होने के बाद यह पता चला कि उनके पेसमेकर और तार में इंफेक्शन हो गया है. डॉ. मक्कड़ ने बताया कि अगर यह समय पर नहीं निकाला जाता तो इंफेक्शन मरीज के पूरे शरीर में फैल जाता, जिससे उसकी जिन्दगी खतरे में पड़ सकती थी. 

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हृदय से तार निकाला बेहद जोखिम भरा काम:

- दरअसल, पेसमेकर और तार इम्प्लांट करने के बाद जैसे-जैसे पुराना होता जाता है, वह शरीर की नसों और टिश्यू के साथ चिपकने लगता है.

- मरीज के पेसमेकर लगे 27 साल हो चुके थे.

- ऐसे में पेसमेकर की तार हृदय की नसों और टिश्यू के साथ अच्छे से चिपक गई थी.

- तार को निकालने में जरा सी लापरवाही होने पर नस या हृदय की झिल्ली फटने का खतरा था.

- नई तकनीक लीड लॉकिंग डिवाइस और टाइट रेल डिवाइस की सहायता से सफल किया केस.

- इस तकनीक में पेसमेकर की तार के साथ चिपकी नसों और दूसरे टिश्यू को निकालने के लिए पहले लीड लॉकिंग डिवाइस से तार को पकड़ा गया. 

- फिर टाइट रेल डिवाइस से धीरे-धीरे नसों और टिश्यू से उसे अलग किया गया.

- डॉ. अजीत बाना ने बताया कि लीड एक्सट्रैकेशन एक कठिन प्रक्रिया है जो आमतौर पर ओपन हार्ट सर्जरी द्वारा की जाती है. 

- इस बार डॉ मक्कड़ के नेतृत्व में कार्डियोलॉजी टीम ने बिना किसी ऑपरेशन के लीड लेकर अभूतपूर्व काम किया है. 

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जयपुर: राज्य राजस्व आसूचना निदेशालय यानी SDRI ने नागौर जिले में खान और परिवहन विभाग के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई की है. एसडीआरआई ने दो जगहों पर खानों में रॉयल्टी चोरी और मोटर वाहन कर चोरी के रूप में 5 करोड़ टैक्स चोरी का खुलासा किया है. कार्रवाई नागौर जिले के डीडवाना में भोजास और निम्बीजोधा गावों में की गई है. 

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शिकायत के बाद एसडीआरआई की टीमों ने औचक जांच और कार्रवाई की: 
नागौर जिले में निम्बीजोधा और भोजास गांवों के पास मेसेनरी स्टोन की खानों की जांच में करोड़ों रुपए की खान की रॉयल्टी और परिवहन कर की कर चोरी उजागर हुई है. एसडीआरआई को जानकारी मिली थी कि निम्बीजोधा में खान विभाग द्वारा आवंटित मेसेनरी स्टोन की खानों में अवैध खनन किया जा रहा है. शिकायत के बाद एसडीआरआई की टीमों ने औचक जांच और कार्रवाई की. जांच में दो खानों के मध्य गेप एरिया में खनन कार्य होता पाया गया. गेप एरिया में 30 मीटर चौड़ाई, 77 मीटर लम्बाई और 12 मीटर गहराई में खनन कार्य किया हुआ मिला. इससे निकाले गए मेसेनरी स्टोन की मात्रा 72072 मीट्रिक टन पाई गई. खनिज की पेनेल्टी सहित रॉयल्टी लगभग 2 करोड़ मानी गई है. जुर्माना राशि 2 लाख सहित यह राशि 2 करोड़ 2 लाख बनती है, जिसे खनन पट्टाधारी से वसूल किए जाने का नोटिस खान विभाग द्वारा दिया जा रहा है. इसके अलावा नागौर के ही तांतवास भोजास गांव में 6 खानों के सैम्पल लिए गए. 

