राजेश्वरी राज्य लक्ष्मी की राजनीति में 'एंट्री'! कई नेताओं को जमीन खिसकने का डर

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/09/03 09:06

जैसलमेर। राजस्थान के एक और राजपरिवार की वंशज और महारावल बृजराज सिंह की पत्नी राजेश्वरी राज्य लक्ष्मी चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। साल के आखिर में होने वाले विधानसभा चुनाव में शाही परिवार से राजनीति में एंट्री लेने जा रही है। इससे पहले राजेश्वरी ने किसी भी पार्टी से अपनी निष्ठा नहीं दिखाई है। दिलचस्प बात ये है कि राजेश्वरी के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों के दरवाजे खुले हैं। ऐसे में देखना ये है कि वो किसे चुनती हैं। वैसे राजेश्वरी राज्यलक्ष्मी के पास चुनाव जीतने का बढ़िया मौका है। जनता के बीच उनकी छवि एक सामान्य नागरिक की है। उनके पास न केवल राजपूत समुदाय का समर्थन है, बल्कि मेघवाल और दूसरी जातियां भी उनके साथ हैं। 

अगर राज्य लक्ष्मी कांग्रेस से चुनाव लड़ती हैं, तो पार्टी के रूपाराम ढांड़े, सुनीता भाटी, जनक सिंह भाटी और सवाई सिंह पीठला जैसे मजबूत कैंडिडेट रेस से बाहर हो जाएंगे। एक बीजेपी नेता ने कहा कि अगर वह बीजेपी के टिकट पर लड़ती हैं, तो डॉ. जितेंद्र सिंह, विक्रम सिंह नाचना, रेणुका भाटी और जालम सिंह जैसे दावेदारों को बैठना पड़ेगा। वहीं इन सबके बीच बीजेपी और कांग्रेस के नेता कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।

गौरतलब है ​कि मौजूदा विधानसभा में भी शाही परिवारों के वंशजों का अच्छा-खासा रसूख है। इसमें सबसे सीएम वसुंधरा राजे हैं, जो धौलपुर राजघराने की वंशज हैं। बीकानेर रॉयल फैमिली की सिद्धि कुमारी, डीग राजपरिवार की कृष्णेंद्र कौर दीपा, जयपुर राजघराने की दिया कुमारी, शाहपुरा के राव राजेंद्र सिंह और खींवसर रियासत के गजेंद्र सिंह खींवसर लोकतंत्र में 'पू्र्व राजवंशों' की नुमाइंदगी कर रहे हैं।

राजेश्वरी राज्यलक्ष्मी नेपाल के सिसोदिया राणा राजघराने की राजकुमारी हैं, जिनकी शादी जैसलमेर शाही परिवार के वंशज बृजराज सिंह से 1993 में हुई। हालांकि जैसलमेर राजपरिवार से सियासत में प्रवेश करने वाली वह पहली सदस्य नहीं हैं। 1957 में पूर्व महाराजा रघुनाथ सिंह सांसद बने थे। वहीं राजघराने के ही हुकुम सिंह 1957 से 1967 तक लगातार दो कार्यकाल के लिए विधायक रहे। इसके बाद वर्तमान वंशज बृजराज सिंह के चाचा चंद्रवीर सिंह 1980 में विधायक निर्वाचित हुए, उनके बाद डॉ. जितेंद्र सिंह का बतौर विधायक 3 साल का छोटा कार्यकाल रहा। इसके बाद से जैसलमेर रॉयल फैमिली का कोई सदस्य चुनाव नहीं जीत सका। बहरहाल, ऐसे में अब देखना ये दिलचस्प होगा कि राजेश्वरी राज्य लक्ष्मी किस राजनीतिक विचारधारा को अपनाएंगी।

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