जयपुर Jaipur: बीता हुआ साल पुराने कपड़ों के जैसे उतार दिया सबने... नए साल पर टीकम चंद बोहरा ने लिखी कविता

Jaipur: बीता हुआ साल पुराने कपड़ों के जैसे उतार दिया सबने... नए साल पर टीकम चंद बोहरा ने लिखी कविता

Jaipur: बीता हुआ साल पुराने कपड़ों के जैसे उतार दिया सबने... नए साल पर टीकम चंद बोहरा ने लिखी कविता

जयपुर: आज से नए साल 2022 का शुभारंभ हो गया है. इसी उपलक्ष्य में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी टीकम चंद बोहरा ने कविता लिखी है. जिसमें उन्होंने बीते साल की तुलना पुराने कपड़ों से की है. साथ ही नये साल को नयी पोशाक की उपमा दी है. लेकिन क्या कपड़े बदलने से ही इंसान के भीतर का सबकुछ बदल जाता है. आइए इसे ही कविता के माध्यम से समझने का प्रयास करते हैं.

टिकम चन्द बोहरा की कविता के बोल कुछ इस तरह है...

*नया साल: नयी पोशाक *

*पुराने कपड़ों के जैसे *
*उतार दिया है सबने *
*बीता हुआ साल। *
*पिछले साल को *
*टांग दिया है खूँटी पर *
*और नयी पोशाक की भाँति *
*लपेट लिया है नया साल। *
*मगर मन मेरा *
*करता है मुझसे सवाल। *
क्या अहम की गागर फोड़ेगा 
क्या अविश्वास का दामन छोड़ेगा,
क्या नहीं देखेगा औरों में खोट 
क्या किसी को नहीं पहुँचायेगा चोट, 
क्या बोलेगा मीठी वाणी 
जिह्वा की रोकेगा मनमानी, 
क्या घट घृणा के फोड़ेगा 
क्या लालच को छोड़ेगा, 
क्या चलेगा सच की राह 
क्या छूट पायेगी डाह, 
क्या ख़ुद में करेगा सुधार 
क्या तज सकेगा विकार, 
क्या होगा चिन्ता से रिक्त 
क्या होगा स्नेह से सिक्त, 
क्या हटा पायेगा उदासी 
क्या बाँटेगा शाबाशी,
क्या हटा पायेगा मुखौटा 
क्या मन नहीं करेगा छोटा, 
क्या जगा पायेगा बोध 
क्या छोड़ पायेगा क्रोध, 
क्या मदद को बढ़ेगा हाथ 
क्या अपनों के रहेगा साथ, 
क्या औरों में भरेगा हर्ष 
चुनौतियों से करेगा संघर्ष, 
क्या छू पायेगा उत्कर्ष 
*पूछता है नया वर्ष। *
*जवाब माँगते हैं सवाल *
क्या बदलेगा मन का हाल ?
*पुराने कपड़ों की मानिंद *
*होता है हर साल, *
*कपड़ों के बदलने से *
*कब बदला है *
*भीतर का हाल। *

*Copyright ✍🏻...टीकम ‘अनजाना

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