Jodhpur: एक ही परिवार के 4 लोगों के जिंदा जलने की गुत्थी पुलिस के लिए बनी अबूझ पहेली, जानिए दर्द भरे लम्हों की दास्तान

Jodhpur: एक ही परिवार के 4 लोगों के जिंदा जलने की गुत्थी पुलिस के लिए बनी अबूझ पहेली, जानिए दर्द भरे लम्हों की दास्तान

Jodhpur: एक ही परिवार के 4 लोगों के जिंदा जलने की गुत्थी पुलिस के लिए बनी अबूझ पहेली, जानिए दर्द भरे लम्हों की दास्तान

जोधपुर: शहर के सुभाष नगर में रविवार रात एक मकान में लगी आग में चार लोगों के जल जाने की गुत्थी पुलिस के लिए अबूझ पहेली बन चुकी है. पुलिस इस पड़ताल में जुटी है कि यह सामूहिक आत्महत्या है या फिर तीन की हत्या के बाद एक सदस्य की आत्महत्या है या फिर एक हादसा? 

पुलिस के आला अधिकारी मौका मुआयना कर चुके है. एफएसएल की टीम बारीकी से प्रत्येक पहलू की जांच में जुटी है. वहीं जांच पड़ताल के लिए सुबह जहां एफएसएल टीम के विशेषज्ञों ने जांच पड़ताल की तो वहीं एम्स से आई विशेषज्ञों की टीम ने भी जांच करने के साथ जो आवश्यक सैँपल लेने थे उनको लिया है. 

पुलिस जांच पड़ताल के बाद फिलहाल शवों को जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है जहां पर इनका पोस्टमार्टम करने के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी. इनके परिवार की ही एक बेटी जो चंढीगढ में रहती है वह भी जल्दी ही जोधपुर पहुंचेगी जिसके बाद आगे की कार्यवाही पुलिस द्वारा की जाएगी.

पल्लवी ने अपनी जिम्मेदारी को मरते दम तक निभाया:
आपको बता दें कि दिव्यांग बहन और बुढ़े माता-पिता को संबल प्रदान करने को अपनी पूरी जिंदगी दांव पर लगाने वाली पल्लवी चौधरी ने आखिरकार आग से घिरे इन तीनों को बचाने की जद्दोजहद में अपनी जान तक कुर्बान कर दी. पल्लवी ने अपनी जिम्मेदारी को मरते दम तक निभाया. माता-पिता और बहन की सेवा करने के लिए उसने काफी बरस पहले तय कर लिया था कि मुझे शादी कर घर नहीं बसाना है. उसकी साथी टीचर्स का कहना है कि ऐसी समर्पित महिला नहीं देखीं हमने. 

दिव्यांग बहन और बुढ़े माता-पिता चलने-फिरने में असमर्थ थे:
जोधपुर शहर के सुभाष नगर में रविवार रात एक मकान में आग लगने से तीन महिलाओं सहित चार लोग जिंदा जल गए. इस हादसे में इनमें से तीन चलने-फिरने में असमर्थ थे. काजरी से रिटायर्ड सुभाष चौधरी (81) व नीलम चौधरी (76), बड़ी बेटी पल्लवी (50) और छोटी बेटी लावण्या (40) के कंकाल मिले. इसमें एक बेटी लावण्या दिव्यांग थी. जबकि दूसरी बेटी पल्लवी सेंट पॉल्स स्कूल में टीचर थीं. पल्लवी ही थी परिवार का एकमात्र सहारासुभाष चौधरी करीब 21 साल पहले काजरी से रिटायर हुए थे. जबकि उनकी पत्नी शहर के नामी एसपीएस स्कूल में टीचर के पद से रिटायर्ड हुई थी. वे और उनकी पत्नी नीलम वृद्धावस्था के कारण चलने-फिरने में पूर्ण सक्षम नहीं थे. 

