राज्य में बदलेगी उद्योग धंधों की सूरत, नई सरकार से उम्मीदें परवान पर

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/12/08 08:10

जयपुर। राजस्थान विधानसभा चुनाव के मतदान के बाद अब अगले सप्ताह गठित होने जा रही नई सरकार को लेकर औद्योगिक व व्यापारिक संगठन कई उम्मीदें लगा रहे हैं। मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए किए चुनावी वादों को पूरा करने के अलावा मंदी से जूझ रहे उद्योग और व्यापार को भी संबल देने के लिए सरकारी प्रयास शुरू होने की भी आशा है। माना जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनावों को देखते हुए शुरुआत में ही राज्य में गठित होने वाली नई सरकार अपनी तरफ से मतदाताओं पर ठोस छाप छोड़ने की कोशिश जरूर होगी।

वैश्विक स्तर पर चल रही मंदी से राजस्थान के उद्योग धंधे भी बुरी तरह प्रभावित हैं। बाजार में लगातार चल रही मंदी के चलते राज्य के उद्यमी और कारोबारी नई सरकार से काफी उम्मीदें लगाए हैं। इन उम्मीदों के परवान चढ़ने का सबसे बड़ा कारण इस साल के मध्य होने वाला लोकसभा चुनाव है, जिसमें सरकार का काम बोलेगा। राज्य के प्रमुख उद्योग व कारोबारी संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि GST लागू होने के बाद राज्य स्तर पर कर में राहत की तो उम्मीद नहीं की जा सकती, लेकिन केन्द्र सरकार की ओर से व्यापार व उद्योग धंधों व निर्यात कारोबार को गति देने के लिए जो नीतियां बनाई गई है। उनके क्रियान्वयन को लेकर यदि राज्य सरकार ठोस पहल करें, तो भी उसे कारोबारियों का समर्थन हासिल हो सकता है।

विधानसभा चुनाव के बाद आए एग्जिट पोल नतीजों को भी औद्योगिक संगठनों के पदाधिकारी अधिक तवज्जो नहीं देते। इनका कहना है कि पहले भी एग्जिट पोल के नतीजों को चुनाव परिणाम ने झुंठलाया है। कमोबेश यही बात सट्टा बाजार की ओर से सीटों के लेकर किए जाने वाले आंकलन को लेकर है। महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश इसके उदाहरण हैं। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि राज्य में सरकार किस दल की बनेगी। हालांकि यह जरूर कहा जा सकता है कि राज्य में सरकार चाहे जिस दल की बनें, उसकी प्राथमिकता राज्य के विकास को गति देने की होगी।

इसके लिए अधिकारियों को कमर तोड़ मेहनत जरूर करनी होगी। सरकार को नीतियों के क्रियान्वयन के लिए समय बद्ध रूप रेखा तय करनी होगी, जिसे काम पूरा करना है, उसकी जिम्मेदारी तय करनी होगी। इसके अलावा राज्य के औद्योगिक व व्यापारिक विकास के लिए व्यापारिक व औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों से संवाद कायम करना होगा।

राज्य के निर्यात में जवाहरात कारोबार की महत्वपूर्ण भूमिका है। जयपुर के जौहरी वर्षों से जैम बूर्स के निर्माण व इसके लिए भूमि की मांग करते रहें है। पूरे विश्व में जहां भी जैम बूर्स बनें हैं, वहां रत्न व आभूषण कारोबार को गति मिली है। मौजूदा भाजपा सरकार व पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने हमेशा जौहरियों की जैम बूर्स की मांग पर सकारात्मक संकेत दिए, लेकिन जैम बूर्स की जरूरत के अनुसार जमीन उपलब्ध कराने की कोई पहल नहीं हो सकी। अब यह उम्मीद राज्य में गठित होने वाली नई सरकार से है। 

दोनों ही प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने राज्य के युवाओं को रोजगार देने की बात कही है, लेकिन यह केवल सरकारी नौकरियों से ही संभव नहीं। ऐसे में यदि प्रदेश में नए उद्योग विकसित नहीं होते हैं, नया निवेश नहीं आता है तो राेजगार के अवसर सृजित होना व कौशल विकास कार्यक्रमों से तकनीकी ज्ञान हांसिल कर चुके युवाओं को नौकरी मिलना केवल कपोल कल्पना होगा। इसलिए जरूरत इस बात की भी है कि सरकार चुनाव घोषणा पत्र में किए वायदों को पूरा करने के लिए भी समय सीमा तय करें और इस दिशा में ठोस शुरूआत हो।

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in

2025 में RSS बनाएगा राम मंदिर !

जनरल के बाद अब मोदी का OBC पर \'फोकस\'
अब \'झाँसी की रानी\' का विरोध !
लोकसभा चुनाव का ऐलान मार्च के पहले हफ्ते में !
Big Fight Live हाज़िरजवाब \'सरकार\'... आज की बड़ी बहस |18 JAN, 2018
कंगना को करनी सेना का खुला चैलेंज
करनी सेना ने फिल्म मणिकर्णिका की रिलीज़ का विरोध किया
PM तक पंहुचा मुकुंदरा टाइगर रिज़र्व में गांवों की शिफ्टिंग का मामला
loading...
">
loading...