चौथे दिन ही दिखने लगा गुर्जर आरक्षण आंदोलन का असर

Nizam Kantaliya Published Date 2019/02/11 06:52

मलारना डूंगर (सवाईमाधोपुर)। गुर्जर आरक्षण आंदोलन के आज चौथे दिन भी आंदोलनकारी ट्रैक पर जमें हैं। सवाई माधोपुर के मलारना स्टेशन के आसपास के दर्जनों गांव की आम जनता आंदोलन से प्रभावित होने लगी है। आंदोलन के चलते इन गांवों में आयोजित हो रहे विवाह समारोह में मावा और दूध से बनी मिठाईयां भी नहीं बन रही हैं।

मलारना स्टेशन के पास ट्रैक पर बैठे गुर्जर आंदोलनकारियो को गुर्जर समाज की ओर से हर तरह की रसद सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है, जिसमें भी आसपास के दर्जनों गांवों की ओर से दूध और छाछ की व्यवस्था की जा रही है। सुबह शाम करीब 2000 से अधिक लोगों के लिए सैकड़ों लीटर दूध आंदोलन स्थल पर भेजा जा रहा है। इस क्षेत्र में दुग्ध उत्पादक गुर्जर ही हैं, ऐसे में दूध उत्पादकों ने दूध की सप्लाई को बाजार से पूरी तरह रोक दिया है।

खास तौर से इन गांवों का दूध आंदोलनकारियों को भेजस जा रहा है, जिसका सबसे ज्यादा असर इस क्षेत्र में आयोजित होने वाले विवाह समारोहों पर भी दिख रहा है। दूध की सप्लाई नहीं होने से अब बाजार से लेकर घरों में भी न दूध उपलब्ध हो रहा और न ही दूध से बनी मिठाईयां।

बात सिर्फ अब दूध तक ही सीमित नहीं रह गई है। ट्रेन और बसों का संचालन बंद होने से 4 दिन में ही दूध के साथ ही सब्जियों और फलों की कमी होने लगी। मलारना स्टेशन के पास बसे मलारना डूंगर, श्योमली, पोथाली, पिलवा, बिलोली, गोखरू, मकसुदनपुरा, चौहनपुरा, सांकड़ा सहित दर्जनों गांवों में निरंतर आने वाली सब्जियों की आवक रुक सी गई है। बाज़ारों में न तो ग्राहक नज़र आ रहे हैं और न ही रसद सामग्री ही। गुर्जर आंदोलन से जहां पूरे प्रदेश की आम जनता प्रभावित हो रही है, वहीं इससे अछूते मलारना डूंगर के आस-पास के गांव भी नहीं रहे हैं।

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