आतंकवाद की मुख्यधारा में आने की कोशिश में पाक-भारत सरकार

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/01/11 07:47

नई दिल्ली। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को भारत सरकार ने करारा जवाब दिया है। इमरान खान ने कहा था कि भारत ने दोनों देशों के बीच संबंधों को ब्लॉक कर दिया है। इस पर जवाब देते हुए भारत सरकार ने कहा   कि इस्लामाबाद ने बातचीत के लिए अनुकूल माहौल बनाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।

सुत्रों के मुताबिक इस्लामाबाद ने दावा किया था कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, बावजूद इसके इस मोर्चे पर आंदोलन का कोई संकेत नहीं था। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसके विपरीत खान के रहते पाकिस्तान की कार्रवाइयों से पता चलता है कि इस्लामाबाद न केवल आतंकवादियों को समर्थन प्रदान कर रहा था, बल्कि आतंकवादी समूहों को मुख्यधारा में लाने की कोशिश कर रहा था। 

इसके लिए भारत सरकार ने कुछ प्वाइंट्स रखे जिससे साबित होता है कि पाकिस्तान आतंकवाद की मुख्यधारा में आने की कोशिश कर रहा है। बतादें, पाकिस्तान के धार्मिक मंत्री नूर-उल-हक कादरी ने 30 सितंबर, 2018 को सईद के साथ एक सार्वजनिक मंच साझा किया, जहां दोनों ने भारत विरोधी बयान दिए। 

जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान में JuD और FIF को प्रतिबंधित नहीं किया गया है। वे केवल आंतरिक मंत्रालय की NACTA यानि राष्ट्रीय काउंटर टेररिज्म अथॉरिटी की वॉच लिस्ट में हैं। वे कानूनी रूप से अपनी तथाकथित कल्याणकारी गतिविधियों को जारी रख सकते हैं, जिसका वे भारत-विरोधी गतिविधियों के लिए भारत-पाक बॉर्डर के आसपास उपयोग करते हैं। 

दरअसल, प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के नेता और यूनाइटेड जेहाद काउंसिल यानि यूजेसी के अध्यक्ष सईद सलाहुद्दीन ने अक्टूबर, 2018 में जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकवादियों के लिए पाकिस्तान से सैन्य समर्थन मांगा। यह मुजफ्फराबाद में UJC द्वारा जैश-ए-मोहम्मद के मोहम्मद असगर, हिज्ब-ए-इस्लामी के मसूद आमिर और लश्कर के डॉ. मंजूर की मौजूदगी में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में हुआ था। 
 

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