लगभग 1 लाख मीट्रिक टन खनिज प्राप्त हुआ:
खान पर पड़े खनिज का भौतिक सत्यापन किया गया जो कि लगभग 1 लाख मीट्रिक टन प्राप्त हुआ. खनन पट्टाधारी कम्पनी नोखा मिनरल्स एवं कंस्ट्रक्शन के रिकार्ड की जांच करने पर पता चला कि खानों से पूरा खनिज NKC प्रोजेक्ट प्रा. लि. जोधपुर को भेजा जा रहा है. जिसका इस्तेमाल NHAI के सड़क निर्माण कार्य में किया जा रहा है. नियमानुसार सड़क निर्माण कार्य में खनिज का इस्तेमाल शॉर्ट टर्म परमिट जारी होने पर ही किया जा सकता है. खनन कम्पनी सभी जारी किए गए खनिज के परमिट उपलब्ध नहीं करवा सकी. इस पर नोखा मिनरल्स एवं कंस्ट्रक्शन पर लगभग 2 करोड़ 80 लाख रुपए की रॉयल्टी चोरी का अनुमान खान विभाग और एसडीआरआई की टीम ने किया है.

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राशि के वसूली के लिए नोटिस देने की कार्रवाई शुरू कर दी:
खान विभाग नागौर की टीम ने इस राशि के वसूली के लिए नोटिस देने की कार्रवाई शुरू कर दी है. मौके पर ही नागौर डीटीओ की टीम ने एक जेसीबी और 2 डम्परों के दस्तावेज जांचे, जिनका टैक्स जमा नहीं हुआ था. इस पर इनका चालान बनाया गया. यह प्रकरण इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि एक ही व्यक्ति के विरू़द्ध एसडीआरआई की खनन, परिवहन, पंजीयन एवं मुद्रांक एवं वाणिज्यिक कर शाखा की टीमों ने एक साथ मिलकर कार्रवाई की है और एसडीआरआई का गठन भी इन्हीं विभागों की कर चोरी पकड़ने के उद्देश्य से किया गया है. 

...काशीराम चौधरी, फर्स्ट इंडिया न्यूज, जयपुर

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जयपुर: 5 दिन पहले प्रदेश सरकार ने राजस्थान में उच्च शिक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को प्रमोट करने का फैसला लिया, लेकिन उसके 2 दिन बाद ही यूजीसी ने पूरे देश में उच्च शिक्षा के अंतिम वर्ष की परीक्षाएं अनिवार्य रूप से आयोजित करवाने की गाइड लाइन जारी की. यूजीसी की गाइडलाइन जारी होने के बाद ही उच्च शिक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थी असमंजस में पड़ गए. 

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एनएसयूआई यूजीसी की गाइड लाइन के विरोध में उतर चुकी: 
यूजीसी की गाइडलाइन के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने जहां यूजीसी की गाइडलाइन का अध्ययन करने के बाद कोई फैसला लेने का निर्णय लिया, तो वहीं छात्र संगठन एनएसयूआई यूजीसी की गाइड लाइन के विरोध में उतर चुकी है. एनएसयूआई छात्र संगठन की ओर से आज राजस्थान विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर विरोध प्रदर्शन किया गया. प्रदर्शन के दौरान यूजीसी और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई. प्रदर्शन कर रहे छात्र नेताओं ने यूजीसी की गाइडलाइन की प्रतियां भी जलाई.

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यूजीसी को छात्रों के स्वास्थ्य से कोई लेना देना नहीं:
विरोध प्रदर्शन में एनएसयूआई प्रदेशाध्यक्ष अभिमन्यु पूनिया सहित बड़ी संख्या में छात्र नेता मौजूद रहे. अभिमन्यु पूनिया ने कहा कि "परीक्षाएं रद्द करवाने की मांग को लेकर 2 महीने से एनएसयूआई का पूरे प्रदेश में आंदोलन चल रहा था. जिसके बाद सरकार ने छात्र हित में बड़ा फैसला लेते हुए छात्रों को प्रमोट करने का फैसला लिया, लेकिन केंद्र सरकार और यूजीसी को छात्रों के स्वास्थ्य से कोई लेना देना नहीं है. वर्तमान दौर में कोरोना का संकट लगातार बढ़ता जा रहा है, ऐसे में यूजीसी द्वारा परीक्षाओं के आयोजन को लेकर लिया गया फैसला छात्र हित में नहीं है. अगर यूजीसी अपने इस फैसले को नहीं बदलती है तो एनएसयूआई की ओर से पूरे देश में एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा. 

