झुंझुनूं: पांच साल की मासूम से दुष्कर्म का मामले में पॉक्सो कोर्ट ने सुनाई आरोपी को फांसी की सजा, कहा - पशु भी नहीं करते इस तरह का कृत्य तो

झुंझुनूं: पांच साल की मासूम से दुष्कर्म का मामले में पॉक्सो कोर्ट ने सुनाई आरोपी को फांसी की सजा, कहा - पशु भी नहीं करते इस तरह का कृत्य तो

झुंझुनूं: जिले के पॉक्सो कोर्ट ने आज एक बड़ा व ऐतिहासिक फैसला देते हुए पांच साल की बच्ची से दुष्कर्म करने के मामले में आरोपी को फांसी की सजा सुनाई है. साथ ही कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि इस तरह का कृत्य तो कोई पशु भी बच्चे के साथ नहीं करता. जैसा की आरोपी ने किया है. वहीं इन वारदातों के पीछे नशा और पोर्नोग्राफी को कारण मानते हुए सरकार को इस दिशा में कदम उठाने के लिए लिखने का फैसला लिया है. 

पॉक्सो कोर्ट के विशिष्ट लोक अभियोजक लोकेंद्रसिंह शेखावत ने बताया कि 19 फरवरी को झुंझुनूं जिले के पिलानी थाना इलाके के 21 वर्षीय युवक सुनिल ने पांच साल की मासूम बच्ची का अपहरण किया और उसे करीब 40 किलोमीटर ले जाकर गाडाखेड़ा के पास दुष्कर्म किया. जिसके बाद सड़क किनारे लहुलुहान हालत में पटककर चला गया. इस मामले में 20 फरवरी को मामला दर्ज होने के बाद आरोपी की गिरफ्तारी की गई और एक मार्च को 10 दिन बाद पुलिस ने कोर्ट में चालान पेश कर दिया. करीब 17 दिन की ट्रायल के बाद आज वारदातज के 27वें दिन पॉक्सो कोर्ट ने फैसला देते हुए आरोपी को फांसी को सजा सुनाई और साथ ही कहा कि इस तरह का कृत्य कोई पशु भी बच्चे के साथ नहीं कर सकता. 

आरोपी के मन और चेहरे पर पश्चाताप का कोई भाव नहीं था:
विशिष्ट लोक अभियोजक ने बताया कि इस मामले में आरोपी को कल न्यायालय ने दोष सिद्ध करने के बाद व्यक्तिगत सुनने के लिए भी बुलाया था. इस दौरान भी आरोपी के मन और चेहरे पर पश्चाताप का कोई भाव नहीं था. इसलिए न्यायालय ने मामले में कोई नरमी नहीं बरती. पत्रावली पर आए साक्ष्य और गवाहों को मद्देनजर रखते हुए फांसी की सजा दी गई. आपको बता दें कि इससे पहले भी 2016 में एक बच्ची से दुष्कर्म कर हत्या करने, 2018 में बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के मामले में भी कोर्ट फांसी की सजा सुना चुका है. पॉक्सो एक्ट में यह झुंझुनूं में तीसरा फांसी का निर्णय है. 

 

अपराधी को धार्मिक और मोटिवेशनल किताबें उपलब्ध करवाएं:
कोर्ट ने आरोपी से यह भी कहा है कि वह अपने जीवन को सुधाना चाहता या फिर अपराध के प्रति पश्चाताप के लिए तैयार है. कहीं सुधरने की मन में हो तो वह अच्छा व्यवहार रखे. साथ ही जेल प्रबंधन को कहा है कि अपराधी को धार्मिक और मोटिवेशनल किताबें उपलब्ध करवाएं. जो इसे दुबारा समाज में स्थापित होने में सहायक साबित हो. ताकि हाईकोर्ट या फिर सुप्रीम कोर्ट नरमी बरत सके. आरोपी ने व्यक्तिगत सुनवाई में न्यायालय से कहा कि अपराध का कारण नशा था. लेकिन आरोपी की इस दलील को कोर्ट ने नहीं माना. क्योंकि उसने करीब 40 किलोमीटर स्कूटी चलाई है और बच्ची को चॉकलेट व चिप्स भी दिलवाई है. ऐसे में वह सेंस में था. लेकिन कोर्ट में आरोपी ने यह भी स्वीकारा कि वह नशे के अलावा पोर्न वीडियो देखता था. जिसे गंभीर मानते हुए कोर्ट ने नशे को युवाओं से दूर रखने तथा पोर्न वीडियोज पर कंट्रोल करने के लिए लिखने का फैसला भी लिया है. 

पूरे जिले में फांसी की सजा की मांग को लेकर आंदोलन भी हुए थे:
पॉक्सो कोर्ट के इस फैसले की खुशी झुंझुनूं जिले में खास तौर पर देखी जा रही है. पूर्व सांसद संतोष अहलावत ने बताया कि उन्होंने इस मामले में राष्ट्रपति को पत्र लिखा था. इसके अलावा पूरे जिले में फांसी की सजा की मांग को लेकर आंदोलन भी हुए थे. ऐसे में कोर्ट ने एक ऐसा फैसला दिया है जिससे अन्य अपराधियों के मन में भी डर होगा. साथ ही ऐसी वारदातों को रोकने में काफी हद तक काबू पाया जा सकेगा. उन्होंने इस संदर्भ में झुंझुनूं पुलिस द्वारा पहले दिने से लेकर चालान पेश करने और फिर गवाही आदि करवाने में जो सक्रियता दिखाई. उसके लिए आभार जताया. 

आरोपी के इस कृत्य के बाद परिवार से भी संपर्क नहीं रहा:
आपको बता दें कि इस मामले में यह भी सामने आया है कि आरोपी के इस कृत्य के बाद परिवार से भी संपर्क नहीं रहा. कोर्ट में एक दिन भी परिवार के लोग नहीं दिखे. वहीं आज जब फैसला सुनाया तो भी न्यायाधिश सुकेशकुमार जैन ने पूछा कि परिवार का कोई सदस्य है तो भी कोई नहीं था. वहीं विशिष्ट लोक अभियोजक ने बताया कि कोर्ट में एक दिन भी ट्रायल के दौरान परिवार का कोई सदस्य नहीं दिखा. हालांकि कोर्ट में बचाव पक्ष के वकील ने जरूर आरोपी के मां के बीमार होने और उसके ऑपरेशन होने का हवाला देते हुए सजा में रियायत बरतने की बात रखी थी. 

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