गेहूं के बदले सरकार ने डेढ़ लाख परिवारों पर लगाया 'गरीबी का ठप्पा', घरों के बाहर लिखवाया 'मै गरीब परिवार से हूं'

FirstIndia Correspondent Published Date 2017/06/21 16:18

दौसा। हर सरकार देश से गरीबी दूर करने के दावे करती नजर आती है, लेकिन इसके बावजूद आज भी लाखों-करोड़ों लोग गरीबी का दंश झेल रहे हैं। कई लोग ऐसे हैं, जो अपने और अपने परिवार के लिए दो जून का खाना हासिल करने के लिए पूरे दिन कड़ी मशक्कत करते हैं, जिसके बाद ही उन्हें शाम का खाना नसीब हो पाता है। ऐसे में देश में लाखों के गरीब ऐसे हैं, जिनको न तो तन ढकने के लिए कपड़ा है और न ही खाने के लिए अन्न का दाना।


ऐसे में देश के लाखों गरीब परिवारों को समुचित पोषण मुहैया कराने के लिए सरकारें इनका सहयोग करती है, लेकिन राजस्थान में हालात कुछ अलग नजर आ रहे हैं। यहां बने हालातों को देखकर ऐसा लगता है कि सरकार शायद गरीबों के साथ साथ गरीबी का भी मजाक उड़ा रही हो। दरअसल, राजस्थान के दौसा जिले में सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत गेहूं लेने वाले परिवारों के घरों के बाहर गरीबी का ठप्पा लगा दिया है।


इन घरों के बाहर लिखवा दिया गया है कि, 'मैं गरीब परिवार से हूं और एनएफएसए यानि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत गेहूं लेता हूं।' ऐसे में दौसा जिले के करीब 70 प्रतिशत परिवार ऐसे हैं, जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत गेहूं लेते हैं। यानि की दौसा जिले की 70 प्रतिशत आबादी पर गरीबी का ठप्पा लगा दिया गया है।


गौरतलब है कि मनमोहन सिंह सरकार के समय में शुरू की गई राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत बीपीएल व एपीएल परिवार को निःशुल्क गेहूं वितरण की व्यवस्था की गई थी। इसमें बाद में अपात्र लोगों के नाम हजारों की संख्या में हटा दिये गए और अब 70 प्रतिशत पात्र परिवार को ही गेहूं वितरण का लक्ष्य है। अपात्र लोग इस योजना का लाभ नहीं उठाये, इसके लिए घरों कें बाहर पीला बोर्ड पुतवाकर कुछ वाक्य लिखवा दिये, जिसमें लिखा है कि 'मै गरीब परिवार से हूं और एनएफएसए से गेहूं लेता हूं।'


बहरहाल, ऐसे में सरकार के इस रवैये से गरीबों की दीवारों पर 'गरीबी का ठप्पा' सा लगा हुआ नजर आने लगा है। वहीं दूसरी ओर, पहले से ही गरीबी का दंश झेल रहे इन परिवारों को अब शर्मिंदगी का अहसास होने लगा है। इसके साथ ही दूसरी सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि जिन लोगों के घरों के बाहर इस तरह से गरीबी का ठप्पा लगाया गया है, उन लोगों और उनके परिवार के लोगों को अब दूसरे लोग हेय दृष्टि से देखने लगे हैं।


आपको बता दें कि, दौसा जिले में करीब 2 लाख 40 हजार से अधिक परिवार रहते हैं और इन परिवारों में 52 हजार 164 परिवार तो बीपीएल यानि गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करते हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के पात्र परिवारों के बाहर गरीबी का ठप्पा लगा देने से जिले के 70 प्रतिशत यानि डेढ़ लाख से अधिक परिवारों के घरों के बाहर गरीबी का ठप्पा लगाकर शर्मिंदा कर दिया। घरों के बाहर इस प्रकार का संदेश लिखे जाने के कारण भले ही गरीब व्यक्ति खुद को शर्मिंदा महसूस कर रहा हो, लेकिन अधिकारी इस लिखावट को सरकारी आदेश बताकर अपना पल्ला झाड़ते हुए नजर आ रहे हैं।

 

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