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जयपुर: सांभर झील में प्रवासी पक्षियों की मौतो के मामले में राज्य सरकार अब तक मौत का कारण  पता नहीं कर पायी है. स्वप्रेणा प्रसंज्ञान से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति और जस्टिस प्रकाश गुप्ता की खण्डपीठ ने इस पर नाराजगी जतायी है. हाईकोर्ट ने पवासी पक्षियों की मौत का कारण नहीं बताने पर एक कमेटी का गठन करने का फैसला किया है. साथ ही अदालत ने सभी पक्षों से किसी चिन्हित अधिकारी या वैज्ञानिक के नाम के लिए सुझाव भी मांगे हैं. 

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मई के दूसरे सप्ताह में सांभर लेक में दर्जनों प्रवासी पक्षियों की मौत का मामला दूसरी बार सामने आया था. जिस पर न्यायामित्र विनीत जैन ने एक प्रार्थना पत्र पेश कर मामले की शीघ्र सुनवाई की गुहार लगायी थी. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि मृत पक्षियों के शाव सड़ जाने के चलते उनका पोस्टमार्टम नहीं हो पाया और उनकी मौतों कारण भी पता किया जा सकता. वहीं घायल पक्षी की मौत हो जाने पर उसका पोस्टमार्टम किया गया. सरकार ने उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट अदालत में पेश करते हुए बताया कि पक्षी की मौत वायरण की वजह से हुई लेकिन ये नहीं बताया कि कौनसे वायरस की वजह से हुई. ना ही ये बताया कि किस तरह का वायरस इंफेक्शन था और वायरस का नेचर क्या था. इस पर अदालत ने नाराजगी जाहिर की. 

न्यायमित्र ने कहा बारिश होने वाली फिर से आयेंगे प्रवासी पक्षी:
सुनवाई के दौरान न्याय मित्र नितिन जैन ने अदालत को बताया कि प्रदेश में जल्दी ही बारिश के कारण साभंर झील में पानी आएगा और मानसून समाप्त होने के कुछ दिनों के बाद से प्रवासी पक्षियों का आना भी फिर से शुरु हो जाएगा. इसलिए यह आने वाले सीजन में इन प्रवासी पक्षियों को मौत से बचाने के लिए जरुरी उपाय करना बहुत आवश्यक है. पक्षियों की मौत की वजह केमिकल झील में डालना और अवैध खनन है. 

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अदालत ने मांगे नाम:
मुख्य न्यायाधीश की खण्डपीठ ने प्रवासी पक्षियों की मौतों की जांच के लिए एएसजी, न्यायमित्र और एएजी से मामले की जांच और निरीक्षण के लिए किसी विशेष अधिकारी, वैज्ञानिक या विशेषज्ञ का नाम के सुझाव मांगे हैं. अदालत ने कहा कि अवैध रुप से नमक बनाने वालों की पहचान करने और संपूर्ण झील का निरीक्षण करवाया जाना जरूरी है जिसके लिए सभी से एक सपताह में नाम देने को कहा है. मामले पर अब सुनवाई 27 जुलाई को होगी. 

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जयपुर: विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी नवाचारों में जुटे है. उन कामों को कर रहे जो वर्षों से नहीं हुये इन्हीं में से एक रहा विधानसभा के कार्मिकों की डीपीसी के जरिये प्रमोशन किया जाना, इनमें कुछ ऐसे रहे जिन्हें 30 सालों बाद सौगात मिली. नवाचारों की कड़ी में डॉ सीपी जोशी ने विधायकों को online प्रश्न लगाने की बड़ी पहल की है. 

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स्पीकर पद संभालने के बाद डॉ सीपी जोशी ने विधानसभा की कार्यप्रणाली में आमूल चूल परिवर्तन किये और कीर्तिमान बनाये. सबसे पहले उस पहल के बारे में बताते है जो जुड़ी विधानसभा के कार्मिकों से, बरसों बाद कार्मिकों की डीपीसी हुई और बरसों से एक सीट पर बैठे कार्मिकों के हुये तबादलें. 