बीच वाली बेटी पल्लवी ही परिवार का एकमात्र सहारा थीं:
दोनों व्हीलचेयर या बैसाखी के सहारे ही घर के दैनिक काम कर पाते थे. वहीं छोटी बेटी लावण्या 11वीं कक्षा तक एकदम से स्वस्थ थी, लेकिन एकदिन उसकी ऐसी तबीयत बिगड़ी कि उसके पूरे शरीर को लकवा मार गया. तब से वह बिस्तर पर ही थी. सबसे बड़ी बेटी की शादी हो रखी है और वह चंडीगढ़ में अपने परिवार के साथ रहती है. ऐसे में बीच वाली बेटी पल्लवी ही परिवार का एकमात्र सहारा थीं. वह शहर की एक निजी स्कूल में टीचर थीं. नौकरी के साथ सुबह-शाम का खाना, घरेलू कामकाज और मां-बाप व बहन को दवाइयां देने की जिम्मेदारी भी उसी पर थी. बड़ी शिद्दत से निभाई जिम्मेदारीपल्लवी के साथ काम करने वाली स्कूल टीचर्स का कहना है कि उन्होंने ऐसी जिम्मेदार और अपने माता-पिता व बहन के प्रति समर्पित महिला नहीं देखी. 

बरसों पहले तय कर लिया था कि वह शादी नहीं करेगी:
बहन की स्थिति और अकेले माता-पिता के बुढ़ापे की तरफ बढ़ते कदमों को देख उसने बरसों पहले तय कर लिया था कि वह शादी नहीं करेगी और पूरा जीवन इनकी सेवा में लगा देगी. अपनी स्कूल में वह एक बेहद ऊर्जावान टीचर से रूप में ख्यात थी. दूसरों की मदद के लिए हमेशा तैयार मिलती थी पल्लवी. परिवार और स्कूल की जिम्मेदारी के बीच उसने बेहतरीन सामंजस्य स्थापित कर लिया था. स्कूल के समय सिर्फ स्कूल और घर के समय सिर्फ घर. स्कूल में आयोजित होने वाले सारे प्रोग्राम में उसकी अहम हिस्सेदारी होती थी. हमेशा सताती थी परिवार की चिंतापल्लवी के बारे में टीचर्स का कहना है कि वह बहुत बोल्ड और स्वाभिमानी थी. जहां तक हो अपने काम में किसी की मदद लेना उसे पसंद नहीं था. सभी टीचर्स ने उसे हमेशा परिवार के लिए संघर्ष करते ही देखा. कोरोना काल में परिवार की चिंता काफी बढ़ गई थी. यहीं कारण रहा कि पल्लवी स्कूल में हमेशा मास्क लगाने सहित सारे एहतियात अपनाती. 

मुझे कुछ हो गया तो परिवार के तीन सदस्यों को कौन संभालेगा:
उसका कहना था कि यदि मुझे कुछ हो गया तो परिवार के तीन सदस्यों को कौन संभालेगा. यदि मेरे साथ कोरोना घर में घुस गया तो पहले से बीमार माता-पिता व बहन का क्या होगा? इस चिंता ने उसे काफी दबाव में ला दिया,लेकिन वह निराश कभी नजर नहीं आई.संभवतया तीनों को बचाने के प्रयास में गंवा बैठी जानपल्लवी की साथी टीचर्स का मानना है कि उसके परिवार के तीनों सदस्यों का वजन काफी ज्यादा था. साथ ही वे तीनों चलने-फिरने में असमर्थ थे. ऐसे में हो सकता है कि घर में किसी कारण से आग लगने के बाद इसमें फंसे तीनों सदस्यों को बचाने का पल्लवी ने भरसक प्रयास किया होगा. वह चाहती को खुद आग से बाहर निकल सकती थी, लेकिन उसने मरते दम तक अपनी जिम्मेदारी निभाई होगी और न तो वह तीनों को बाहर ला पाई और न ही खुद की जान बचा पाई.
 

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