विधानसभा में सालों से अटके पड़े कार्मिकों के तबादले किये:  

- ऐसे कार्मिक भी जो 30 सालों से एक ही सीट पर बैठे थे 

- 82 कार्मिकों के तबादलें किये गये

- वहीं 42 कार्मिकों की डीपीसी करके प्रमोशन किया गया

- विधानसभा सचिवालय ने कार्मिकों के हित में फैसले लिये 

विधानसभा स्पीकर डॉ सीपी जोशी ने ऑनलाइन पर्ची सिस्टम के बाद ऑनलाइन प्रश्न लगाने की सुविधा विधायकों को दी है. ये सुविधा अभी से चालू हो गई है. विधानसभा सचिव प्रमिल कुमार माथुर के निर्देशों पर विधानसभा को अत्याधुनिक बनाने से जुडी सेल काम कर रही है. 

विधानसभा की पहल: 

- Online प्रश्न लगा सकते है विधायक

- इंटर सेशन में भी सवाल लगा सकते है

- मेम्बर्स लॉग इन करना होगा

- फिर प्रश्न टाइप करके देने होंगे 

- मोबाइल नम्बर पर वेरिफिकेशन के लिये ओटीपी आयेगा

- विधायक को विस आकर सवाल लगाने की जरुरत नहीं पड़ेगी

- वे अपने घर बैठे ही सवाल लगा सकता है

- इंटर सेशन में सात दिन में एक सवाल दे सकते है

- पर्ची ऑनलाइन सिस्टम पहले ही चालू कर दिया था 

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अब डॉ सीपी जोशी का ड्रीम प्रोजेक्ट है विधायकों के लिये बनने वाला बहुमंजिला अपार्टमेंट. इमारत खड़ी होने में समय लगेगा लेकिन नींव डॉ सीपी जोशी के कार्यकाल में रख दी जाएगी.

...फर्स्ट इंडिया के लिये योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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जयपुर: केन्द्र सरकार की ओर से एक साल पहले लागू किए गए नए मोटर व्हीकल एक्ट के संसोधित जुर्मानों की अधिसूचना राज्य सरकार ने बुधवार को जारी कर दी. सरकार ने 36 जुर्मानों में संसोधन किया है. 

नई जुर्माना राशि के तहत अगर अब बिना लाइसेंस बनवाए या फिर बिना वैध लाइसेंस वाहन चलाया तो पांच हजार रुपए जुर्माना देना पड़ेगा. प्रदेश में पहले यह जुर्माना 500 रुपए था. वहीं बिना सीट बेल्ट और हेलमेट के वाहन चलाने पर एक हजार का जुर्माना भरना पड़ेगा. बुधवार शाम को ही जुर्माने लागू हो गए हैं. जुलाई 2019 में केन्द्र सरकार की ओर से नए मोटर एक्ट के प्रावधानों को लागू किया गया था. इसके बाद राजस्थान में एक्ट में भारी जुर्माना राशि बताते हुए सरकार ने रोक लिया दी थी. इसको लेकर एक साल तक केन्द्र और राज्य सरकार के बीच विवाद चलता रहा. संसोधित जुर्मानों में राज्य सरकार ने जुर्मानों में कटौती की है. हालांकि कुछ जुर्माने यथावत रखे हैं. 

प्रदेश में अब दोगुने तक हो गए जुर्माना:
राज्य सरकार की ओर से लागू किए जुर्मानों में प्रदेश के पिछले जुर्माने के मुकाबले भारी वृद्धि हुई है. मोबाइल पर बात करने के जहां 500 रुपए जुर्माना लगता था. इस पर अब एक हजार रुपए तय किया है. वहीं, तेज गति से वाहन चलाने पर जहां 400 रुपए लिए जाते थे. अब एक हजार रुपए तय किए हैं.  


 अपराध                                           राज्य के जुर्माने                    केन्द्र के जुर्माने                         कमी    

मोबाइल पर बात करने पर                    1000                              10,000                                  9000

शराब पीकर वाहन चलाने पर               10000                        10000 और 6 महा की सजा        सजा हटाई

खतरनाक ड्राइविंग करने पर पहले में  1000 दूसरे 10000             10000                                    कुछ नहीं

सामान्य अपराध :            दोपहिया :100 रुपए चारपहिया 200    500—1500                              1300  

आदेशों की अवहेलना करने पर :    500 रुपए                              2000                                            1500

खतरनाक तरीके से वाहन चलाने पर : 1000 दूसरे अपराध पर 10 हजार   5000                                4 हजार 

बिना परमिट वाहन चलाने पर :       10 हजार                         10 हजार                                     कुछ नहीं
  
ओवरलोड वाहन होने पर : 20 हजार रुपए फिर प्रतिटन दो हजार रुपए  20,000                              कुछ नहीं

वर्जित क्षेत्र में वाहन चलाने पर :  20 हजार रुपए                              20 हजार                             कुछ नहीं
 
वाहन का आकार निर्धारित से अधिक होने पर : 20 हजार रुपए
 
बिना शीट बैल्ट लगाए वाहन चलाने पर: एक हजार                           1000                                   कुछ नहीं

दोपहिया वाहन पर दो से अधिक :   एक हजार रुपए                 एक हजार और तीन माह निलंबित     निलंबन हटाया

बिना अनुमति रेसिंग करने पर :  प्रथम पांच हजार फिर 10 हजार      जुर्माना 5000                           कुछ नहीं
 
 
बिना रजिस्ट्रेशन और फिटनेस वाहन चलाने पर :दोपहिया : दो हजार फिर पांच हजार  : पांच हजार से 10 हजार :   5 हजार 

तेज गति से कार या बाइक चलाने पर : एक हजार रुपए -                    1000                                    कुछ नहीं
 
तेज गति से भारी वाहन चलाने पर : दो हजाररुपए                                2000                                 कुछ नहीं

लाइसेंस एक्सपायर और निलंबित होने पर   5000                     5000 तीन माह की सजा                  सजा हटाई

असुरक्षित वाहन चलाने पर दुपहिया-      तिपहया 500 बाकी सभी का 1000 कार्मशियल 2000 - 1500 से 5000   3000
 
यात्री वाहनों के लिए: 5 हजार और दूसरे अपराध पर 10 हजार            10 हजार                               5000

बिना हेलमेट :           एक हजार -                             एक हजार तीन माह लाइसेंस निलंबित               निलंबन हटाया
 
इमरजेंसी वाहनों को रास्ता नहीं देने पर : 10 हजार रुपए-  10 हजार और छह माह की सजा                सजा हटाई 
 
बिना बीमा वाहन चलाने पर : दो हजार दूसरे अपराध में चार हजार     दो हजार                                   कुछ नहीं

ओवरलोड यात्रीभार मिलने पर : 100 रुपए प्रति यात्री                  200 रुपए प्रति यात्री               100 रुपए यात्री कम


 

मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना घोषित हो राष्ट्रीय परियोजना

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जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर राज्य की महत्वाकांक्षी पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की मांग की है. लगभग 37 हजार 247 करोड़ रूपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट से राज्य के 13 जिलों में पेयजल तथा 2.8 लाख हैक्टयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी. 

दूध व डेयरी प्रोडक्ट्स की शुद्धता के लिए 14 जुलाई तक अभियान- डॉ. रघु शर्मा  

योजना को जल्द से जल्द ही राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया जाए: 
सीएम गहलोत ने पत्र में लिखा कि ERCP की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) नवम्बर 2017 में आवश्यक अनुमोदन के लिए केन्द्रीय जल आयोग को भेजी जा चुकी है. उन्होंने आग्रह किया कि इस योजना को जल्द से जल्द ही राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया जाए. 

राजस्थान की किसी भी बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना को यह दर्जा प्राप्त नहीं: 
सीएम गहलोत ने कहा है कि केन्द्र सरकार ने पूर्व में 16 विभिन्न बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजनाओं को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया है, लेकिन राजस्थान की किसी भी बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना को यह दर्जा प्राप्त नहीं हुआ है. प्रदेश के कई जिलों में पेयजल की गंभीर समस्या के चलते इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देना और इसकी जल्द क्रियान्विति सुनिश्चित करना आवश्यक है.  

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पर्याप्त पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी:
उल्लेखनीय है कि ERCP परियोजना से झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, अजमेर, टोंक, जयपुर, दौसा, करौली, अलवर, भरतपुर एवं धौलपुर जिलों को वर्ष 2051 तक पीने तथा सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी. ERCP की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना से मानसून के दौरान कुन्नू, कुल, पार्वती, कालीसिंध एवं मेज नदियों के सब बेसिन के अधिशेष जल को बनास, मोरेल, बाणगंगा, गंभीर एवं पार्बती नदियों के सब बेसिन में पहुंचाया जाना है. 


 

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